Bengal Elections 2026: अमित शाह का कांग्रेस और TMC पर बड़ा हमला, कहा- “राहुल के साथ रहकर खड़गे की भाषा बिगड़ी..”

Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज दम दम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जोरदार हमला बोला।

राहुल गांधी की संगत पर अमित शाह का तंज

बता दें कि अपने संबोधन में शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान का पलटवार करते हुए कहा कि उनकी भाषा अब बदल गई है।

अमित शाह ने कहा, “खड़गे जी पहले इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करते थे, लेकिन राहुल बाबा के साथ रहकर उनकी भाषा भी बिगड़ने लगी है। इसी का असर है कि अब कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री मोदी को आतंकवादी कह रहे हैं।”

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ममता बनर्जी
बंगाल चुनाव के बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव

उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष जितना प्रधानमंत्री मोदी को गाली देगा, जनता उतनी ही मजबूती से भाजपा के साथ खड़ी होगी। शाह ने कहा, “जितना कीचड़ उछालने की कोशिश करेंगे, उतना ही कमल शान से खिलेगा।”

जनसभा में शाह ने दावा किया कि इस बार बंगाल चुनाव (Bengal Elections 2026) के बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की विदाई तय है और भाजपा सत्ता में आने पर राज्य का मुख्यमंत्री एक बंगाली नेता ही होगा।

West Bengal Election
West Bengal Election
“ऑपरेशन सिंदूर” और सुरक्षा पर हुंकार

इस दौरान अमित शाह ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले आतंकियों के साथ नरमी बरती जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। शाह ने कहा कि आतंकियों को उनके घर में घुसकर जवाब दिया गया।

ममता दीदी की विदाई का समय तय: शाह

टीएमसी पर हमला जारी रखते हुए शाह ने कहा, “4 मई को सुबह वोटों की गिनती शुरू होगी और दोपहर 1 बजे तक ममता दीदी का टाटा-बाय-बाय हो जाएगा।” उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम के बाद बंगाल में टीएमसी का राजनीतिक प्रभाव खत्म हो जाएगा।

महिला आरक्षण और घुसपैठ पर कड़ा रुख

महिला आरक्षण बिल को लेकर भी अमित शाह ने टीएमसी और कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन दलों ने मिलकर महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ने से रोकने का काम किया है। अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने जनता से 29 तारीख को बड़ी संख्या में मतदान (Bengal Elections 2026) करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि घुसपैठिया मुक्त बंगाल के निर्माण के लिए है। Read More Bengal Elections 2026: अमित शाह का कांग्रेस और TMC पर बड़ा हमला, कहा- “राहुल के साथ रहकर खड़गे की भाषा बिगड़ी..”

Women’s Reservation Bill 2023: महिला आरक्षण कानून लागू, लेकिन अभी नहीं मिलेगा 33% आरक्षण का लाभ, जानें क्या है वजह..

Women’s Reservation Bill 2023: देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। हालांकि, कानून लागू होने के बावजूद महिलाओं को इसका तत्काल लाभ नहीं मिल पाएगा।

अभी 33 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं 

आपको बता दें कि, लोकसभा में गुरुवार देर रात इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई। सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद यह अधिनियम अब विधिवत कानून बन चुका है, लेकिन मौजूदा लोकसभा और विधानसभाओं में अभी 33 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं होगा।

आधी रात को लागू हुआ महिला आरक्षण कानून 2023, कब से मिलेगा महिलाओं को 33% Reservation का फायदा?
Women’s Reservation Bill 2023 लागू
अभी क्यों नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे तकनीकी और संवैधानिक कारण हैं। महिला आरक्षण का लाभ तभी लागू किया जा सकेगा जब अगली जनगणना पूरी हो जाएगी और उसके आधार पर परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया संपन्न होगी। मतलब साफ है कि वर्तमान लोकसभा या मौजूदा विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता।

अधिकारियों का कहना है कि,”अधिनियम (Women’s Reservation Bill 2023) लागू हो चुका है, लेकिन इसे वर्तमान सदन में लागू नहीं किया जा सकता। अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाएंगी।”

Women's Reservation Act 2023: महिला आरक्षण कानून लागू, लेकिन 2029 से पहले नहीं मिलेगा फायदा — जानिए पूरा मामला - AVN News

क्या है महिला आरक्षण कानून?

सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (Women’s Reservation Bill 2023) पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून कहा जाता है।

Women Reservation Act 2023 Implemented Notification Released Hindi News - महिला आरक्षण कानून आज से देश भर में लागू, संसद में बहस के बीच सरकार का बड़ा फैसला, जारी किया ...

इस कानून के तहत:

1. लोकसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होंगी

2. राज्य विधानसभाओं में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित रहेंगी

3. अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षित वर्गों में भी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण होगा

यह कानून महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

2029 से लागू होने की चर्चा क्यों?

हालांकि मूल कानून के अनुसार आरक्षण 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा था, इसलिए इसके 2034 से पहले लागू होने की संभावना कम मानी जा रही थी। लेकिन संसद में इस समय चल रही बहस और प्रस्तावित संशोधनों के जरिए सरकार इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी में दिख रही है। इसी को लेकर लोकसभा में तीन विधेयकों पर चर्चा चल रही है, जिनका उद्देश्य महिला कोटा को जल्द लागू करना बताया जा रहा है।

महिला आरक्षण कानून देशभर में लागू, संसद में बहस के बीच सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन - News18 हिंदी

महिला आरक्षण कानून लागू होने से लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण कानून लागू होने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। इससे नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी और देश की राजनीति में संतुलित प्रतिनिधित्व देखने को मिलेगा। Read More Women’s Reservation Bill 2023: महिला आरक्षण कानून लागू, लेकिन अभी नहीं मिलेगा 33% आरक्षण का लाभ, जानें क्या है वजह..

Chennai: सीएम स्टालिन का केंद्र को अल्टीमेटम, कहा- “तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं!”

BE NEWS – तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक बार फिर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने के लिए कभी कोई जगह नहीं रही और न भविष्य में होगी। भाषा शहीद दिवस के मौके पर उन्होंने 1960 के दशक के हिंदी-विरोधी आंदोलन के बलिदानियों को याद किया और राज्य की भाषाई पहचान की रक्षा का संकल्प दोहराया।

हिंदी-विरोधी आंदोलन की दिखाई झलक 

आपको बता देंं कि  सीएम स्टालिन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि, भाषा शहीद दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए न तब कोई जगह थी, न अब है और न कभी होगी। इसके साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें 1965 के ऐतिहासिक हिंदी विरोधी आंदोलन की झलक दिखाई गई। इस वीडियो में द्रमुक के संस्थापक नेताओं सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि के योगदान को भी दिखाया गया।

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केंद्र से रार के बीच स्टालिन का बड़ा ऐलान, तमिलनाडु की स्वायत्तता पर ...

शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण

मुख्यमंत्री ने चेन्नई में शहीद थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इन आंदोलनकारियों ने हिंदी को अधिकारिक भाषा बनाने के विरोध में अपना जान गंवा दी थी। उन्होंने चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) भवन पर दोनों शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी-विरोधी आंदोलन के जरिए न सिर्फ अपनी भाषा, बल्कि पूरे देश में भाषाई अधिकारों और पहचान की रक्षा का मार्ग प्रशस्त किया।

दरअसल ‘भाषा शहीद दिवस’ उन युवाओं की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने 1964-65 के दौरान हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाए जाने के विरोध में अपनी जान गंवाई थी। इस आंदोलन के बाद तमिलनाडु में दो भाषा सूत्र अपनाया, जिसमें केवल तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन हिंदी भाषा को लेकर दिया बड़ा बयान ...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध

द्रमुक सरकार लगातार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध करती रही है। मुख्यमंत्री स्टालिन का आरोप है कि केंद्र सरकार इस नीति के जरिए पिछले दरवाजे से हिंदी को गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर थोपना चाहती है। Read More Chennai: सीएम स्टालिन का केंद्र को अल्टीमेटम, कहा- “तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं!”