Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस पर लखनऊ में सीएम योगी ने फहराया तिरंगा, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

Republic Day 2026: देशभर के साथ राजधानी लखनऊ में भी 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और तिरंगे को सलामी दी।

देशवासियों को गणतंत्र दिवस पर दीं शुभकामनाएं 

आपको बता दें कि सीएम योगी ने राजधानी लखनऊ में इस मौके पर प्रदेशवासियों और देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान की गूंज से पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया। तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, ” संविधान ने अनेक उतार- चढ़ाव देखे हैं फिर भी आज भारत मजबूत हुआ ”

76 वर्षों की यात्रा में भारतीय संविधान

आगे उन्होंने कहा कि पिछले 76 वर्षों की यात्रा में भारतीय संविधान ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इसके बावजूद देश ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक आज हर भारतवासी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और गौरव के भाव के साथ नए भारत के निर्माण में सहभागी बन रहा है।

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गणतंत्र दिवस पर महापुरुषों को किया नमन

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करते हुए कहा कि, “उनके नेतृत्व में चले स्वतंत्रता आंदोलन ने भारत को आज़ादी दिलाई। उन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित उन सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।”

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राजधानी में देशभक्ति का माहौल

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर रंगारंग कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूरा शहर देशभक्ति के नारों और तिरंगे के रंग में सराबोर नजर आया। Read More Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस पर लखनऊ में सीएम योगी ने फहराया तिरंगा, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

Padma Awards: साल 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों का ऐलान, गुमनाम नायकों के समर्पण को राष्ट्र का नमन…

BE NEWS – साल 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस सम्मान के साथ देशभर के उन तमाम नायकों को जिन्होंने चुपचाप समाज में बड़ा बदलाव लाया, उनको सम्मानित किया जाएगा।

वर्ष 2026 के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस की गौरवशाली पूर्व संध्या पर, भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, ‘पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा कर दी है। कला, साहित्य, विज्ञान, खेल और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपना जीवन समर्पित करने वाली असाधारण शख्सियतों को इस बार पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से नवाजा गया है। वहीं देश के दूर-दराज के इलाकों में चुपचाप समाज को बदलने वाले उन ‘गुमनाम नायकों’ को भी ‘पीपल्स पद्म’ के जरिए सम्मान दिया गया है।

कुल 131 पुरस्कारों (5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री) के माध्यम से राष्ट्र ने उन हाथों को सलाम किया है जिन्होंने अपनी विशिष्ट सेवा से भारत की प्रगति और संस्कृति में अमूल्य योगदान दिया है। इस वर्ष की सूची विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि इसमें जहाँ धर्मेंद्र सिंह देओल, अल्का याग्निक और ममूटी जैसे दिग्गज फिल्मी सितारों के नाम शामिल हैं, हालांकि पद्म पुरस्कार विजेताओं की आधिकारिक सूची केंद्र सरकार द्वारा 25 जनवरी की शाम को जारी की जाएगी, लेकिन इससे पहले सामने आई प्रारंभिक सूची ने यह साफ कर दिया है कि इस बार भी “पीपल्स पद्म” की भावना को आगे बढ़ाया गया है।

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पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों के नाम

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चिरंजी लाल यादव, धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या, बुधरी ताती और चरण हेम्ब्रम जैसे नाम पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों में शामिल हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने बिना किसी प्रचार के, बेहद कठिन परिस्थितियों में समाज सेवा को अपना जीवन उद्देश्य बनाया।

 प्रारंभिक सूची में शामिल नाम

इस सूची में अंके गौड़ा, आर्मिडा फर्नांडीज, भगवानदास रायकवार, भिकल्या लाडक्या ढिंडा, बृज लाल भट्ट, चरण हेम्ब्रम, चिरंजी लाल यादव, धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या, गफरूद्दीन मेवाती जोगी, इंद्रजीत सिंह सिद्धू, कैलाश चंद्र पंत, कोल्लाक्कयिल देवकी अम्मा जी, कुमारसामी थंगराज, महेंद्र कुमार मिश्र, नूरुद्दीन अहमद, रघुवीर तुकाराम खेडकर, रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले सहित कई अन्य नाम शामिल हैं।

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समाज की भलाई को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया

इस वर्ष सम्मानित किए जाने वाले कई लोग दलित, पिछड़े वर्गों, आदिवासी समुदायों और दूरदराज़ के कठिन इलाकों से आते हैं। इन पुरस्कार विजेताओं ने न केवल व्यक्तिगत संघर्षों का सामना किया, बल्कि समाज की भलाई को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। इनकी सेवाएं भले ही सुर्खियों में न रही हों, लेकिन उनका प्रभाव गहरा और स्थायी रहा है।

पद्म पुरस्कार केवल उपलब्धियों का सम्मान नहीं हैं, बल्कि उन मूल्यों की पहचान भी हैं जो देश उन हाथों को भी सलाम करता है, जो बिना तालियों की उम्मीद किए समाज को बेहतर बनाने में लगे रहे। Read More Padma Awards: साल 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों का ऐलान, गुमनाम नायकों के समर्पण को राष्ट्र का नमन…

Chennai: सीएम स्टालिन का केंद्र को अल्टीमेटम, कहा- “तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं!”

BE NEWS – तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक बार फिर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने के लिए कभी कोई जगह नहीं रही और न भविष्य में होगी। भाषा शहीद दिवस के मौके पर उन्होंने 1960 के दशक के हिंदी-विरोधी आंदोलन के बलिदानियों को याद किया और राज्य की भाषाई पहचान की रक्षा का संकल्प दोहराया।

हिंदी-विरोधी आंदोलन की दिखाई झलक 

आपको बता देंं कि  सीएम स्टालिन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि, भाषा शहीद दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए न तब कोई जगह थी, न अब है और न कभी होगी। इसके साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें 1965 के ऐतिहासिक हिंदी विरोधी आंदोलन की झलक दिखाई गई। इस वीडियो में द्रमुक के संस्थापक नेताओं सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि के योगदान को भी दिखाया गया।

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केंद्र से रार के बीच स्टालिन का बड़ा ऐलान, तमिलनाडु की स्वायत्तता पर ...

शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण

मुख्यमंत्री ने चेन्नई में शहीद थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इन आंदोलनकारियों ने हिंदी को अधिकारिक भाषा बनाने के विरोध में अपना जान गंवा दी थी। उन्होंने चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) भवन पर दोनों शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी-विरोधी आंदोलन के जरिए न सिर्फ अपनी भाषा, बल्कि पूरे देश में भाषाई अधिकारों और पहचान की रक्षा का मार्ग प्रशस्त किया।

दरअसल ‘भाषा शहीद दिवस’ उन युवाओं की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने 1964-65 के दौरान हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाए जाने के विरोध में अपनी जान गंवाई थी। इस आंदोलन के बाद तमिलनाडु में दो भाषा सूत्र अपनाया, जिसमें केवल तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन हिंदी भाषा को लेकर दिया बड़ा बयान ...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध

द्रमुक सरकार लगातार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध करती रही है। मुख्यमंत्री स्टालिन का आरोप है कि केंद्र सरकार इस नीति के जरिए पिछले दरवाजे से हिंदी को गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर थोपना चाहती है। Read More Chennai: सीएम स्टालिन का केंद्र को अल्टीमेटम, कहा- “तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं!”

UP Mock Drill: उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में सायरन बजते ही होगा आज ब्लैकआउट, शाम 6 बजे यूपी सुरक्षा का ‘शक्ति परीक्षण’

UP Mock Drill – उत्तर प्रदेश में आज शाम 6 बजे प्रदेश के सभी जिलों में 10 मिनट के लिए बिजली सप्लाई अस्थाई रुप से बंद कर ही जाएगी। ये ब्लैक आउट सिर्फ एक अभ्यास है, जिसको लेकर योगी सरकार ने लोगों से सहयोग करने की अपील की है।

प्रदेश के सभी 75 जिलों में बिजली सप्लाई बंद 

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में आज शाम सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के अभ्यास के तहत बड़ा मॉक ड्रिल किया जाएगा। शाम 6 बजे से प्रदेश के सभी 75 जिलों में लगभग 10 मिनट के लिए बिजली की सप्लाई अस्थायी रूप से बंद रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कोई आपात स्थिति नहीं है, बल्कि सिर्फ एक अभ्यास है।

सरकार के मुताबिक, इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध, आतंकवादी हमला, हवाई खतरा, बड़ी आग या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में प्रशासन और जनता कितनी जल्दी और सही तरीके से प्रतिक्रिया दे पाती है।

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मॉक ड्रिल का कार्यक्रम
  • शाम 6 बजे से पहले अलग-अलग जिलों में सायरन बजाए जाएंगे।

  • इसके बाद लगभग 10 मिनट तक प्रदेशभर में बिजली बंद रहेगी।

  • पुलिस, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमों को पूरी तरह अलर्ट रखा जाएगा।

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधानी लखनऊ में मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगे, जो पुलिस लाइंस में आयोजित किया जाएगा।

इस दौरान यह देखा जाएगा कि आपात स्थिति में पुलिस कितनी तेजी से मौके पर पहुंचती है, राहत और बचाव कार्य कैसे किए जाते हैं, और घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

अभ्यास में प्रशासन का समर्थन करने की अपील

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि ब्लैकआउट के दौरान घबराए नहीं और अफवाहों पर ध्यान न दें। लोगों से कहा गया है कि वे घरों की लाइट बंद रखें, बेवजह बाहर न निकलें और इस अभ्यास में प्रशासन का पूरा समर्थन दें।

सरकार का मानना है कि इस तरह के अभ्यास से प्रशासन की कमियों का पता चलता है और समय रहते सुधार किया जा सकता है। भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में यह कदम जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद करेगा। Read More UP Mock Drill: उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में सायरन बजते ही होगा आज ब्लैकआउट, शाम 6 बजे यूपी सुरक्षा का ‘शक्ति परीक्षण’

Prayagraj Magh Mela 2026: बसंत पंचमी पर संगम बना आस्था का महासंगम, करोड़ों ने लगाई पुण्य की डुबकी

Prayagraj Magh Mela 2026: बसंत पंचमी के पावन पर्व पर शुक्रवार सुबह संगम पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आज बन रहे गजकेसरी योग में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया और पूजा-अर्चना की। सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें देखने को मिलीं। माघ मेले के इस चौथे स्नान को लेकर प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए है।

आपको बता दें कि संगम किनारे चल रहे माघ मेले का आज 23 जनवरी, दिन शुक्रवार को बंसत पंचमी के पावन दिन मनाया जा रहा है। इस स्नान पर्व को लेकर मेला स्थल पर आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 8 बजे तक अनुमानित 1 करोड़ 4 लाख श्रद्धालुओं ने अब तक संगम पर आस्था की डुबकी लगाई है। अभी यह संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कई इंतजाम किए है।

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कोई वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं

प्रशासन का अनुमान है कि बसंत पंचमी से लेकर 26 जनवरी तक, यानी अगले चार दिनों में लगभग साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु संगम तट पर पहुंच सकते हैं। भीड़ को देखते हुए इस दौरान कोई वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं किया गया है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान सुविधा मिल सके।

माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त की गई है। पुलिस, पीएसी, आरएएफ, बीडीएस, यूपी एटीएस के कमांडो और खुफिया एजेंसियां तैनात हैं। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है। स्नान घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड कंपनी पीएसी और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की गई है।

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पहले स्नान पर्व पर आस्था का समागम, हर हर गंगे के जयकारों के बीच महाकुंभ ...

मेला प्रशासन ने किए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

वसंत पंचमी स्नान को लेकर मेला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्नान घाट तैयार किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में किसी प्रकार की असुविधा न हो। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू किया है।

मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय ने बताया कि इस दौरान भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, घाटों की सुरक्षा और सुरक्षित निकासी व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी रखेंगी और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात रहेगा।

रूट डायवर्जन की विशेष व्यवस्था

ट्रैफिक व्यवस्था के तहत माघ मेला से संबंधित वाहनों को छोड़कर अन्य भारी और हल्के वाहनों को प्रयागराज जिले की सीमा में आने से पहले ही वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ दिया जाएगा। इसके लिए रूट डायवर्जन की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि शहर के भीतर अनावश्यक जाम की स्थिति न बने।

श्रद्धालुओं से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील 

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बसंत पंचमी स्नान पर्व के दिन, यानी 23 जनवरी को नया यमुना पुल पूरी तरह बंद रहेगा। इस दिन आवागमन केवल पुराने यमुना पुल से ही संभव होगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सहयोग करें, ताकि पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। Read More Prayagraj Magh Mela 2026: बसंत पंचमी पर संगम बना आस्था का महासंगम, करोड़ों ने लगाई पुण्य की डुबकी

Tragic accident in Doda: जम्मू-कश्मीर के डोडा में खाई में गिरा सेना का वाहन, 10 जवान हुए शहीद, 11 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

BE NEWS – जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में भारतीय सेना के 10 जवानों की शहादत हो गई, जबकि 11 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा भद्रवाह -चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास उस समय हुई, जब सेना का वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 400 फीट गहरी खाई में जा गिरा।

ड्यूटी के लिए रवाना हुई थी सेना की टुकड़ी 

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां भद्रवाह – चंबा मार्ग पर सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर 400 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण सड़क हादसे में भारतीय सेना के 10 वीर जवानों ने अपनी जान गंवा दी है, जबकि 11 अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसा उस वक्त हुआ जब सेना की एक टुकड़ी ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए रवाना हुई थी। खन्नी टॉप के पास सड़क बहुत संकरी और मोड़ों वाली है। इसी दौरान एक खतरनाक मोड़ पर ड्राइवर का नियंत्रण टूट गया और वाहन सीधे गहरी खाई में में जा गिरी।

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Tragic accident in Doda:
कड़ी मशक्कत के बाद जवानों को बाहर निकाला

हादसे की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। पहाड़ी क्षेत्रों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीमों ने कड़ी मशक्कत कर जवानों को बाहर निकाला। अधिकारियों ने बताया कि 10 जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 जवान घायल अवस्था में पाए गए।

घायलों को पहले उपजिला अस्पताल भद्रवाह में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें एयरलिफ्ट कर उधमपुर स्थित सेना के कमांड अस्पताल भेजा गया। सभी घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर चिकित्सकों की कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने व्यक्त किया शोक

इस हादसे पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि, “डोडा में हुए इस दुखद सड़क हादसे में देश ने अपने 10 वीर जवानों को खो दिया है। जवानों की उत्कृष्ट सेवा और सर्वोच्च बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा तथा शोक संतप्त परिवारों के प्रति उन्होंने गहरी संवेदना प्रकट की। उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि, “इस कठिन समय में पूरा देश शहीदों के परिवारों के साथ खड़ा है।”

शहीद जवानों के नाम- जोबन जीत, सुधेर नरवाल, मोनू, मोहित, एच.आर. कंवर, सिमरन, पी. लोरा, सुलिंदर, अजय लोफरा और स्वर्ण नाग पाल।

घायल जवानों के नाम- साहिल, जे.पी. सिंह, नीरज, अनूप, नागिस, अमन, शंकर, संदीप, जोबनप्रीत, राकेश और अभिमन्यु।

वरिष्ठ अधिकारियों ने घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह हादसा पूरे देश को शोक में डुबोने वाला है। Read More Tragic accident in Doda: जम्मू-कश्मीर के डोडा में खाई में गिरा सेना का वाहन, 10 जवान हुए शहीद, 11 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Amit Shah Haridwar Visit: अखंड ज्योति की शताब्दी पर हरिद्वार से अमित शाह का उद्घोष, कहा- “अब गर्व से गूंज रहा है हिंदुत्व का नारा”

Amit Shah Haridwar Visit केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के दौरान आज तीर्थनगरी हरिद्वार पहुंचे। यहां उन्होंने तीन प्रमुख कार्यक्रमों में शिरकत करते हुए अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के प्रति सरकार के संकल्प को दोहराया।

तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में शिरकत

आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज हरिद्वार में दो दिवसीय दौरे के दौरान तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में शिरकत की। उन्होंने शान्तिकुंज के अखंड ज्योति शताब्दी समारोह का दीपप्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया और पंडित राम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके जीवनकाल में कई युगों का निर्माण हुआ। उनके आंदोलन के तहत 15 करोड़ से अधिक लोग आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल रहे हैं।

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Amit Shah Haridwar Visit
विश्व की सभी समस्याओं का समाधान

शाह ने कहा, “पहले लोग हिंदुत्व की बात करने से डरते थे, लेकिन आज पूरे देश में इसका नारा गूंज रहा है। भारतीय परंपरा में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान निहित है। पंडित राम शर्मा ने गायत्री मंत्र के माध्यम से हर जाति, हर समाज और लिंग भेद से ऊपर उठकर हर आत्मा को कल्याण का मार्ग दिखाया।” इसके अलावा, अमित शाह ने पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के उद्घाटन समारोह में भी भाग लिया। आधुनिक चिकित्सा और योग-आयुर्वेद के समन्वय की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही नए भारत की पहचान है

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1925-26 का वर्ष राष्ट्रीय पुनर्जागरण का वर्ष

केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी बताया कि 1925-26 का वर्ष राष्ट्रीय पुनर्जागरण का वर्ष था, और उसी वर्ष संघ परिवार की स्थापना हुई थी। इसी समय संघ परिवार (RSS) की स्थापना हुई थी और इसी दौर ने देश को आध्यात्मिक और वैचारिक रूप से मजबूती प्रदान की। उन्होंने पंडित राम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके प्रयास आज भी लाखों लोगों के जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रहे हैं। Read More Amit Shah Haridwar Visit: अखंड ज्योति की शताब्दी पर हरिद्वार से अमित शाह का उद्घोष, कहा- “अब गर्व से गूंज रहा है हिंदुत्व का नारा”

Prayagraj Plane Crash: प्रयागराज में बेकाबू होकर सेना का ट्रेनी विमान हुआ क्रैश, पूरे इलाके में मची अफरा-तफरी, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Prayagraj Plane Crash – प्रयागराज में आज एक ट्रेनी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सेना का विमान अचानक तालाब में गिरने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। विमान में सवार दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकाल किए गए है। उनको मामूली चोटें आई हैं।

  सेना का एक ट्रेनी विमान क्रैश होने से हादसा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बुधवार को सेना का एक ट्रेनी विमान क्रैश हो गया। यह विमान शहर के बीचों-बीच स्थित एक तालाब में जा गिरा। इस हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा केपी कॉलेज के पीछे हुआ। विमान अचानक हवा में संतुलन खो बैठा और काफी देर तक आसमान में चक्कर लगाने के बाद तालाब में गिर पड़ा। बताया जा रहा है कि यह भारतीय वायुसेना का माइक्रोलाइट ट्रेनर एयरक्राफ्ट था, जो प्रशिक्षण उड़ान पर था।

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Prayagraj Aircraft Crash: तालाब में गिरा वायुसेना का ट्रेनी विमान, पैरासूट के सहारे पायलट ने बचाई जान

इंजन फेल होने से हुआ हादसा

सेना की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इंजन फेल होने की वजह से विमान तालाब में गिरा। विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे और राहत की बात यह है कि दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को जानकारी दी। इसके बाद फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। तालाब के आसपास के इलाके को घेर लिया गया है और विमान को बाहर निकालने का काम लगातार जारी है।

दलदली तालाब में गिरा विमान

हादसे वाली जगह पर दलदली तालाब है, जहां चारों तरफ जलकुंभी उगी हुई है। इसी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में थोड़ी दिक्कतें आ रही हैं। सुरक्षा के मद्देनज़र आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

चेन्नई में भी हो चुका है ऐसा हादसा

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल नवंबर में चेन्नई के ताम्बराम के पास चेंगलपट्टू जिले में भी भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। वह विमान ‘पिलाटस पीसी-7’ ट्रेनर एयरक्राफ्ट था, जो ट्रेनिंग मिशन पर था। उस हादसे में पायलट ने सुरक्षित रूप से इजेक्ट कर लिया था। फिलहाल प्रयागराज हादसे के मामले में भी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और एयरक्राफ्ट को तालाब से बाहर निकालने का काम जारी है। Read More Prayagraj Plane Crash: प्रयागराज में बेकाबू होकर सेना का ट्रेनी विमान हुआ क्रैश, पूरे इलाके में मची अफरा-तफरी, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Noida Basement Accident: बिल्डर की लापरवाही या सिस्टम फेल? इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले पर SIT ने शुरू की जांच

BE NEWS – ग्रेटर नोएडा में 17 दिसंबर की रात  निर्माणाधीन बेसमेंट में कार के डुबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। बेसमेंट बनाने वाले बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं दूसरे आरोपी की जांच की रही है।

आपको बता दें कि नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत का मामले पर सीएम योगी द्वारा SIT टीम का गठन किया गया है। जो अब इस मामले की पूरी जांच करेगी। वहीं इस पूरे प्रकरण पर अब पुलिस ने एमजेड विजटाउन के निदेशक बिल्डर अभय कुमार जिन्होंने इस बेसमेंट की निर्माण किया था, उनके गिरफ्तार कर लिया है।

‘मैं यहां हूं पापा…’ इंजीनियर युवराज की मौत पर टूटे पिता, बताया बेटा ...

दो साल पहले खोदा गया था बेसमेंट का गड्ढा

पुलिस के अनुसार, आरोपी बिल्डर ने दो वर्ष पहले एक मॉल निर्माण के लिए बेसमेंट बनाने के उद्देश्य से जमीन पर गड्ढा खुदवाया था। यह गड्ढा लंबे समय से पानी से भरा हुआ था। शुक्रवार को इसी बेसमेंट में कार समेत गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई।

घटना के बाद बेसमेंट में डूबी कार को निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद मंगलवार को लगभग 96 घंटे बाद कार को बाहर निकाला जा सका।

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टूटी विंडशील्ड, खुली सनरूफ बता रही बहुत कुछ, पानी से निकली युवराज मेहता ...

बचाव कार्य में बरती गई भारी लापरवाही

युवराज मेहता के पिता ने SIT को दिए बयान में आरोप लगाया कि हादसे के समय उन्होंने लगातार पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ कर्मियों से बेटे को बचाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि, बचाव कर्मियों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। उन्होंने पानी ठंडा होने का हवाला देकर अंदर उतरने से मना कर दिया, जिसके बाद केवल रस्सी फेंक कर के एक औपचारिकता निभाई गई। वहीं एनडीआरएफ को भी इस घटना की सूचना देने में देरी की गई। पीड़ित पिता का यह भी आरोप है कि घटना के तीन दिन बाद तक कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

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SIT कर रही पुलिस, प्रशासन और बिल्डरों की जांच

SIT टीम ने मंगलवार को सबसे पहले नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए। इसके बाद घटना स्थल का निरीक्षण किया गया और संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की गई।

SIT में शामिल मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमें पांच दिन के भीतर सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। हादसा किस स्तर की लापरवाही से हुआ। इसमें पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण, दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ सभी की भूमिका की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”

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नहीं थे बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम

पुलिस के अनुसार, जिस प्लॉट पर हादसा हुआ वहां कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए थे। इसी कारण यह दुर्घटना हुई। पीड़ित पिता की तहरीर पर 18 जनवरी को नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विशटाउन और लोटस ग्रीन बिल्डर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया था। फिलहाल गिरफ्तार बिल्डर को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। Read More Noida Basement Accident: बिल्डर की लापरवाही या सिस्टम फेल? इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले पर SIT ने शुरू की जांच

‘शंकराचार्य’ उपाधि पर तकरार….स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

BE NEWS – स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजकर उनके ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का प्रयोग किए जाने पर जवाब मांगा है।

‘शंकराचार्य’ उपाधि के प्रयोग पर जताई आपत्ति 

आपको बता दें कि माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के दौरान शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने ज्योतिष्पीठ से जुड़े संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ उपाधि के प्रयोग पर आपत्ति जताई है। प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले का हवाला देते हुए 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने और आवश्यक सुधार करने को कहा है।

सिविल अपील सर्वोच्च न्यायालय में लंबित

प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर एक सिविल अपील सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है। ऐसे में किसी भी धर्माचार्य का स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित करना नियमों के विपरीत है। इसके बावजूद मेला क्षेत्र में लगे शिविर के बोर्ड पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखा गया है, जो आपत्तिजनक है।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस ...

शोभायात्रा में शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प 

यह विवाद उस घटना के बाद गहराया, जब मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा को संगम की ओर जाने से रोक दिया गया था। स्वामी पहिया लगी पालकी पर सवार होकर शिष्यों के साथ महास्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस और मेला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शोभायात्रा आगे बढ़ने नहीं दी। इसके बाद आक्रोशित शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बन गई, जिसमें कुछ शिष्यों को हिरासत में लिया गया।

प्रशासन पर अपमान और दुर्व्यवहार का आरोप

घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर अपमान और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके शिष्यों को जानबूझकर रोका गया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

स्नान से नहीं, पहिया लगी पालकी से आपत्ति

वहीं, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि स्वामी को स्नान से नहीं रोका गया था। आपत्ति केवल पहिया लगी पालकी को लेकर थी। उस समय संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और ऐसी स्थिति में पालकी के साथ आगे बढ़ने से भगदड़ या किसी अनहोनी की आशंका थी।

फिलहाल, माघ मेला प्राधिकरण के नोटिस के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। अब सबकी निगाहें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है। Read More ‘शंकराचार्य’ उपाधि पर तकरार….स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब