Padma Vibhushan: दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित, मिला देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान

Padma Vibhushan –  भारत सरकार ने साल 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस से पहले रविवार (25 जनवरी) को कर दी है। इस बार कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण, देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, प्रदान किया जाएगा।

14 साल पहले पद्म भूषण से सम्मानित

आपको बता दें कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का 89 वर्ष की उम्र में पिछले साल 24 नवंबर को निधन हो चुके धर्मेंद्र ने अपने 60 साल के फिल्मी करियर में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर भारतीय सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए। इससे पहले एक्टर धर्मेंद्र को 14 साल पहले पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। पद्म विभूषण उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिनकी सेवा असाधारण और विशिष्ट मानी जाती है।

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फिल्मी करियर की शुरुआत

धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 में अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से की। 1966 में आई फिल्म फूल और पत्थर ने उन्हें पहचान दिलाई, वहीं अनुपमा में उनके अभिनय की खूब सराहना हुई।

उनकी हिट फिल्मों की लिस्ट में सीता और गीता, शोले, यादों की बारात, चुपके चुपके और द बर्निंग ट्रेन जैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं। धर्मेंद्र को आखिरी बार पर्दे पर फिल्म इक्कीस में देखा गया, जो उनके निधन के बाद रिलीज हुई। इस फिल्म में उन्होंने अगस्त्य नंदा के पिता का किरदार निभाया।

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 दिग्गज अभिनेता का पारिवारिक जीवन

धर्मेंद्र ने अपने जीवन में दो शादियां कीं। पहली शादी 1954 में प्रकाश कौर से हुई, जिनसे उनके चार बच्चे हैं, सनी देओल, बॉबी देओल, विजेता और अजीता हैं। वहीं 1980 में उन्होंने हेमा मालिनी से दूसरी शादी की, जिनसे उनकी दो बेटियां हैं, ईशा देओल और अहाना देओल हैं।

भारतीय सिनेमा में धर्मेंद्र का योगदान 

धर्मेंद्र का योगदान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने भारतीय सिनेमा को नए आयाम दिए और दर्शकों के दिलों में हमेशा अपनी जगह बनाए रखी। पद्म विभूषण से उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया जाना उनके जीवन और कला की अमूल्य सेवा को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। Read More Padma Vibhushan: दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित, मिला देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान

History Of Royal Carriage: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस पर विदेशी अतिथियों के साथ की शाही बग्घी में सवारी, जानें इसका सालों पुराना इतिहास…

History Of Royal Carriage: 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत राष्ट्रपति भवन से होते ही इतिहास की एक झलक नजर आई, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विदेशी अतिथियों के साथ शाही बग्घी में सवार होकर समारोह स्थल की ओर रवाना हुईं। इस अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेएन भी राष्ट्रपति के साथ मौजूद रहे।

शाही बग्घी का ऐतिहासिक महत्व

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस समारोह में इस्तेमाल होने वाली यह शाही बग्घी सैकड़ों साल पुरानी है। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1950 में इस बग्घी में बैठकर समारोह में शामिल हुए थे। इसके पहले, ब्रिटिश वायसराय भी इसे शाही सवारी के रूप में प्रयोग करते थे। बग्घी के किनारों पर सोने की परत लगी हुई है और इसमें राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ को भी सोने के साथ अंकित किया गया है।

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President Draupadi Murmu
काले रंग की शाही बग्घी और इसकी विशेषताएं

दरअसल इस काले रंग की शाही बग्घी को खास लकड़ी से तैयार किया गया है। इसके पहियों के रिम और अन्य हिस्सों में सोने का इस्तेमाल किया गया है। वर्तमान मूल्य करोड़ों रुपये में आंका जाता है। 100 साल से अधिक पहले कोलकाता की स्टुअर्ट एंड कंपनी ने इसे ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया था। बग्घी को आगे खींचने के लिए छह घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, और इसकी सुरक्षा राष्ट्रपति के विशेष अंगरक्षकों द्वारा सुनिश्चित की जाती है।

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Royal Carriage

इस शाही बग्घी के अधिकार को लेकर निर्णय

भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय इस शाही बग्घी के अधिकार को लेकर निर्णय सिक्का उछालकर किया गया। भारत के दूत एच.एम. पटेल और पाकिस्तान के चौधरी मोहम्मद अली ने इस निर्णय में भाग लिया। सिक्का उछालकर तय हुआ कि बग्घी भारत के पास रहे।

शाही बग्घी का उपयोग बंद

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या के बाद शाही बग्घी का उपयोग बंद कर दिया गया था और इसकी जगह बुलेटप्रूफ कार का इस्तेमाल शुरू हुआ। हालांकि, वर्ष 2014 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे पुनः इस्तेमाल किया। उसके बाद से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी विभिन्न सार्वजनिक समारोहों में इस बग्घी का प्रयोग किया।

गणतंत्र दिवस का भव्य दृश्य

राष्ट्रपति के शाही बग्घी में सवार होने से समारोह की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ गया। छह घोड़ों की जोड़ी और सोने की परत वाली बग्घी ने समारोह को ऐतिहासिक और यादगार बना दिया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक, यह बग्घी हमारे गौरवशाली अतीत और आधुनिक भारत के आत्मविश्वास को जोड़ती है। 77वें गणतंत्र दिवस पर छह घोड़ों की टाप और बग्घी की चमक ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी जड़ों और परंपराओं को सहेजते हुए भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। Read More History Of Royal Carriage: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस पर विदेशी अतिथियों के साथ की शाही बग्घी में सवारी, जानें इसका सालों पुराना इतिहास…

77th Republic Day 2026: ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने शुभांशु शुक्ला, द्रौपदी मुर्मू ने ‘अशोक चक्र’ से किया सम्मानित

77th Republic Day 2026 – गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी वीरता का प्रतीक है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की एक नई उड़ान की पहचान भी है।

IAF ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अशोक चक्र से हुए सम्मानित, कर्तव्य पथ ...

ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय 

आपको बता दें कि नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को   ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्हें ऐतिहासिक एक्सिओम-4 मिशन के तहत यह गौरव प्राप्त हुआ, जिसमें उन्होंने 18 दिन तक अंतरिक्ष में बिताए। इस मिशन में अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भाग लिया। शुभांशु शुक्ला के अलावा मिशन में तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी शामिल थे।

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भारतीय वीर शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष उड़ान, तैयारियां पूरी, काउंटडाउन ...

भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक नई उपलब्धि

ग्रुप कैप्टन शुक्ला का अंतरिक्ष में कदम रखना भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक नई उपलब्धि है। उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे। 41 साल बाद भारत ने फिर से अंतरिक्ष में अपने नागरिक को भेजा।

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शुभांशु शुक्ला को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अशोक चक्र से किया ...

जून 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल

लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला ने जून 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर विभिन्न लड़ाकू विमानों का अनुभव प्राप्त किया। उनके पास Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar, Hawk, Dornier और AN-32 सहित कई विमानों में 2,000 घंटे से अधिक उड़ान का रिकॉर्ड है। एक्सिओम-4 मिशन में उन्होंने पायलट की भूमिका निभाई और मिशन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ग्रुप कैप्टन शुक्ला के इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन और वीरता पुरस्कार ने पूरे देश को गर्वित कर दिया। इस मौके पर देशवासियों ने उनके साहस और योगदान को सराहा। Read More 77th Republic Day 2026: ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने शुभांशु शुक्ला, द्रौपदी मुर्मू ने ‘अशोक चक्र’ से किया सम्मानित

Hair Care: सर्दियों में बाल क्यों हो जाते हैं ज्यादा ड्राई? जानिए हेयर ऑयलिंग करते समय होने वाली आम गलतियां…

BE NEWS – सर्दियों का मौसम शुरू होते ही न सिर्फ त्वचा बल्कि बाल भी अपनी प्राकृतिक नमी खोने लगते हैं। ठंडी हवा, कम नमी और बार-बार गर्म पानी से सिर धोना आपके बालों को ड्राई, बेजान और डैंड्रफ प्रोन बना देता है। ऐसे में हेयर ऑयलिंग बालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह स्कैल्प को पोषण देती है, बालों को मजबूत बनाती है और नेचुरल शाइन भी बढ़ाती है। लेकिन बहुत से लोग तेल तो लगाते हैं, पर गलत तरीके से जिससे फायदा तो दूर, बालों की समस्या और बढ़ जाती है। अगर आप भी ये आम गलतियां कर रही हैं तो आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से….

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1. बहुत ज्यादा तेल लगा लेना

दरअसल बालों पर अधिक तेल से स्कैल्प जरूरत से ज्यादा ऑयली हो जाता है। पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे बालों की जड़ें कमजोर होने लगती हैं। अतिरिक्त तेल हटाने के लिए ज्यादा शैंपू करना पड़ता है, और इससे बाल और भी सूखे हो जाते हैं।

सही तरीका 
बालों पर सिर्फ 2 से 3 चम्मच तेल ही काफी होता है। इसे बालों की लंबाई और स्कैल्प पर हल्का-सा लगा लें।

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2. स्कैल्प पर मसाज न करना

बहुत-से लोग सिर्फ बालों की लंबाई पर तेल लगाती हैं, लेकिन स्कैल्प मसाज भूल जाते हैं जोकि तेल लगाने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेल लगाने के बाद हाथों से की गई हल्की मसाज से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। तेल जड़ों तक अच्छे से पहुंचता है और हेयर ग्रोथ बेहतर होती है।

सही तरीका-
तेल लगाने के बाद बालों की स्कैल्प पर 5 से 10 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें। इससे हेयर फॉल कम होगा और आपके बाल मजबूत बनेंगे।

रात के समय बालों में तेल लगाकर सोना सही है या गलत...बता रही हैं ...

3. तेल को बहुत देर तक लगाए रखना

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि तेल लगाने के 45 मिनट से 2 घंटे के भीतर बाल धो लेने चाहिए। रात भर तेल लगाकर सोने की आदत आपको वालों को नुकसान पहुंचा सकती है। बहुत ज्यादा देर तक तेल रहने से धूल-मिट्टी स्कैल्प में चिपक जाती है। जिससे डैंड्रफ, खुजली और स्कैल्प इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। स्कैल्प ज्यादा चिपचिपा हो जाता है।

सही तरीका-

बता दें कि बालों पर 2 घंटे से ज्यादा तेल नहीं रखना चाहिए, खासतौर पर सर्दियों में। इसके साथ ही बालों के टेक्सचर के हिसाब से सही ऑयल को इस्तेमाल करना भी बहुत जरुरी है। Read More Hair Care: सर्दियों में बाल क्यों हो जाते हैं ज्यादा ड्राई? जानिए हेयर ऑयलिंग करते समय होने वाली आम गलतियां…

77th Republic Day 2026: भारतीय खेल जगत में देशभक्ति की लहर, रोहित, गंभीर और मनु भाकर समेत कई अन्य खिलाड़ियों ने दी शुभकामनाएं

77th Republic Day 2026 – देशभर में आज 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी ली। इस समारोह के दौरान यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला लॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा भी मौजूद रहे।

क्रिकेटरों और खिलाड़ियों ने दी शुभकामनाएं

बता दें कि भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मना रहा है। देश के विभिन्न राज्यों में भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया गया और देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। देशभर में और दुनिया के हर कोने में जहां भी भारतीय रहते हैं, वहां इस अवसर को खास अंदाज में मनाया जा रहा है। इस मौके पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व और मौजूदा खिलाड़ी भी देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं दे रहे हैं।

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पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान व कप्तान गौतम गंभीर ने दी शुभकामनाएं

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और वर्तमान मुख्य कोच गौतम गंभीर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमारा एक ही संविधान है। हमारी एक ही पहचान होनी चाहिए , भारतीय!” वहीं पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने कहा, “गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं। आइए हम अपने संविधान और नायकों के बलिदान का सम्मान करें। भारतीय होने पर गर्व है। जय हिंद।”

रोहित शर्मा ने इंस्टाग्राम पर शेयर की स्टोरी

टी20 और चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को जीत दिलाने वाले कप्तान रोहित शर्मा ने इंस्टाग्राम पर अपनी स्टोरी शेयर की, जिसमें उनके हेल्मेट पर तिरंगा दिखाई दे रहा था।

कप्तान सूर्यकुमार यादव ने ट्वीट कर दीं शुभकामनाएं

टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “संविधान से चलने वाले देश के 77 साल। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।” भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने लिखा, “हमारा एक संविधान है। हमारी पहचान भी एक होनी चाहिए – भारतीय। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।”

शिखर धवन ने देशवासियों को दी बधाई

पूर्व भारतीय बल्लेबाज शिखर धवन ने देशवासियों को बधाई देते हुए लिखा, “दिल से हिंदुस्तानी। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।” वहीं सुरेश रैना ने कुछ तस्वीरें साझा करते हुए अपने संदेश में कहा, “गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं। जय हिंद। जय भारत।”

निशानेबाज मनु भाकर ने दी बधाई

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने कहा, “आज और हर दिन अपने देश का प्रतिनिधित्व करने पर मुझे गर्व है। जय हिंद। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।”

अध्यक्ष जय शाह ने दी हार्दिक शुभकामनाएं

आईसीसी अध्यक्ष जय शाह ने लिखा, “गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं, आइए उस संविधान का जश्न मनाएं जो भारत को एक मजबूत और अधिक लचीला राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर करता है।” इसके अलावा, बीसीसीआई, अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और हॉकी इंडिया ने भी सभी देशवासियों को इस गौरवशाली अवसर पर शुभकामनाएं दी। Read More 77th Republic Day 2026: भारतीय खेल जगत में देशभक्ति की लहर, रोहित, गंभीर और मनु भाकर समेत कई अन्य खिलाड़ियों ने दी शुभकामनाएं

Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस पर लखनऊ में सीएम योगी ने फहराया तिरंगा, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

Republic Day 2026: देशभर के साथ राजधानी लखनऊ में भी 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और तिरंगे को सलामी दी।

देशवासियों को गणतंत्र दिवस पर दीं शुभकामनाएं 

आपको बता दें कि सीएम योगी ने राजधानी लखनऊ में इस मौके पर प्रदेशवासियों और देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान की गूंज से पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया। तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, ” संविधान ने अनेक उतार- चढ़ाव देखे हैं फिर भी आज भारत मजबूत हुआ ”

76 वर्षों की यात्रा में भारतीय संविधान

आगे उन्होंने कहा कि पिछले 76 वर्षों की यात्रा में भारतीय संविधान ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इसके बावजूद देश ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक आज हर भारतवासी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और गौरव के भाव के साथ नए भारत के निर्माण में सहभागी बन रहा है।

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गणतंत्र दिवस पर महापुरुषों को किया नमन

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करते हुए कहा कि, “उनके नेतृत्व में चले स्वतंत्रता आंदोलन ने भारत को आज़ादी दिलाई। उन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित उन सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।”

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राजधानी में देशभक्ति का माहौल

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर रंगारंग कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूरा शहर देशभक्ति के नारों और तिरंगे के रंग में सराबोर नजर आया। Read More Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस पर लखनऊ में सीएम योगी ने फहराया तिरंगा, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

Republic Day of India: 77वां गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भारत की ताकत और संस्कृति का भव्य प्रदर्शन, यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता बने मुख्य अतिथि

Republic Day of India – भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मना रहा है। इस मौके पर राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत सुबह 9:30 बजे हुई। करीब 90 मिनट तक चलने वाले इस समारोह में भारत की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत, सैन्य शक्ति और विकास यात्रा की झलक देखने को मिली।

यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता बने मुख्य अतिथि

बता दें कि दिल्ली में इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की थीम वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर रखी गई है। खास बात यह है कि पूरी दुनिया के सामने वंदे मातरम् की 150 साल की ऐतिहासिक यात्रा और हालिया सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गाथा भी प्रदर्शित की गई। गणतंत्र दिवस 2026 के मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शामिल हुए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह की अध्यक्षता की, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

Republic Day Parade 2026: When And Where To Watch Live, Online ...

कर्तव्य पथ पर पहुंचते ही 21 तोपों की सलामी

राष्ट्रपति के कर्तव्य पथ पर पहुंचते ही 21 तोपों की सलामी दी गई और राष्ट्रगान के साथ आधिकारिक रूप से समारोह शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया।

Republic Day 2026 Parade Seating Arrangements Explained: Enclosure ...

परेड में आत्मनिर्भर भारत की झलक

इस वर्ष की परेड तकनीक, सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भर भारत की झलक से भरपूर रही। परेड में आकाश मिसाइल सिस्टम, शक्तिबाण, स्वदेशी रोबोटिक म्यूल्स और UGV, भारतीय सेना की पहली बार युद्धक्षेत्र जैसी फॉर्मेशन में मार्चिंग, तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की विजयगाथा, पूर्व सैनिकों की विशेष झांकी, जिसका थीम रहा ‘संग्राम से राष्ट्रनिर्माण तक’, वंदे मातरम् के छंदों पर आधारित 1923 की ऐतिहासिक पेंटिंग सीरीज ने दर्शकों का ध्यान खींचा।

Republic Day 2026: All set for grand parade at Kartavya Path, Delhi on ...

 31 जनवरी तक भारत पर्व का आयोजन

गणतंत्र दिवस के साथ ही दिल्ली के लाल किले पर आज से 31 जनवरी तक ‘भारत पर्व’ का आयोजन शुरू हो गया है। यह छह दिवसीय उत्सव भारत की सांस्कृतिक, कलात्मक और आध्यात्मिक विरासत को समर्पित है। कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया।

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PM Modi, Defence Chiefs Honour Bravehearts at India Gate to Commence ...

देशभर में फहराया गया तिरंगा

गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश के सभी राज्यों में राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों ने तिरंगा फहराया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी सहित कई नेताओं ने समारोहों में भाग लिया। गणतंत्र दिवस 2026 का यह आयोजन भारत की एकता, शक्ति और गौरव का भव्य प्रतीक बनकर सामने आया। Read More Republic Day of India: 77वां गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भारत की ताकत और संस्कृति का भव्य प्रदर्शन, यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता बने मुख्य अतिथि

Padma Awards: साल 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों का ऐलान, गुमनाम नायकों के समर्पण को राष्ट्र का नमन…

BE NEWS – साल 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस सम्मान के साथ देशभर के उन तमाम नायकों को जिन्होंने चुपचाप समाज में बड़ा बदलाव लाया, उनको सम्मानित किया जाएगा।

वर्ष 2026 के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस की गौरवशाली पूर्व संध्या पर, भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, ‘पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा कर दी है। कला, साहित्य, विज्ञान, खेल और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपना जीवन समर्पित करने वाली असाधारण शख्सियतों को इस बार पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से नवाजा गया है। वहीं देश के दूर-दराज के इलाकों में चुपचाप समाज को बदलने वाले उन ‘गुमनाम नायकों’ को भी ‘पीपल्स पद्म’ के जरिए सम्मान दिया गया है।

कुल 131 पुरस्कारों (5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री) के माध्यम से राष्ट्र ने उन हाथों को सलाम किया है जिन्होंने अपनी विशिष्ट सेवा से भारत की प्रगति और संस्कृति में अमूल्य योगदान दिया है। इस वर्ष की सूची विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि इसमें जहाँ धर्मेंद्र सिंह देओल, अल्का याग्निक और ममूटी जैसे दिग्गज फिल्मी सितारों के नाम शामिल हैं, हालांकि पद्म पुरस्कार विजेताओं की आधिकारिक सूची केंद्र सरकार द्वारा 25 जनवरी की शाम को जारी की जाएगी, लेकिन इससे पहले सामने आई प्रारंभिक सूची ने यह साफ कर दिया है कि इस बार भी “पीपल्स पद्म” की भावना को आगे बढ़ाया गया है।

Padma Awards 2026: पद्म पुरस्कारों का ऐलान, धर्मेंद्र से अल्का याग्निक ...

पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों के नाम

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चिरंजी लाल यादव, धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या, बुधरी ताती और चरण हेम्ब्रम जैसे नाम पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों में शामिल हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने बिना किसी प्रचार के, बेहद कठिन परिस्थितियों में समाज सेवा को अपना जीवन उद्देश्य बनाया।

 प्रारंभिक सूची में शामिल नाम

इस सूची में अंके गौड़ा, आर्मिडा फर्नांडीज, भगवानदास रायकवार, भिकल्या लाडक्या ढिंडा, बृज लाल भट्ट, चरण हेम्ब्रम, चिरंजी लाल यादव, धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या, गफरूद्दीन मेवाती जोगी, इंद्रजीत सिंह सिद्धू, कैलाश चंद्र पंत, कोल्लाक्कयिल देवकी अम्मा जी, कुमारसामी थंगराज, महेंद्र कुमार मिश्र, नूरुद्दीन अहमद, रघुवीर तुकाराम खेडकर, रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले सहित कई अन्य नाम शामिल हैं।

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Padma Awards Announced: पद्म पुरस्कारों का ऐलान, ताइवान की फॉक्सकॉन ...

समाज की भलाई को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया

इस वर्ष सम्मानित किए जाने वाले कई लोग दलित, पिछड़े वर्गों, आदिवासी समुदायों और दूरदराज़ के कठिन इलाकों से आते हैं। इन पुरस्कार विजेताओं ने न केवल व्यक्तिगत संघर्षों का सामना किया, बल्कि समाज की भलाई को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। इनकी सेवाएं भले ही सुर्खियों में न रही हों, लेकिन उनका प्रभाव गहरा और स्थायी रहा है।

पद्म पुरस्कार केवल उपलब्धियों का सम्मान नहीं हैं, बल्कि उन मूल्यों की पहचान भी हैं जो देश उन हाथों को भी सलाम करता है, जो बिना तालियों की उम्मीद किए समाज को बेहतर बनाने में लगे रहे। Read More Padma Awards: साल 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों का ऐलान, गुमनाम नायकों के समर्पण को राष्ट्र का नमन…

Chennai: सीएम स्टालिन का केंद्र को अल्टीमेटम, कहा- “तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं!”

BE NEWS – तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक बार फिर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने के लिए कभी कोई जगह नहीं रही और न भविष्य में होगी। भाषा शहीद दिवस के मौके पर उन्होंने 1960 के दशक के हिंदी-विरोधी आंदोलन के बलिदानियों को याद किया और राज्य की भाषाई पहचान की रक्षा का संकल्प दोहराया।

हिंदी-विरोधी आंदोलन की दिखाई झलक 

आपको बता देंं कि  सीएम स्टालिन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि, भाषा शहीद दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए न तब कोई जगह थी, न अब है और न कभी होगी। इसके साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें 1965 के ऐतिहासिक हिंदी विरोधी आंदोलन की झलक दिखाई गई। इस वीडियो में द्रमुक के संस्थापक नेताओं सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि के योगदान को भी दिखाया गया।

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केंद्र से रार के बीच स्टालिन का बड़ा ऐलान, तमिलनाडु की स्वायत्तता पर ...

शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण

मुख्यमंत्री ने चेन्नई में शहीद थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इन आंदोलनकारियों ने हिंदी को अधिकारिक भाषा बनाने के विरोध में अपना जान गंवा दी थी। उन्होंने चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) भवन पर दोनों शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी-विरोधी आंदोलन के जरिए न सिर्फ अपनी भाषा, बल्कि पूरे देश में भाषाई अधिकारों और पहचान की रक्षा का मार्ग प्रशस्त किया।

दरअसल ‘भाषा शहीद दिवस’ उन युवाओं की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने 1964-65 के दौरान हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाए जाने के विरोध में अपनी जान गंवाई थी। इस आंदोलन के बाद तमिलनाडु में दो भाषा सूत्र अपनाया, जिसमें केवल तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन हिंदी भाषा को लेकर दिया बड़ा बयान ...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध

द्रमुक सरकार लगातार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध करती रही है। मुख्यमंत्री स्टालिन का आरोप है कि केंद्र सरकार इस नीति के जरिए पिछले दरवाजे से हिंदी को गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर थोपना चाहती है। Read More Chennai: सीएम स्टालिन का केंद्र को अल्टीमेटम, कहा- “तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं!”

Flower of Aparajita: सिर्फ सजावट नहीं, संजीवनी है अपराजिता का सुंदर फूल, आइये जानें इसके लाभ और फायदे…

Flower of Aparajita – प्रकृति में कई ऐसे फूल हैं जो देखने में भले ही साधारण लगते हों, लेकिन उनके औषधीय गुण उन्हें बेहद खास बना देते हैं और हमारे जीवन में संजीवनी की तरह कार्य करते है, पर इनका असल जिंदगी में उपयोग करना हमको मालूम ही नहीं है। अक्सर इस वजह से हम इन्हें नजर अंदाज करते हैं।

ऐसा ही एक फूल है अपराजिता। जो अक्सर घरों, बागानों और खेतों के आसपास सहज रूप से उगा हुआ दिखाई देता है। नीले रंग का यह सुंदर फूल आयुर्वेद में अपने चमत्कारी लाभों के लिए जाना जाता है। खासकर सर्दियों के मौसम में इससे तैयार किया गया काढ़ा या चाय स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। आइये जानें इस पौधे के औषधीय गुण एंव इसके फायदे….

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सेहत के लिए वरदान से कम नहीं अपराजिता का फूल, कोसों दूर रखता है ये ...

ब्लू टी के नाम से मशहूर है अपराजिता

अपराजिता के फूल से बनने वाली चाय का रंग नीला होता है, इसी वजह से इसे आजकल ब्लू टी (Blue Tea) कहा जाता है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, यह चाय न सिर्फ देखने में आकर्षक होती है बल्कि इसके औषधीय गुण भी इसे खास बनाते हैं। आज के समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग ब्लू टी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं।

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ग्रीन और ब्लैक टी को कहें बाय-बाय, सेहत और सुंदरता का खजाना है ये नीली ...

औषधीय गुणों का खजाना

अपराजिता के फूल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-डायबिटिक गुण पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है। ठंड के मौसम में होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं में भी इसका काढ़ा लाभ पहुंचाता है।

पाचन तंत्र और मोटापे में लाभकारी

अपराजिता की चाय पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत देती है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त करती है और गैस, एसिडिटी व अपच जैसी परेशानियों को कम करने में सहायक होती है।

शुगर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

शुगर के मरीजों के लिए अपराजिता का काढ़ा बेहद उपयोगी माना जाता है। इसके नियमित सेवन से ब्लड शुगर स्तर को संतुलित रखने में मदद मिलती है। साथ ही, यह अनिद्रा की समस्या में राहत देता है और मानसिक तनाव को कम कर मन को शांत रखने में लाभकारी होता है।

बेहतर ब्लड सर्कुलेशन

अपराजिता से बनी ब्लू टी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में भी मदद करती है। सही ब्लड सर्कुलेशन से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, थकान कम होती है और व्यक्ति खुद को अधिक सक्रिय महसूस करता है।

ब्लू टी बनाने की आसान विधि

1. ब्लू टी तैयार करने के लिए एक कप पानी उबालें।

2. इसमें 4 से 5 अपराजिता के फूल डालकर कुछ मिनट तक उबालें।

3. इसके बाद छानकर स्वादानुसार शहद मिला सकते हैं।

इस चाय का सेवन सुबह और शाम किया जा सकता है। यह सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार, दर्द, सूजन और माइग्रेन जैसी समस्याओं में भी राहत देने में सहायक मानी जाती है। Read More Flower of Aparajita: सिर्फ सजावट नहीं, संजीवनी है अपराजिता का सुंदर फूल, आइये जानें इसके लाभ और फायदे…