Akshaya Tritiya 2026: आज 19 अप्रैल 2026, रविवार को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि आज के दिन किए गए शुभ कार्य, दान-पुण्य और निवेश का फल कभी समाप्त नहीं होता। इसी वजह से इसे अक्षय तिथि कहा जाता है।
Akshaya Tritiya 2026
अक्षय तृतीया को सर्वसिद्ध और अबूझ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। यही कारण है कि यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग पूजा-पाठ के साथ-साथ सोना, चांदी, वाहन, भूमि और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी भी करते हैं।
अक्षय तृतीया को सर्वसिद्ध और अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी पूरे दिन बिना पंचांग देखे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। फिर भी ज्योतिष के अनुसार कुछ विशेष समय खरीदारी और निवेश के लिए अधिक शुभ माने गए हैं।
अक्षय तृतीया पर खरीदारी का महामुहूर्त
खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त
लाभ योग: सुबह 9:06 बजे से 10:43 बजे तक
अमृत योग: 10:43 बजे से 12:20 बजे तक
शुभ योग: दोपहर 1:57 बजे से 3:57 बजे तक
शाम का शुभ योग: 6:49 बजे से 8:12 बजे तक
अमृत योग: 8:12 बजे से 9:35 बजे तक
चल योग: 9:35 बजे से 10:58 बजे तक
इस दौरान सोना, चांदी, हीरा, वाहन, भूमि, घर, बर्तन, टीवी, फ्रिज और अन्य कीमती वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है।
अक्षय तृतीया पर क्या करें?
1.दान-पुण्य: इस दिन जल से भरे कलश, पंखा, छाता और सत्तू का दान करना विशेष फलदायी होता है।
2.पूजा: माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा करें।
3.निवेश: भविष्य के लिए निवेश शुरू करने या नई संपत्ति का बयाना देने के लिए यह साल का सबसे श्रेष्ठ दिन है।
राहुकाल में खरीदारी से बचें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया 2026 (Akshaya Tritiya 2026) शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस समय किसी भी नए शुभ कार्य, निवेश या खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।
BE NEWS – हिंदू सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी देवता के समर्पित है। ऐसे ही शनिवार और मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ करने से जातक को शनिदेव से संबधित सभी कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानें इसका विशेष महत्व…
सुंदरकांड का बहुत ही फलदायी
हिंदू धर्म में शनिवार को सुंदरकांड और हनुमान चालीसा को पाठ करने का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार गोस्वामी तुलसी दास जी द्वारा लिखित ‘श्री रामचरितमानस’ के पांचवें अध्याय, सुंदरकांड का बहुत ही लाभकारी और फलदायी माना जाता है। वैसे तो हर दिन इसका पाठ किया जा सकता है पर शनिवार के दिन इसका विशेष महत्व माना जाता है। कहते है कि शनिवार के दिन हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ करने से बजरंगबली के साथ- साथ शनिदेव का भी आशीर्वाद भी मिलता है। जीवन में बार-बार आ रही परेशानियां, ग्रह दोष दूर हो जाते है।
सुंदरकांड का पाठ करने होने वाले लाभ
कहते है कि शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने से शनि की साढें साती, ढैय्या और महादशा के कष्टों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख- शांति आती हैं। ऐसी मान्यता है कि संकल्प लेकर लगातार सुंदरकांड का पाठ करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं, साथ ही बल और बुद्धि भी मिलती हैं। घर में मौजूद प्रेत बाधा, नकारात्मक शक्तियां और बुरी नजर दूर होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुंदरकांड का पाठ करते समय इसको अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।
Kanya Pujan Rules 2026: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का समापन कन्या पूजन के साथ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना कन्या पूजन के नौ दिनों का व्रत और साधना अधूरी मानी जाती है। साल 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को और राम नवमी 27 मार्च को मनाई जा रही है।
शास्त्रों में कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना गया है। ऐसे में यदि आप भी अपने घर पर कंजक खिलाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन 4 विशेष नियमों का पालन जरूर करें ताकि मां अंबे का आशीर्वाद आप पर बना रहे।
महत्वपूर्ण तिथियां (Navratri 2026 Calender)
दुर्गा अष्टमी: 26 मार्च 2026
राम नवमी: 27 मार्च 2026
कन्या पूजन
1. सात्विक भोजन करवाएं
कन्या पूजन में हमेशा सात्विक भोजन परोसें। इसमें प्याज, लहसुन या कोई तामसिक पदार्थ शामिल नहीं होना चाहिए। आमतौर पर कन्याओं को हलवा, पूरी, काले चने और सब्जी का प्रसाद दिया जाता है। सात्विक भोजन से पूजा पूर्ण मानी जाती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
3. काले कपड़े पहनने से बचें
हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार के दौरान काले कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। कन्या पूजन के समय भी काले कपड़े न पहनें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले रंग से नकारात्मक ऊर्जा का संकेत मिलता है, इसलिए पूजा के अवसर पर उजले और पारंपरिक रंगों के वस्त्र पहनना शुभ होता है।
2. साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
पूजा स्थल और घर को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक है। भोजन कराने से पहले कन्याओं के पैर धोना और जगह की सफाई करना जरूरी है। साफ-सुथरा वातावरण न सिर्फ पूजा में शांति लाता है, बल्कि देवी मां की कृपा को भी आकर्षित करता है।
4. दक्षिणा और विदाई का नियम
कन्याओं को केवल भोजन कराकर विदा कर देना पर्याप्त नहीं है। सामर्थ्य अनुसार कन्याओं को दक्षिणा (नकद राशि) जरूर दें। शास्त्रों के अनुसार, बिना दक्षिणा के दान या पूजा सफल नहीं होती। दक्षिणा के साथ आप फल, श्रृंगार की सामग्री या छोटे बर्तन भी उपहार स्वरूप दे सकते हैं। विदा करते समय उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना न भूलें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहाँ दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 सप्तमी: चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन, यानी 25 मार्च को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। नवदुर्गा के नौ रूपों में मां कालरात्रि सबसे उग्र और शक्तिशाली मानी जाती हैं। “काल” अर्थात मृत्यु और “रात्रि” अर्थात अंधकार, यानी मां कालरात्रि वह दिव्य शक्ति हैं जो काल को भी भय दिखाती हैं और समस्त अंधकार का नाश करती हैं। मां कालरात्रि को ब्रह्मांड की सबसे भयंकर शक्तियों में से एक माना जाता है, लेकिन अपने भक्तों के लिए वे अत्यंत दयालु और कल्याणकारी हैं। इसीलिए उन्हें “शुभंकरी” भी कहा जाता है – अर्थात शुभ फल देने वाली।
मान्यताओं के अनुसार इनकी पूजा करने से जातक को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता, सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं और जीवन में साहस, सुरक्षा एवं सिद्धि की प्राप्ति होती है।
चैत्र नवरात्रि
मां कालरात्रि का दिव्य स्वरूप
मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक और उग्र है, किंतु यह उग्रता असुरों और दुष्टों के लिए है – भक्तों के लिए तो वे सदा ममतामयी हैं।
वर्ण (रंग): मां का रंग अंधकार की भाँति गहरा काला है, जो अज्ञान और बुराई के नाश का प्रतीक है।
केश: उनके बाल पूरी तरह बिखरे हुए हैं, जो प्रकृति की अनियंत्रित शक्ति का प्रतीक हैं।
कंठ (गला): गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला सुशोभित है, जो उनकी दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।
नेत्र: मां के तीन नेत्र हैं जो ब्रह्मांड के तीनों काल – भूत, वर्तमान और भविष्य – को देखने में सक्षम हैं।
नासिका: नासिका से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं, जो उनके क्रोध और शक्ति का प्रतीक हैं।
वाहन: मां कालरात्रि का वाहन गधा (गर्दभ) है, जो कठोर परिश्रम और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है।
चार भुजाएं:
पहले हाथ में खड्ग (तलवार) — दुश्मनों का नाश
दूसरे हाथ में लौह अस्त्र (कांटा) — बुराई को जड़ से उखाड़ना
तीसरे हाथ में वरद मुद्रा — भक्तों को वरदान देना
चौथे हाथ में अभय मुद्रा — भक्तों को भय से मुक्त
मां कालरात्रि का दिव्य स्वरूप
पौराणिक कथा: क्यों धारण किया यह रूप?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब रक्तबीज नामक दैत्य ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था, तब उसका वध करने के लिए माँ दुर्गा ने अपनी शक्ति से कालरात्रि को उत्पन्न किया। रक्तबीज को वरदान था कि उसके रक्त की एक बूंद धरती पर गिरेगी तो उससे एक नया रक्तबीज पैदा हो जाएगा। तब माँ कालरात्रि ने उसका वध किया और उसका रक्त जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया, जिससे उस असुर का अंत संभव हो सका।
पूजा विधि (Puja Vidhi)
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
कलश पूजन: सबसे पहले स्थापित कलश और गणेश जी की पूजा करें।
लाल वस्त्र और पुष्प: मां कालरात्रि को लाल रंग के वस्त्र, गुड़हल के फूल (Hibiscus) और कुमकुम अर्पित करें।
भोग (Prasad): मां कालरात्रि को गुड़ (Jaggery) अत्यंत प्रिय है। उन्हें गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं।
दीपक और ध्यान: मां के सामने घी का दीपक जलाएं और उनके मंत्रों का 108 बार जाप करें।
पूजा विधि
शक्तिशाली मंत्र-
ध्यान मंत्र:एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
बीज मंत्र:ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः।
धार्मिक महत्व और ज्योतिषीय लाभ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मां कालरात्रि शनि (Saturn) ग्रह को नियंत्रित करती हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष है या साढ़े साती चल रही है, उनके लिए सप्तमी की पूजा विशेष फलदायी है।
Chaitra Navratri Day 6: नवरात्रि के पावन पर्व का छठा दिन शक्ति स्वरूपा मां कात्यायनी को समर्पित है। ऋषि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया, इसीलिए इनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा। मां कात्यायनी को दानवों, असुरों और पापियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। मां का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला है और इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें शस्त्र और कमल सुशोभित हैं।
मां दुर्गा का छठा स्वरूप मां कात्यायनी
मां कात्यायनी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर नाम के दैत्य का अत्याचार जब बढ़ गया, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से देवी कात्यायनी का प्राकट्य हुआ। महर्षि कात्यायन ने सबसे पहले इनकी पूजा की थी। माँ कात्यायनी ने ही महिषासुर का वध कर देवताओं और मनुष्यों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इन्हें युद्ध की देवी भी कहा जाता है।
पूजा विधि (Puja Vidhi)
24 मार्च को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले या लाल) धारण करें।
कलश पूजन: सबसे पहले कलश और गणेश जी की पूजा करें।
संकल्प: मां कात्यायनी का ध्यान करते हुए हाथ में जल लेकर संकल्प लें।
भोग: मां कात्यायनी को शहद (Honey) बहुत प्रिय है। पूजा में उन्हें शहद का भोग अवश्य लगाएं।
पुष्प: देवी को पीले फूल या लाल गुलाब अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आरती और मंत्र: अंत में मां की आरती करें और क्षमा याचना करें।
मां कात्यायनी का सिद्ध मंत्र (Mantra)-
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करने से एकाग्रता और शक्ति प्राप्त होती है-
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
या सरल मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
महत्व और फल (Significance)
मां कात्यायनी की पूजा के विशेष लाभ निम्नलिखित हैं-
विवाह में बाधा: जिन कन्याओं के विवाह में देरी हो रही हो या बाधा आ रही हो, उन्हें मां कात्यायनी की विशेष पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि ब्रज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना तट पर इन्हीं की पूजा की थी।
सफलता: मां की कृपा से भक्त के सभी रोग, शोक और भय नष्ट हो जाते हैं।
आध्यात्मिक शक्ति: छठे दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित होता है, जिससे उसे अलौकिक शक्तियों का अनुभव होता है।
BE News – चैत्र नवरात्रि 2026 के तीसरे (Navratri 2026 Day 3) दिन यानी 21 मार्च को मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता के माथे पर अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का वाहन शेर है और वे अपने भक्तों को भय से मुक्त कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वरदान देती हैं।
नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरी शक्ति माता चंद्रघंटा, जानें महत्व-
मां चंद्रघंटा नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरी शक्ति हैं। इनकी आराधना से साधक के मन से क्रोध, भय और नकारात्मकता का नाश होता है। माँ दस भुजाओं वाली हैं और हाथों में विभिन्न शस्त्र धारण किए हुए हैं। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त सच्चे मन से माँ चंद्रघंटा की उपासना करते हैं, उनके जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं।
माता चंद्रघंटा पूजा विधि
नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा इस प्रकार करें-
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थल तैयार करें पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
3. दीप प्रज्वलन करें धूप-दीप जलाएं और माता को सिंदूर, गंध, धूप, अक्षत अर्पित करें।
4. पुष्प अर्पित करें माता को चमेली के फूल अर्पित करना अतिशुभ है। चमेली न हो तो कोई भी पीला फूल अर्पित करें।
5. भोग लगाएं माता को खीर, शहद या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
6. मंत्र जाप करें पूजा के दौरान ‘ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः’ मंत्र का जाप करें। दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें।
7. आरती करें पूजा के अंत में माता की आरती करें और मन की मुराद मां से कहें।
माता चंद्रघंटा पूजा विधि
माता चंद्रघंटा के विशेष मंत्र
बीज मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।
ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
ध्यान मंत्र: पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
माता चंद्रघंटा की पूजा से क्या मिलता है लाभ?
मन से भय और चिंता का नाश होता है, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। शत्रुओं से रक्षा मिलती है। इसके साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और परिवार में मंगल और कल्याण होता है।
आज का शुभ रंग और प्रसाद
नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा में लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। माता को चमेली या पीले फूल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। भोग के रूप में माता को खीर या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः’ मंत्र का जाप करते रहें। माता का वाहन शेर है और वे अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।
Chaitra Navratri 2026 Day 2: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना को समर्पित है। भक्त इस दिन व्रत रखकर मां की पूजा करते हैं और तप, संयम तथा आत्मबल की प्राप्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से जीवन में धैर्य, शक्ति और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
मां ब्रह्मचारिणी
मां ब्रह्मचारिणी का महत्व
मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जिन्हें तप, त्याग और साधना की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। ‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द का अर्थ होता है—वह देवी जो ब्रह्म (सत्य) का आचरण करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, उसी तपस्विनी रूप को मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।
मां के दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल होता है, जो ज्ञान, तपस्या और संयम का प्रतीक है। उनका यह स्वरूप हमें जीवन में धैर्य, अनुशासन और आत्मनियंत्रण का महत्व सिखाता है। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर सहनशक्ति और दृढ़ता का विकास होता है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों का सामना सहजता से कर पाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती हैं और उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने की प्रेरणा देती हैं। जो साधक सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, उसके जीवन में मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही, यह भी माना जाता है कि मां की कृपा से व्यक्ति को ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है, जिससे वह सही निर्णय लेने में सक्षम बनता है।
करें इन 5 मंत्रों का जप
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जप शुभ माना गया है:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
तपश्चारिणी त्वं हि तप्तलोकत्रयाशुभा। ब्रह्मचारिणी नमस्तुभ्यं तपस्तत्त्वं प्रदेहि मे॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ॐ ह्रीं ब्रह्मचारिण्यै स्वाहा॥
विशेषज्ञों के अनुसार, इन मंत्रों का नियमित जप मन को स्थिर करता है और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
कौन सा रंग पहनना है शुभ?
नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग को विशेष महत्व दिया गया है। यह रंग शांति, सादगी और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करने से मां ब्रह्मचारिणी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में आस्था का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस साल 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ मां की आराधना करते हैं, उनके जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन ‘घटस्थापना’ और ‘मां की चौकी’ लगाने का विशेष महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत दिशा में रखी गई चौकी आपकी पूजा के फल को कम कर सकती है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां दुर्गा की स्थापना के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
चैत्र नवरात्रि, मार्च 2026
किस दिशा में स्थापित करें मां की चौकी?
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का ऊर्जा के संचार में बड़ा महत्व है।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा): मां दुर्गा की चौकी स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे उत्तम माना गया है। यह देवताओं की दिशा है और यहाँ सकारात्मक ऊर्जा का भंडार होता है।
उत्तर दिशा: यदि ईशान कोण में जगह की कमी है, तो आप उत्तर दिशा में भी चौकी लगा सकते हैं। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
भूलकर भी इस दिशा में न रखें माता की प्रतिमा
वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना जाता है। इस दिशा में मां दुर्गा की चौकी लगाना वर्जित है। दक्षिण दिशा में पूजा स्थल होने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
चौकी स्थापना के 5 जरूरी नियम (Vastu Tips)
मुख की दिशा: पूजा करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा ज्ञान और उत्तर दिशा धन-समृद्धि का प्रतीक है।
कपड़े का चुनाव: माता की चौकी पर हमेशा लाल रंग का साफ-सुथरा सूती या रेशमी कपड़ा बिछाएं। लाल रंग शक्ति और स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है।
गंगाजल से शुद्धि: चौकी स्थापित करने से पहले उस स्थान को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़क कर पवित्र जरूर करें।
कलश की स्थिति: अखंड ज्योति या कलश को हमेशा माता की प्रतिमा के दाईं ओर (Right Side) स्थापित करना चाहिए।
साफ-सफाई: ध्यान रखें कि पूजा स्थल के आस-पास कोई गंदगी या कबाड़ न हो। जूता-चप्पल पहनकर पूजा स्थल के पास न जाएं।
BE News – आज का दिन ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज 14 मार्च 2026 का राशिफल दिन, शुक्रवार का पवित्र दिन और ग्रहों की विशेष स्थिति कुछ राशियों के जातकों को विशेष कृपा प्रदान करेगी। आज गुरु, शुक्र और चंद्रमा की शुभ युति आपके जीवन में नई उर्जा और सकारात्मकता ला सकती है। कुछ राशियों पर देवी-देवताओं की विशेष कृपा बरस सकती है, जिससे उन्हें धन, करियर और परिवार से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। वहीं कुछ राशियों को आज थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का आज का संपूर्ण राशिफल, विशेष उपाय और भविष्यफल के बारे में।
14 मार्च 2026 का राशिफल
मेष राशि (Aries)
आज का दिन आपके लिए ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग ला सकती है और अधिकारियों से प्रशंसा मिलने के योग बन रहे हैं। आर्थिक मामलों में भी सुधार देखने को मिल सकता है। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा।
शुभ उपाय: भगवान हनुमान को गुड़ और चने का भोग लगाएं।
वृषभ राशि (Taurus)
वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन मिश्रित परिणाम देने वाला हो सकता है। कामकाज में थोड़ी भागदौड़ बढ़ सकती है। निवेश से पहले सोच-समझकर निर्णय लें। परिवार में किसी बात को लेकर चर्चा हो सकती है लेकिन स्थिति जल्दी संभल जाएगी।
शुभ उपाय: माता लक्ष्मी की पूजा करें और सफेद मिठाई का दान करें।
मिथुन राशि (Gemini)
आज का दिन मिथुन राशि के जातकों के लिए काफी सकारात्मक रहेगा। नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। व्यापार में लाभ के संकेत हैं और दोस्तों से सहयोग मिलेगा। छात्रों के लिए भी दिन अच्छा रहने वाला है।
शुभ उपाय: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।
कर्क राशि (Cancer)
कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन थोड़ा व्यस्त रह सकता है। काम के दबाव के कारण मानसिक तनाव हो सकता है, लेकिन शाम तक स्थिति बेहतर हो जाएगी। परिवार से सहयोग मिलेगा।
शुभ उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन बेहद शुभ रहने वाला है। देवी-देवताओं की विशेष कृपा से धन लाभ के योग बन रहे हैं। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। दांपत्य जीवन में भी खुशहाली रहेगी।
शुभ उपाय: सूर्य देव को जल अर्पित करें।
कन्या राशि (Virgo)
कन्या राशि वालों को आज अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत है। काम में जल्दबाजी से बचें। आर्थिक मामलों में सावधानी बरतना जरूरी है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है।
शुभ उपाय: भगवान विष्णु का स्मरण करें और पीले फल दान करें।
तुला राशि (Libra)
तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। व्यापार में लाभ और नई योजनाओं में सफलता मिल सकती है। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।
शुभ उपाय: मां दुर्गा को लाल फूल अर्पित करें।
वृश्चिक राशि (Scorpio)
आज के आपको अपने निर्णयों में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी बड़े फैसले से पहले सोच-विचार करें। कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है लेकिन आपकी मेहनत आपको आगे ले जाएगी।
शुभ उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
धनु राशि (Sagittarius)
धनु राशि वालों के लिए आज का दिन शुभ संकेत लेकर आया है। यात्रा के योग बन सकते हैं। व्यापार में लाभ और नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा।
शुभ उपाय: केले के पेड़ की पूजा करें।
मकर राशि (Capricorn)
आज का दिन मकर राशि के लोगों के लिए सामान्य रहेगा। कामकाज में धैर्य बनाए रखें। आर्थिक मामलों में स्थिरता रहेगी। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा।
शुभ उपाय: शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें।
कुंभ राशि (Aquarius)
कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन तरक्की के अवसर लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिभा की सराहना होगी। नए संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकते हैं।
शुभ उपाय: जरूरतमंदों को कंबल या वस्त्र दान करें।
मीन राशि (Pisces)
मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन बहुत शुभ रहने वाला है। देवी-देवताओं की विशेष कृपा से रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। आर्थिक लाभ के योग हैं और परिवार में खुशियां आएंगी।
शुभ उपाय: भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें।
आज का विशेष उपाय
14 मार्च 2026 को शुक्रवार होने के कारण माँ लक्ष्मी और माँ दुर्गा की पूजा अत्यंत फलदायी रहेगी। सभी राशिवाले आज सुबह स्नान के बाद शिवलिंग की पूजा करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण 11 बार करें। इससे जीवन में सकारात्मक शक्ति आएगी।
अस्वीकरण: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे केवल सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लें। किसी भी बड़े निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें।
BE News: हर दिन की शुरुआत के साथ ग्रह-नक्षत्रों की चाल बदलती रहती है और यही चाल तय करती है कि आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। शुक्रवार, 13 मार्च 2026 का दिन कई राशियों के लिए बेहद शुभ और फलदायी रहने वाला है। आज मेष, वृषभ और मिथुन समेत कई राशियों पर ग्रहों की विशेष कृपा बरसेगी। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण राशिफल, शुभ उपाय और दिन की विशेष सलाह।
Today’s Horoscope
मेष राशि (Aries) — 21 मार्च से 19 अप्रैल
आज का दिन मेष राशि के जातकों के लिए ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतें। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी।
शुभ उपाय: आज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें और लाल वस्त्र धारण करें। शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 3, 9
वृषभ राशि (Taurus) — 20 अप्रैल से 20 मई
वृषभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन विशेष रूप से शुभ है। व्यापार में नया अवसर मिल सकता है। परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा। धन लाभ के संकेत हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
शुभ उपाय: आज शुक्र देव की पूजा करें और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। शुभ रंग: सफेद, गुलाबी | शुभ अंक: 2, 6
मिथुन राशि (Gemini) — 21 मई से 20 जून
मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। बौद्धिक कार्यों में सफलता मिलेगी। नए विचारों को अमल में लाने का सही समय है। यात्रा की संभावना बन सकती है। वाणी पर संयम रखें।
शुभ उपाय: आज बुध देव की पूजा करें और हरे रंग का उपयोग करें। शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5, 7
कर्क राशि (Cancer) — 21 जून से 22 जुलाई
कर्क राशि के जातकों को आज भावनात्मक रूप से संतुलन बनाए रखना होगा। परिवार के किसी सदस्य से विवाद हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन सामान्य रहेगा। आर्थिक निर्णय सोच-समझकर लें।
शुभ उपाय: आज शिवजी को जल चढ़ाएं और सफेद वस्तु दान करें। शुभ रंग: चांदी, सफेद | शुभ अंक: 2, 4
सिंह राशि (Leo) — 23 जुलाई से 22 अगस्त
सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन बेहद शानदार रहने वाला है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। प्रेम जीवन में खुशियां आएंगी। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी।
शुभ उपाय: आज सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। शुभ रंग: सोना, नारंगी | शुभ अंक: 1, 5
कन्या राशि (Virgo) — 23 अगस्त से 22 सितंबर
कन्या राशि के जातकों के लिए आज कार्यक्षेत्र में चुनौतियां आ सकती हैं। धैर्य बनाए रखें और किसी भी विवाद से दूर रहें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। शाम का समय परिवार के साथ बिताएं।
शुभ उपाय: आज मां दुर्गा की पूजा करें और हरे मूंग का दान करें। शुभ रंग: हरा, भूरा | शुभ अंक: 3, 8
तुला राशि (Libra) — 23 सितंबर से 22 अक्टूबर
तुला राशि वालों के लिए आज का दिन संतुलन बनाए रखने वाला रहेगा। व्यापारिक साझेदारी में सावधानी बरतें। नए निवेश से बचें। रिश्तों में मधुरता बनाए रखें। शाम को कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
शुभ उपाय: आज शुक्रवार होने के कारण मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करें। शुभ रंग: नीला, सफेद | शुभ अंक: 6, 9
वृश्चिक राशि (Scorpio) — 23 अक्टूबर से 21 नवंबर
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा।
शुभ उपाय: आज हनुमान जी को सिंदूर और तेल चढ़ाएं। शुभ रंग: लाल, काला | शुभ अंक: 8, 9
धनु राशि (Sagittarius) — 22 नवंबर से 21 दिसंबर
धनु राशि वालों के लिए आज का दिन उत्साहवर्धक रहेगा। उच्च शिक्षा में रुचि रखने वालों को शुभ समाचार मिल सकता है। विदेश यात्रा की योजना बन सकती है। धार्मिक कार्यों में मन लगेगा।
शुभ उपाय: आज पीले वस्त्र पहनें और बृहस्पति देव की पूजा करें। शुभ रंग: पीला, नारंगी | शुभ अंक: 3, 12
मकर राशि (Capricorn) — 22 दिसंबर से 19 जनवरी
मकर राशि के जातकों के लिए आज कार्यक्षेत्र में विशेष सफलता मिलेगी। मेहनत का फल मिलने का समय आ गया है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वरिष्ठ जनों का आशीर्वाद मिलेगा।
शुभ उपाय: आज शनि देव को तेल चढ़ाएं और नीले रंग का उपयोग करें। शुभ रंग: नीला, काला | शुभ अंक: 6, 8
कुंभ राशि (Aquarius) — 20 जनवरी से 18 फरवरी
कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन सामाजिक कार्यों में सफलता दिलाने वाला रहेगा। मित्रों से सहयोग मिलेगा। नई योजनाओं पर काम शुरू करने का अच्छा समय है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
शुभ उपाय: आज शनि देव की पूजा करें और गरीबों को भोजन कराएं। शुभ रंग: आसमानी, नीला | शुभ अंक: 4, 7
मीन राशि (Pisces) — 19 फरवरी से 20 मार्च
मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद शुभ है। मन में सकारात्मक विचार आएंगे। कला और संगीत में रुचि बढ़ेगी। प्रेम संबंधों में नई मिठास आएगी। धन लाभ के योग बन रहे हैं।
शुभ उपाय: आज पीले कपड़े में केसर बांधकर मंदिर में चढ़ाएं। शुभ रंग: पीला, समुद्री हरा | शुभ अंक: 3, 11