Noida Basement Accident: बिल्डर की लापरवाही या सिस्टम फेल? इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले पर SIT ने शुरू की जांच

BE NEWS – ग्रेटर नोएडा में 17 दिसंबर की रात  निर्माणाधीन बेसमेंट में कार के डुबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। बेसमेंट बनाने वाले बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं दूसरे आरोपी की जांच की रही है।

आपको बता दें कि नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत का मामले पर सीएम योगी द्वारा SIT टीम का गठन किया गया है। जो अब इस मामले की पूरी जांच करेगी। वहीं इस पूरे प्रकरण पर अब पुलिस ने एमजेड विजटाउन के निदेशक बिल्डर अभय कुमार जिन्होंने इस बेसमेंट की निर्माण किया था, उनके गिरफ्तार कर लिया है।

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दो साल पहले खोदा गया था बेसमेंट का गड्ढा

पुलिस के अनुसार, आरोपी बिल्डर ने दो वर्ष पहले एक मॉल निर्माण के लिए बेसमेंट बनाने के उद्देश्य से जमीन पर गड्ढा खुदवाया था। यह गड्ढा लंबे समय से पानी से भरा हुआ था। शुक्रवार को इसी बेसमेंट में कार समेत गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई।

घटना के बाद बेसमेंट में डूबी कार को निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद मंगलवार को लगभग 96 घंटे बाद कार को बाहर निकाला जा सका।

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बचाव कार्य में बरती गई भारी लापरवाही

युवराज मेहता के पिता ने SIT को दिए बयान में आरोप लगाया कि हादसे के समय उन्होंने लगातार पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ कर्मियों से बेटे को बचाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि, बचाव कर्मियों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। उन्होंने पानी ठंडा होने का हवाला देकर अंदर उतरने से मना कर दिया, जिसके बाद केवल रस्सी फेंक कर के एक औपचारिकता निभाई गई। वहीं एनडीआरएफ को भी इस घटना की सूचना देने में देरी की गई। पीड़ित पिता का यह भी आरोप है कि घटना के तीन दिन बाद तक कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

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SIT कर रही पुलिस, प्रशासन और बिल्डरों की जांच

SIT टीम ने मंगलवार को सबसे पहले नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए। इसके बाद घटना स्थल का निरीक्षण किया गया और संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की गई।

SIT में शामिल मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमें पांच दिन के भीतर सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। हादसा किस स्तर की लापरवाही से हुआ। इसमें पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण, दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ सभी की भूमिका की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”

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नहीं थे बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम

पुलिस के अनुसार, जिस प्लॉट पर हादसा हुआ वहां कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए थे। इसी कारण यह दुर्घटना हुई। पीड़ित पिता की तहरीर पर 18 जनवरी को नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विशटाउन और लोटस ग्रीन बिल्डर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया था। फिलहाल गिरफ्तार बिल्डर को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।