Prateek Yadav Death: मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

Prateek Yadav Death: यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के छोटे भाई और समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह के सबसे छोटे बेटे, का मंगलवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में निधन - Vibes Of India

गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे प्रतीक यादव

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई और समाजवादी पार्टी के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के सबसे छोटे बेटे प्रतीक यादव का बुधवार सुबह 38 वर्ष की उम्र में ( Prateek Yadav Death ) निधन हो गया। मंगलवार सुबह करीब छह बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत लखनऊ के सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, वह लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

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Prateek Yadav Death
लंबे समय से बीमार थे प्रतीक यादव

सुत्रों के अनुसार के अनुसार, प्रतीक यादव हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। कुछ दिन पहले उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पल्मोनरी एम्बोलिज्म ऐसी स्थिति होती है, जिसमें खून का थक्का धमनियों में फंस जाता है और फेफड़ों तक रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी का असर उनके दिल की कार्यप्रणाली पर भी पड़ा था। बताया गया कि वह पहले से ब्लड थिनर दवाएं ले रहे थे और नियमित इलाज चल रहा था।

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पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा पार्थिव शरीर

पोस्टमार्टम के बाद दोपहर करीब दो बजे उनका पार्थिव शरीर लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर लाया गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थक, रिश्तेदार और राजनीतिक हस्तियां पहुंचीं। अर्पणा यादव दोपहर में लखनऊ पहुंचीं और सीधे अपने आवास के लिए रवाना हुईं। वहीं, डिंपल, धर्मेंद्र यादव सहित यादव परिवार के कई सदस्य भी वहां मौजूद रहे।

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अंतिम दर्शन के लिए नेताओं का तांता

प्रतीक यादव के निधन के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएल पुनिया (कांग्रेस नेता) भाजपा सांसद साक्षी महाराज और प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह (परिवहन मंत्री) भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं लखनऊ की सुषमा खर्कवाल (महापौर, लखनऊ) ने भी परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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जिम और फिटनेस का था काफी शौक

प्रतीक यादव ने हमेशा सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। हालांकि, वह अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल, फिटनेस प्रेम और सामाजिक गतिविधियों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते थे। बताया जाता है कि उन्हें जिम और फिटनेस का काफी शौक था। सोशल मीडिया पर भी उनकी अलग पहचान थी। उनकी पत्नी अपर्णा यादव राजनीति में सक्रिय रहीं, लेकिन कई मौकों पर यह चर्चा होती रही कि प्रतीक खुद राजनीति से दूर रहना पसंद करते थे।

परिवार और समर्थकों में शोक की लहर

प्रतीक यादव के निधन ( Prateek Yadav Death ) की खबर के बाद उनके आवास पर समर्थकों और शुभचिंतकों का जमावड़ा लग गया। यादव परिवार के करीबी लोग लगातार पहुंच रहे हैं। परिवार के लिए यह एक बड़ा व्यक्तिगत और भावनात्मक नुकसान माना जा रहा है।

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West Bengal Election Result 2026: बंगाल में ‘कमल’ की सुनामी! नंदीग्राम से जीते शुभेंदु अधिकारी, भवानीपुर में ममता की साख दांव पर

West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज 15 साल पुराना किला ढहता नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों और अब तक के नतीजों ने साफ कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में ऐतिहासिक बहुमत की ओर बढ़ रही है, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है।

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West Bengal Election Result 2026
नंदीग्राम में शुभेंदु का जलवा बरकरार

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा सीट से बड़ी खबर आ रही है। भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए जीत दर्ज कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुभेंदु ने करीब 9,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। 2021 में ममता बनर्जी को इसी सीट पर हराने के बाद, इस जीत ने शुभेंदु का कद पार्टी में और ऊंचा कर दिया है।

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ममता बनर्जी और शुभेंदु के बीच ‘हाई-वोल्टेज’ जंग

सभी की निगाहें अब भवानीपुर सीट पर टिकी हैं, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस सीट पर भी उनका मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से ही है (चूंकि शुभेंदु दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं)।

ताज़ा स्थिति:
  • भवानीपुर में मतगणना के 14वें राउंड के बाद ममता बनर्जी अपने प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी से लगभग 3,800 वोटों से आगे चल रही हैं।

  • हालांकि ममता बनर्जी यहां बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन राज्यव्यापी रुझानों में भाजपा बहुमत का जादुई आंकड़ा (148) पार कर 200 सीटों के करीब पहुंचती दिख रही है।

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नियमों के उल्लंघन का आरोप

भवानीपुर मतगणना केंद्र (West Bengal Election Result 2026) पर उस समय हंगामा मच गया जब शुभेंदु अधिकारी के इलेक्शन एजेंट सूर्यनील दास ने गंभीर आरोप लगाए। दास का दावा है कि ममता बनर्जी बिना पहचान पत्र (Identity Card) के और मोबाइल फोन के साथ मतगणना कक्ष में दाखिल हुईं, जो चुनाव आयोग के नियमों का सीधा उल्लंघन है। भाजपा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और कुछ समय के लिए मतगणना प्रभावित होने की खबरें भी आईं।

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क्या बंगाल में सत्ता परिवर्तन तय है?

अगर वर्तमान रुझान (West Bengal Election Result 2026) नतीजों में बदलते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली भाजपा मुख्यालय पर जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है। भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर घेरी गई ममता सरकार के लिए यह नतीजे किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। Read More West Bengal Election Result 2026: बंगाल में ‘कमल’ की सुनामी! नंदीग्राम से जीते शुभेंदु अधिकारी, भवानीपुर में ममता की साख दांव पर

UP Election 2027: चुनाव से पहले अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान… 300 यूनिट फ्री बिजली और महिलाओं को ₹40,000 पेंशन का वादा

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बड़े चुनावी वादों की झड़ी लगा दी है।

बिजली और पेंशन पर बड़ा ऐलान

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) से पहले बड़ा चुनावी दांव खेलते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर 2027 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी।

इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने वादा किया कि महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये की पेंशन दी जाएगी। उन्होंने पीडीए (PDA) के माध्यम से समाज के हर वर्ग को एक मंच पर लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव
स्मार्ट मीटर को बताया ‘ठगी का मीटर’

स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर की तेज रीडिंग बीजेपी के भ्रष्टाचार का नतीजा है। अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “जैसे ईवीएम में हेराफेरी होती है, वैसे ही बीजेपी के बिजली मीटर भी जनता की जेब काट रहे हैं।”

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2027 में बीजेपी मुक्त यूपी का लक्ष्य

कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी की जनविरोधी नीतियों, खाद की कमी और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं से जनता त्रस्त है। उन्होंने आह्वान किया कि आपसी तालमेल से UP Election 2027 में ऐसी मेहनत करें कि बीजेपी एक-एक सीट के लिए तरस जाए। उन्होंने दावा किया कि महंगा सिलेंडर और बिजली के भारी भरकम बिल ही बीजेपी का सत्ता से कनेक्शन काट देंगे।

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Bihar Politics: नीतीश कुमार का इस्तीफा, अब सम्राट चौधरी होंगे CM? विजय और निशांत के डिप्टी सीएम बनने की चर्चा तेज…

Bihar Politics: बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया है, जिससे राज्य में ‘नीतीश युग’ के एक बड़े अध्याय का अंत माना जा रहा है। इस इस्तीफे के साथ ही नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और सूत्रों की मानें तो बिहार की कमान अब सम्राट चौधरी के हाथों में जा सकती है।

VIDEO: नीतीश की भावुक विदाई, अब सम्राट CM, विजय और निशांत होंगे डिप्टी सीएम?  बिहार में सियासत तेज - India TV Hindi

राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज

आपको बता दें कि बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है।

राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे अधिक चर्चा है कि भाजपा के दिग्गज नेता और प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद गठबंधन में नए नेतृत्व पर सहमति बनती दिख रही है।

Bihar Politics

निशांत कुमार बनेंगे डिप्टी CM!

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सरप्राइज नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम है। सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार को डिप्टी सीएम पद के लिए मना लिया गया है। बताया जा रहा है कि निशांत पहले संगठन में रहकर अनुभव लेना चाहते थे, लेकिन बदलते समीकरणों के बीच वे अब सरकार का हिस्सा बनने को तैयार हैं।

निशांत कुमार के साथ-साथ अनुभवी नेता विजय चौधरी के भी डिप्टी सीएम बनने की प्रबल संभावना है। यानी बिहार में एक बार फिर दो डिप्टी सीएम वाला फॉर्मूला लागू होगा।

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कब होगा शपथ ग्रहण?

ताजा जानकारी के मुताबिक, आज शाम तक नए मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। सूत्रों के अनुसार, बुधवार को नए सीएम और डिप्टी सीएम का शपथ ग्रहण समारोह होने की संभावना है। यदि मंत्रियों का शपथ ग्रहण कल नहीं होता है, तो बाकी कैबिनेट का विस्तार मई के पहले सप्ताह में किया जा सकता है।

नीतीश कुमार की विदाई

नीतीश कुमार का इस्तीफा बिहार की राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। कई दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहने वाले नीतीश अब अपनी नई भूमिका की ओर देख रहे हैं। राजभवन के बाहर और राजनीतिक कार्यालयों में समर्थकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। Read More Bihar Politics: नीतीश कुमार का इस्तीफा, अब सम्राट चौधरी होंगे CM? विजय और निशांत के डिप्टी सीएम बनने की चर्चा तेज…

Bihar Politics: बिहार में ‘नीतीश युग’ का अंत, राज्यसभा सांसद के रूप में ली शपथ, नए सीएम पर मंथन तेज

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है। पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार ने आज आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजनीति में वापसी कर ली है। नीतीश कुमार ने आज दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। उनके इस कदम को बिहार में बड़े नेतृत्व परिवर्तन और नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राज्यसभा में नई पारी की शुरुआत

आपको बता दें कि संसद भवन के उच्च सदन में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने नीतीश कुमार को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस खास मौके पर नीतीश कुमार के साथ जेडीयू के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की।

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सीएम नीतीश कुमार
20 साल बाद बिहार की राजनीति में ‘महा-परिवर्तन’

नीतीश कुमार साल 2005 से (बीच में जीतन राम मांझी के 9 महीनों को छोड़कर) लगातार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे हैं। हाल ही में उन्होंने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा देकर यह साफ कर दिया था कि वह अब राज्य की सक्रिय राजनीति से हटकर केंद्र में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार हैं।

दिल्ली पहुंचने पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा,”20 साल तक वहां (बिहार) में रहे हैं। अब बहुत दिन वहां रह लिए, अब यहां (दिल्ली) में काम करेंगे। इसलिए वापस आ गए हैं।”

बिहार को नए मुख्यमंत्री का इंतजार, नीतीश कुमार ने ली राज्यसभा सांसद की शपथ
Nitish Kumar Rajya Sabha Oath
15 अप्रैल को नए CM की ताजपोशी संभव

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के साथ ही अब सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? दिल्ली में आज बिहार बीजेपी कोर ग्रुप की एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।

1. इस्तीफे की तारीख: सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 12 या 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

2. शपथ ग्रहण: माना जा रहा है कि 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का गठन और नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है।

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 ‘नीतीश मॉडल’ को आगे बढ़ाएगा NDA

बिहार सरकार के मंत्री विजय चौधरी ने नेतृत्व परिवर्तन पर कहा कि पूरा NDA एकजुट है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चाहे चेहरा जो भी हो, आगामी सरकार नीतीश कुमार के ‘सुशासन के मॉडल’ और विकास कार्यों को ही आगे बढ़ाएगी। बीजेपी इस बार बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए किसी नए और प्रभावशाली चेहरे को कमान सौंप सकती है, जो 2025 के विधानसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व कर सके। Read More Bihar Politics: बिहार में ‘नीतीश युग’ का अंत, राज्यसभा सांसद के रूप में ली शपथ, नए सीएम पर मंथन तेज

Parliament Budget Session 2026: लोकसभा में हंगामा जारी, कार्यवाही बार-बार स्थगित, राज्यसभा में बहस जारी

Parliament Budget Session 2026 – संसद के बजट सत्र का आज 10वां दिन भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी टकराव की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। लोकसभा से आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के वक्तव्य को कथित तौर पर रिकॉर्ड से हटाए जाने के मुद्दे पर गतिरोध बरकरार है। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही आज भी दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई, जबकि राज्यसभा में शोरगुल के बीच कार्यवाही जारी है।

लोकसभा में स्थगन, विपक्ष का विरोध जारी

आपको बता दें कि सुबह 11 बजे शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही (Parliament Budget Session 2026) विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण बाधित रही। विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला को कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस सौंपते हुए महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की मांग की। कांग्रेस समेत कई दलों का कहना है कि सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन नहीं कर रही और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विपक्षी सांसद स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि, इससे पहले 9 फरवरी को सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि ऐसा प्रस्ताव बजट सत्र के दूसरे चरण में लाया जा सकता है।

Parliament Budget Session 2026
Parliament Budget Session 2026
भाजपा महिला सांसदों की शिकायत

इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के व्यवहार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को लोकसभा में विपक्षी सांसदों के आचरण से भाजपा के सांसद, विशेषकर महिला सांसद, काफी नाराज थीं। रिजिजू के अनुसार, भाजपा की महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री की सीट के घेराव और सदन के वेल में घुसकर प्रदर्शन करने की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि शारीरिक टकराव की नौबत आ सकती थी, लेकिन भाजपा सांसदों ने संयम बरता।

Parliament Budget Session 2026
राज्यसभा में बजट पर चर्चा

राज्यसभा में हालांकि हंगामे के बावजूद कामकाज जारी है। संभावना जताई जा रही है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बजट 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देंगी। वहीं, लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा की मांग उठाई है।

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बजट चर्चा पर अनिश्चितता

लोकसभा में आज (Parliament Budget Session 2026) पर चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन लगातार हो रहे हंगामे के कारण इस पर संशय बना हुआ है। सोमवार को भी प्रश्नकाल बाधित रहा और अंततः दोपहर बाद पूरे दिन के लिए सदन स्थगित करना पड़ा था। स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की थी, लेकिन फिलहाल गतिरोध टूटता नजर नहीं आ रहा। Read More Parliament Budget Session 2026: लोकसभा में हंगामा जारी, कार्यवाही बार-बार स्थगित, राज्यसभा में बहस जारी

UP Budget 2026: यूपी बजट सत्र का हंगामेदार आगाज़, सदन में गूंजे ‘गो-बैक’ के नारे…

UP Budget 2026 – उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन बड़ी हलचल वाला रहा। यूपी विधानसभा का बजट सत्र (UP Budget 2026) आज से शुरू हो गया है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक सत्र की शुरुआत शांतिपूर्ण नहीं रही। जैसे ही राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपना भाषण शुरू किया, विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। आखिर सदन के अंदर और बाहर आज क्या-क्या हुआ, आइए देखते हैं इस रिपोर्ट में।”

बजट सत्र का हंगामेदार आगाज़ 

आपको बता दें कि यूपी विधानसभा के बजट सत्र (UP Budget 2026) का आगाज़ काफी हंगामेदार रहा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के सदन में पहुंचते ही विपक्षी दलों ने ‘गो-बैक’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। विपक्ष के इस भारी शोर-शराबे की वजह से सदन के भीतर काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है और यहां हंगामा करना शोभा नहीं देता। उन्होंने विपक्ष को नसीहत दी कि अगर उनके पास कोई जनता से जुड़ा मुद्दा है, तो वे शोर मचाने के बजाय उस पर चर्चा करें।

UP Budget 2026
रिपोर्ट में यूपी की तरक्की का पूरा ब्योरा

यही नहीं, मुख्यमंत्री ने आज एक ऐतिहासिक घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि राज्यपाल के भाषण के बाद सरकार पहली बार राज्य का ‘इकोनॉमिक सर्वे’ यानी आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने जा रही है। इस रिपोर्ट में यूपी की तरक्की का पूरा ब्योरा होगा। सीएम योगी का दावा है कि उनकी सरकार ने यूपी को पिछड़ेपन से निकालकर एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना दिया है।

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UP Budget 2026
इकोनॉमिक सर्वे ही बजट चर्चा की बुनियाद

योगी आदित्यनाथ ने जोर देते हुए कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार ने उनके लिए क्या काम किया है। अब यह इकोनॉमिक सर्वे ही बजट चर्चा की बुनियाद बनेगा। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विपक्ष चर्चा में हिस्सा लेगा या फिर यह सत्र भी सिर्फ हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा?”

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Magh Mela 2026: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने में जुटा प्रयागराज प्रशासन, माफी और प्रोटोकॉल पर बनी सहमति के संकेत

Magh Mela- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद को शांत करने के लिए प्रयागराज जिला प्रशासन अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम में हुई अपनी चूक को स्वीकार करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को भी तैयार हो गया है। मामले को सुलझाने के लिए लखनऊ से शासन के दो वरिष्ठ अधिकारी मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं।

शंकराचार्य ने रखी दो स्पष्ट शर्तें

बता दें कि इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन की कोशिशों के बावजूद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी वापसी को लेकर दो स्पष्ट शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि जिन अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया, वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। दूसरी शर्त के तहत संगम स्नान के दौरान चारों शंकराचार्यों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल को पूरी तरह लागू किया जाए।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने पुष्टि की है कि शासन स्तर से संपर्क किया गया है और अधिकारी वाराणसी पहुंचने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अब फैसला पूरी तरह प्रशासन के रवैये पर निर्भर करेगा।

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
मौनी अमावस्या की घटना के बाद शुरू हुआ विवाद

इस विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई थी। संगम नोज तक पालकी ले जाने को लेकर शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई थी। प्रशासन ने बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया, जबकि शंकराचार्य पक्ष का कहना था कि उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। घटना से आहत होकर शंकराचार्य पिछले 12 दिनों तक अपने शिविर में धरने पर बैठे रहे और बाद में नाराजगी जताते हुए माघ मेला छोड़कर वाराणसी चले गए थे।

माघी पूर्णिमा से पहले समाधान की कोशिश

शंकराचार्य का अचानक मेला छोड़ना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। माघी पूर्णिमा का प्रमुख स्नान निकट होने के कारण सरकार किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहती। अधिकारियों का कहना है कि शंकराचार्य को पूरे सम्मान के साथ वापस लाया जाएगा और प्रोटोकॉल के अनुसार ही संगम स्नान कराया जाएगा। Read More Magh Mela 2026: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने में जुटा प्रयागराज प्रशासन, माफी और प्रोटोकॉल पर बनी सहमति के संकेत

UP Cabinet Meeting: शिक्षकों को बड़ी राहत, अब मिलेगा कैशलेस इलाज, कैबिनेट बैठक में लगी कई अहम फैसलों पर मुहर

UP Cabinet Meeting- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक (UP Cabinet Meeting) में राज्य सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। कैबिनेट ने प्रदेश के करीब 11.92 लाख शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह सुविधा राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लागू की जाएगी।

UP Cabinet Meeting
UP Cabinet Meeting
माध्यमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को भी लाभ

बता दें कि कैबिनेट बैठक (UP Cabinet Meeting) में माध्यमिक शिक्षा विभाग के 2.97 लाख से अधिक कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मंजूरी दी गई। इस पर सरकार को 89.25 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। हालांकि, जो कर्मचारी पहले से किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, उन्हें इसका अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते वर्ष 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) के अवसर पर शिक्षकों को कैशलेस इलाज देने की घोषणा की थी, जिसे अब कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है।

इस फैसले से शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइया समेत शिक्षा विभाग से जुड़े सभी कार्मिक लाभान्वित होंगे। योजना के क्रियान्वयन पर सरकार को करीब 358.61 करोड़ रुपये का व्यय भार आएगा।

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Big relief for teachers
Big relief for teachers
कैबिनेट में 30 प्रस्ताव पास

बैठक (UP Cabinet Meeting) में कुल 32 प्रस्तावों में से 30 को मंजूरी दी गई, जबकि 14वें और 17वें प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया गया। इलके साथ ही कई अन्य प्रमुख फैसले पर भी मुहर लगाई गई, जिनमें शहरी पुनर्विकास नीति 2026 को स्वीकृति मिली, भवन निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया सरल होगी। बरेली और मुरादाबाद में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला की स्थापना की जाएगी। विकास शुल्क के संशोधित दरें लागू होंगी।

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Cashless Treatment
Cashless Treatment
आपदा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास

कैबिनेट (UP Cabinet Meeting) ने आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को भी मंजूरी दी। बहराइच के परतापुर समेत अन्य गांवों में प्रभावित परिवारों को भूमि पट्टा और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिए जाएंगे। कुल 136 परिवारों को पुनर्वास का लाभ मिलेगा, साथ ही खेती के लिए भी भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

CM फेलो को प्रतियोगी परीक्षाओं में राहत

सरकार ने सीएम फेलो को यूपीपीएससी और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षाओं में अधिकतम तीन वर्ष की आयु सीमा छूट और अतिरिक्त अंक देने का फैसला किया है। सेवा अवधि के आधार पर मुख्य परीक्षा में अधिमान अंक भी मिलेंगे। इससे युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर बढ़ेगा।

तीन वर्ष की वकालत का अनुभव अनिवार्य

कैबिनेट ने पीसीएस (न्यायिक) भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए अब तीन वर्ष की वकालत का अनुभव अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की संस्तुति के आधार पर लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे न्यायिक सेवा की भर्ती प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी व मजबूत होगी। Read More UP Cabinet Meeting: शिक्षकों को बड़ी राहत, अब मिलेगा कैशलेस इलाज, कैबिनेट बैठक में लगी कई अहम फैसलों पर मुहर

Prayagraj: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले विवाद के बाद प्रयागराज से प्रस्थान किया, न्याय की प्रतीक्षा की कही बात

Prayagraj: माघ मेले के दौरान हुए विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज (बुधवार) प्रयागराज से प्रस्थान कर गए। उन्होंने मेला प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें न्याय की प्रतीक्षा रहेगी।

मेले से लौटते समय की प्रेस कॉन्फ्रेंस

आपको बता दें कि 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) अपने अनुयायियों के साथ पालकी और रथ पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान मेला प्रशासन के साथ उनका विवाद सामने आया, जिसके बाद स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। इतने दिनों से चल रहे विवाद के बीच आज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज, माघ मेले से वापस कर लिया है। मेले से लौटते समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि, मौनी अमावस्या के दिन जब वे अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान के लिए जा रहे थे, तब उन्हें प्रशासन ने रोक दिया था। इसके बाद से वह अनशन पर बैठे थे और विवाद लगातार जारी रहा।

आगे उन्होंने कहा, “हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। आज स्वर बोझिल हैं और शब्द साथ नहीं दे रहे। भारी मन लेकर प्रयाग से लौटना पड़ रहा है। जो कुछ घटित हुआ, उसने मन झकझोर दिया। बिना स्नान किए विदा ले रहे हैं। न्याय की प्रतीक्षा कभी खत्म नहीं होती।”

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 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
प्रशासन का प्रस्ताव अस्वीकार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने बताया कि प्रशासन की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था जिसमें कहा गया कि भविष्य में स्नान के समय उन्हें पालकी के साथ सम्मानपूर्वक ले जाया जाएगा और पुष्प वर्षा भी की जाएगी। लेकिन प्रस्ताव में क्षमा के कोई शब्द नहीं थे, इसलिए उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया।

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप अपनी गलती के लिए क्षमा-याचना कर सकते हैं, तो ठीक है। लेकिन अगर नहीं, तो और कोई प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं। मुख्य मुद्दा बटुकों, सन्यासी और साधुओं के साथ किए गए व्यवहार का है। 10 दिन शिविर में बैठने के बाद जब जाने का निर्णय लिया, तभी यह प्रस्ताव आया। हम भारी मन से जा रहे हैं।”

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 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

मेला प्रशासन ने भेजे थे नोटिस

जानकारी के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन स्वामी को स्नान से रोकने के बाद मेला प्रशासन ने उन्हें दो नोटिस भेजे थे। दूसरे नोटिस में पूछा गया था कि क्यों न उनकी संस्था को मेले में दी जा रही भूमि और सुविधाओं को निरस्त किया जाए और प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए।

प्रशासन द्वारा लगाया आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने कहा कि प्रशासन द्वारा लगाया गया आरोप कि वे बग्घी से मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने गए थे, पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और निराधार है। वर्तमान में न तो वे शिविर में हैं और न ही उनके किसी आश्रम में कोई बग्घी है। Read More Prayagraj: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले विवाद के बाद प्रयागराज से प्रस्थान किया, न्याय की प्रतीक्षा की कही बात