Kanya Pujan 2026: कन्या पूजन में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, वरना अधूरी रह जाएगी नवरात्रि की पूजा…

Kanya Pujan Rules 2026: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का समापन कन्या पूजन के साथ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना कन्या पूजन के नौ दिनों का व्रत और साधना अधूरी मानी जाती है। साल 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को और राम नवमी 27 मार्च को मनाई जा रही है।

शास्त्रों में कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना गया है। ऐसे में यदि आप भी अपने घर पर कंजक खिलाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन 4 विशेष नियमों का पालन जरूर करें ताकि मां अंबे का आशीर्वाद आप पर बना रहे।

महत्वपूर्ण तिथियां (Navratri 2026 Calender)

दुर्गा अष्टमी: 26 मार्च 2026

राम नवमी: 27 मार्च 2026

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कन्या पूजन
1. सात्विक भोजन करवाएं

कन्या पूजन में हमेशा सात्विक भोजन परोसें। इसमें प्याज, लहसुन या कोई तामसिक पदार्थ शामिल नहीं होना चाहिए। आमतौर पर कन्याओं को हलवा, पूरी, काले चने और सब्जी का प्रसाद दिया जाता है। सात्विक भोजन से पूजा पूर्ण मानी जाती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

3. काले कपड़े पहनने से बचें

हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार के दौरान काले कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। कन्या पूजन के समय भी काले कपड़े न पहनें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले रंग से नकारात्मक ऊर्जा का संकेत मिलता है, इसलिए पूजा के अवसर पर उजले और पारंपरिक रंगों के वस्त्र पहनना शुभ होता है।

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2. साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान

पूजा स्थल और घर को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक है। भोजन कराने से पहले कन्याओं के पैर धोना और जगह की सफाई करना जरूरी है। साफ-सुथरा वातावरण न सिर्फ पूजा में शांति लाता है, बल्कि देवी मां की कृपा को भी आकर्षित करता है।

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4. दक्षिणा और विदाई का नियम

कन्याओं को केवल भोजन कराकर विदा कर देना पर्याप्त नहीं है। सामर्थ्य अनुसार कन्याओं को दक्षिणा (नकद राशि) जरूर दें। शास्त्रों के अनुसार, बिना दक्षिणा के दान या पूजा सफल नहीं होती। दक्षिणा के साथ आप फल, श्रृंगार की सामग्री या छोटे बर्तन भी उपहार स्वरूप दे सकते हैं। विदा करते समय उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना न भूलें।

अस्वीकरण (Disclaimer): यहाँ दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।

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BE News – चैत्र नवरात्रि 2026 के तीसरे (Navratri 2026 Day 3) दिन यानी 21 मार्च को मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता के माथे पर अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का वाहन शेर है और वे अपने भक्तों को भय से मुक्त कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वरदान देती हैं।

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नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरी शक्ति माता चंद्रघंटा, जानें महत्व-

मां चंद्रघंटा नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरी शक्ति हैं। इनकी आराधना से साधक के मन से क्रोध, भय और नकारात्मकता का नाश होता है। माँ दस भुजाओं वाली हैं और हाथों में विभिन्न शस्त्र धारण किए हुए हैं। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त सच्चे मन से माँ चंद्रघंटा की उपासना करते हैं, उनके जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं।

माता चंद्रघंटा पूजा विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा इस प्रकार करें-

1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

2. पूजा स्थल तैयार करें पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

3. दीप प्रज्वलन करें धूप-दीप जलाएं और माता को सिंदूर, गंध, धूप, अक्षत अर्पित करें।

4. पुष्प अर्पित करें माता को चमेली के फूल अर्पित करना अतिशुभ है। चमेली न हो तो कोई भी पीला फूल अर्पित करें।

5. भोग लगाएं माता को खीर, शहद या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।

6. मंत्र जाप करें पूजा के दौरान ‘ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः’ मंत्र का जाप करें। दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें।

7. आरती करें पूजा के अंत में माता की आरती करें और मन की मुराद मां से कहें।

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माता चंद्रघंटा पूजा विधि
माता चंद्रघंटा के विशेष मंत्र 

बीज मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।

ऐं श्रीं शक्तयै नम:।

ध्यान मंत्र: पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 माता चंद्रघंटा की पूजा से क्या मिलता है लाभ?

मन से भय और चिंता का नाश होता है, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। शत्रुओं से रक्षा मिलती है। इसके साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और परिवार में मंगल और कल्याण होता है।

आज का शुभ रंग और प्रसाद

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा में लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। माता को चमेली या पीले फूल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। भोग के रूप में माता को खीर या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः’ मंत्र का जाप करते रहें। माता का वाहन शेर है और वे अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।

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Chaitra Navratri 2026 Day 2: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना को समर्पित है। भक्त इस दिन व्रत रखकर मां की पूजा करते हैं और तप, संयम तथा आत्मबल की प्राप्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से जीवन में धैर्य, शक्ति और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

Maa Brahmacharini Aarti || माँ ब्रह्मचारिणी आरती ||
मां ब्रह्मचारिणी
मां ब्रह्मचारिणी का महत्व

मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जिन्हें तप, त्याग और साधना की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। ‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द का अर्थ होता है—वह देवी जो ब्रह्म (सत्य) का आचरण करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, उसी तपस्विनी रूप को मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।

मां के दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल होता है, जो ज्ञान, तपस्या और संयम का प्रतीक है। उनका यह स्वरूप हमें जीवन में धैर्य, अनुशासन और आत्मनियंत्रण का महत्व सिखाता है। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर सहनशक्ति और दृढ़ता का विकास होता है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों का सामना सहजता से कर पाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती हैं और उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने की प्रेरणा देती हैं। जो साधक सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, उसके जीवन में मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही, यह भी माना जाता है कि मां की कृपा से व्यक्ति को ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है, जिससे वह सही निर्णय लेने में सक्षम बनता है।

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करें इन 5 मंत्रों का जप

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जप शुभ माना गया है:

  • ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

  • तपश्चारिणी त्वं हि तप्तलोकत्रयाशुभा। ब्रह्मचारिणी नमस्तुभ्यं तपस्तत्त्वं प्रदेहि मे॥

  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

  • या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

  • ॐ ह्रीं ब्रह्मचारिण्यै स्वाहा॥

विशेषज्ञों के अनुसार, इन मंत्रों का नियमित जप मन को स्थिर करता है और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

कौन सा रंग पहनना है शुभ?

नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग को विशेष महत्व दिया गया है। यह रंग शांति, सादगी और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करने से मां ब्रह्मचारिणी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

नवरात्रि के रंग 2026 (navratri ke nau rang) - आर्ट ऑफ लिविंग

पूजा विधि
  • सुबह स्नान कर स्वच्छ (सफेद) वस्त्र धारण करें

  • मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

  • फूल, रोली, अक्षत और प्रसाद अर्पित करें

  • दीप जलाकर मंत्रों का जप करें

  • अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन साधना और आत्मसंयम का संदेश देता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और मंत्र जप से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। Read More Chaitra Navratri 2026 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी के 5 चमत्कारी मंत्र, जानें पूजा विधि और शुभ सफेद रंग का महत्व…