सफला एकादशी पर व्रत और पूजन से बन जाते है सारे काम, आइए जानें डेट, शुभ मुहूर्त और पुजा विधि व इसके महत्व…

BE NEWS – हर साल पौष माह की कृष्ण पक्ष की तिथि को सफला एकादशी का व्रत रखा जाता है। भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित ये व्रत रखने से सारे बिगड़े हुए काम बन जाते है। जीवन में धन- धान्य की कमी नहीं होती है। आइए जानें डेट, शुभ मुहूर्त और पुजन विधि व इसके महत्व के बारे में….

पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत

आपको बता दें कि सफला एकादशी का व्रत हर साल पौष माह की कृष्ण पक्ष की तिथि को रखा जाता है। वैसे तो साल में करीब 24 एकादशी पड़ती है और सबका अपना ही अलग महत्व है, पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत करने सारी मनोकामनाएं पुर्ण होती है और सभी बिगड़े हुए काम बन जाते है। जीवन में धन- धान्य और सौभाग्य की कोई कमी नहीं होती। साथ ही इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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सफला एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त

सफला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पावन मानी जाती है। पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि वर्ष 2025 में 14 दिसंबर की रात 08 बजकर 46 मिनट से प्रारंभ होकर 15 दिसंबर की रात 10 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार इस वर्ष सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025, सोमवार के दिन रखा जाएगा।

पुजन करने की विधि-

सफला एकादशी व्रत से एक दिन पूर्व, यानी दशमी तिथि की शाम को सात्त्विक भोजन करना उचित माना जाता है। एकादशी की सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें पीले वस्त्र, पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। भगवान को केला, मिठाई और पंचामृत का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ और विष्णु मंत्रों का जप करने के बाद व्रत कथा पढ़ी जाती है तथा अंत में आरती करके पूजा पूर्ण की जाती है।

कार्यों में आ रही सभी बाधाएं होती हैं दूर

शास्त्रों में सफला एकादशी को अत्यंत फलदायी बताया गया है। विश्वास है कि इस व्रत को करने से कार्यों में आ रही सभी बाधाएँ दूर होती हैं और हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन की पूजा-उपासना से घर में सौभाग्य, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।