‘शंकराचार्य’ उपाधि पर तकरार….स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

BE NEWS – स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजकर उनके ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का प्रयोग किए जाने पर जवाब मांगा है।

‘शंकराचार्य’ उपाधि के प्रयोग पर जताई आपत्ति 

आपको बता दें कि माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के दौरान शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने ज्योतिष्पीठ से जुड़े संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ उपाधि के प्रयोग पर आपत्ति जताई है। प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले का हवाला देते हुए 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने और आवश्यक सुधार करने को कहा है।

सिविल अपील सर्वोच्च न्यायालय में लंबित

प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर एक सिविल अपील सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है। ऐसे में किसी भी धर्माचार्य का स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित करना नियमों के विपरीत है। इसके बावजूद मेला क्षेत्र में लगे शिविर के बोर्ड पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखा गया है, जो आपत्तिजनक है।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस ...

शोभायात्रा में शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प 

यह विवाद उस घटना के बाद गहराया, जब मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा को संगम की ओर जाने से रोक दिया गया था। स्वामी पहिया लगी पालकी पर सवार होकर शिष्यों के साथ महास्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस और मेला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शोभायात्रा आगे बढ़ने नहीं दी। इसके बाद आक्रोशित शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बन गई, जिसमें कुछ शिष्यों को हिरासत में लिया गया।

प्रशासन पर अपमान और दुर्व्यवहार का आरोप

घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर अपमान और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके शिष्यों को जानबूझकर रोका गया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

स्नान से नहीं, पहिया लगी पालकी से आपत्ति

वहीं, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि स्वामी को स्नान से नहीं रोका गया था। आपत्ति केवल पहिया लगी पालकी को लेकर थी। उस समय संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और ऐसी स्थिति में पालकी के साथ आगे बढ़ने से भगदड़ या किसी अनहोनी की आशंका थी।

फिलहाल, माघ मेला प्राधिकरण के नोटिस के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। अब सबकी निगाहें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है। Read More ‘शंकराचार्य’ उपाधि पर तकरार….स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

SC में ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर की सुनवाई, कहा- “आप हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते हैं।”

BE NEWS –  प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक माहौल गरमा गया है। ईडी ने पश्चिम बंगाल में की गई छापेमारी मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। जिस पर आज सुनवाई करते हुए SC ने ईड़ की दलीलों पर जांच करने की बात कही थी।

ईडी की छापेमारी के दौरान दखलअंदाजी

आपको बता दें कि ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर आज कोर्ट में सुनवाई की जा रही है। यह मामला आई-पैक (I-PAC) कार्यालय और उसके निदेशक प्रतिक जैन के आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान दखलअंदाजी करने से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी और राज्य सरकार ने जांच प्रक्रिया में बाधा डाली।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने मुख्यमंत्री के पक्ष को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा, “आपका दावा विरोधाभासी है।” उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच आवश्यक है और नोटिस जारी करने से अदालत को रोका नहीं जा सकता।”

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ईडी ने क्या आरोप लगाए

ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि, “यदि इस तरह की घटनाओं पर सख्त रुख नहीं अपनाया गया, तो इससे केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल टूटेगा और राज्य सरकारें जांच में दखल देने का साहस करेंगी।”

मेहता ने आरोप लगाया कि, “आई-पैक कार्यालय में आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी और छापेमारी के दौरान हालात को जानबूझकर बाधित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान जिस तरह की भीड़ जमा हुई, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर खतरे का संकेत है।”

ममता बनर्जी की ओर से जवाब

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ईडी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि, “ईडी द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और यह बात स्वयं एजेंसी के पंचनामा से स्पष्ट होती है। सिब्बल ने दलील दी कि किसी भी उपकरण या सामग्री को जब्त नहीं किया गया और यह पूरा मामला केवल पूर्वाग्रह फैलाने का प्रयास है।”

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अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि, “यदि ईडी का इरादा किसी सामग्री को जब्त करने का होता, तो वह ऐसा कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद अदालत ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।” फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की दलीलों पर विचार करते हुए मामले में आगे जांच की जरूरत बताई और यह भी कहा कि, “आप हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते हैं।”

आखिर क्या है पूरा मामला

ईडी ने पश्चिम बंगाल समेत देश के 15 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें कोलकाता स्थित राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंपनी आईपैक (I-PAC) का दफ्तर भी शामिल था। आईपैक कार्यालय पर छापे की खबर मिलते ही खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं। जहां से वह कुछ फाइलें अपने साथ लेकर चली गई। जिसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार पर एजेंसियों के जरिए उनकी पार्टी की निजी और राजनीतिक जानकारी चुराने का गंभीर आरोप लगाया था। इस छापेमारी के विरोध में दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया था। Read More SC में ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर की सुनवाई, कहा- “आप हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते हैं।”

I-PAC मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची ED, ममता बनर्जी समेत कई शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ की FIR की मांग

BE NEWS – प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक माहौल गरमा गया है। ईडी ने पश्चिम बंगाल में की गई छापेमारी मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बाधा डालने का आरोप

दरअसल I-PAC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। ED ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि I-PAC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान राज्य सरकार और शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने जानबूझकर जांच में रुकावट डाली। एजेंसी का कहना है कि रेड के समय अधिकारियों ने सहयोग करने के बजाय जांच प्रक्रिया को बाधित किया।

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सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में रुकावट का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी आरोप लगाया है कि राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल कर सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई और कुछ अहम साक्ष्यों को नष्ट कर दिया गया। याचिका में ED ने कहा कि कानून के रखवाले ही अपराध में भागीदार बन गए, जिससे निष्पक्ष जांच पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में ED ने कहा कि जांच एजेंसी को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करने से रोका गया। एजेंसी का दावा है कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पद और शक्ति का दुरुपयोग करते हुए जांच में सीधी दखलअंदाजी की। मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने सुप्रीम कोर्ट से CBI जांच कराने की मांग भी की है।

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 आखिर क्या है पूरा मामला

बीते  गुरुवार को ईडी ने पश्चिम बंगाल समेत देश के 15 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें कोलकाता स्थित राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंपनी आईपैक (I-PAC) का दफ्तर भी शामिल था। आईपैक कार्यालय पर छापे की खबर मिलते ही खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं। जहां से वह कुछ फाइलें अपने साथ लेकर चली गई। जिसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार पर एजेंसियों के जरिए उनकी पार्टी की निजी और राजनीतिक जानकारी चुराने का गंभीर आरोप लगाया था। इस छापेमारी के विरोध में दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया था। Read More I-PAC मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची ED, ममता बनर्जी समेत कई शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ की FIR की मांग

Unnao Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने वाले हाईकोर्ट आदेश पर लगाई रोक, नोटिस जारी कर मांगा जवाब

BE NEWS – सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस मामले में बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर केस की सुनवाई की। जिसके बाद SC ने इस मामले में दिल्ली हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है और नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

SC ने सेंगर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

आपको बता दें कि आज उन्नाव दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। SC ने सेंगर को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है और साफ किया है कि हाईकोर्ट के 23 दिसंबर के आदेश के आधार पर उन्हें हिरासत से रिहा नहीं किया जाएगा।

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फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई में न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका पर सुनवाई की। सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि, इस मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल हैं, जिन पर विचार किया जाना जरुरी है।

चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यह नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराध का मामला है, जिसमें दोषी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम की धाराएं 5 व 6 के तहत आरोप साबित हुए हैं। अदालत ने रिकॉर्ड पर यह भी लिया कि अपराध के समय पीड़िता की उम्र 15 साल 10 महीने थी।

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हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी थी, यह कहते हुए कि दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ उनकी अपील लंबित है और वे पहले ही सात साल पांच महीने जेल में बिता चुके हैं। इसी आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।हालांकि, सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें अलग से 10 साल की सजा मिली हुई है और उस मामले में उन्हें जमानत नहीं है।

अन्य याचिकाओं पर भी हो सकता है विचार

इस पूरे मामले में अधिवक्ता अंजलि पटेल और पूजा शिल्पकार की ओर से भी याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनकी सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पीड़ित पक्ष ने जताया भरोसा

इससे पहले पीड़िता और उनकी मां ने जंतर-मंतर पर सेंगर को मिली राहत के विरोध में प्रदर्शन किया था। पीड़िता की मां ने कहा कि, ” उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और वे बिना दबाव के कानूनी लड़ाई जारी रखना चाहती हैं। पीड़िता ने CM योगी से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि उन्हें निडर होकर न्याय के लिए लड़ने की सुरक्षा दी जाए।” Read More Unnao Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने वाले हाईकोर्ट आदेश पर लगाई रोक, नोटिस जारी कर मांगा जवाब