Prayagraj Magh Mela 2026: बसंत पंचमी पर संगम बना आस्था का महासंगम, करोड़ों ने लगाई पुण्य की डुबकी

Prayagraj Magh Mela 2026: बसंत पंचमी के पावन पर्व पर शुक्रवार सुबह संगम पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आज बन रहे गजकेसरी योग में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया और पूजा-अर्चना की। सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें देखने को मिलीं। माघ मेले के इस चौथे स्नान को लेकर प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए है।

आपको बता दें कि संगम किनारे चल रहे माघ मेले का आज 23 जनवरी, दिन शुक्रवार को बंसत पंचमी के पावन दिन मनाया जा रहा है। इस स्नान पर्व को लेकर मेला स्थल पर आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 8 बजे तक अनुमानित 1 करोड़ 4 लाख श्रद्धालुओं ने अब तक संगम पर आस्था की डुबकी लगाई है। अभी यह संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कई इंतजाम किए है।

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कोई वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं

प्रशासन का अनुमान है कि बसंत पंचमी से लेकर 26 जनवरी तक, यानी अगले चार दिनों में लगभग साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु संगम तट पर पहुंच सकते हैं। भीड़ को देखते हुए इस दौरान कोई वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं किया गया है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान सुविधा मिल सके।

माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त की गई है। पुलिस, पीएसी, आरएएफ, बीडीएस, यूपी एटीएस के कमांडो और खुफिया एजेंसियां तैनात हैं। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है। स्नान घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड कंपनी पीएसी और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की गई है।

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मेला प्रशासन ने किए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

वसंत पंचमी स्नान को लेकर मेला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्नान घाट तैयार किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में किसी प्रकार की असुविधा न हो। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू किया है।

मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय ने बताया कि इस दौरान भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, घाटों की सुरक्षा और सुरक्षित निकासी व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी रखेंगी और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात रहेगा।

रूट डायवर्जन की विशेष व्यवस्था

ट्रैफिक व्यवस्था के तहत माघ मेला से संबंधित वाहनों को छोड़कर अन्य भारी और हल्के वाहनों को प्रयागराज जिले की सीमा में आने से पहले ही वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ दिया जाएगा। इसके लिए रूट डायवर्जन की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि शहर के भीतर अनावश्यक जाम की स्थिति न बने।

श्रद्धालुओं से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील 

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बसंत पंचमी स्नान पर्व के दिन, यानी 23 जनवरी को नया यमुना पुल पूरी तरह बंद रहेगा। इस दिन आवागमन केवल पुराने यमुना पुल से ही संभव होगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सहयोग करें, ताकि पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। Read More Prayagraj Magh Mela 2026: बसंत पंचमी पर संगम बना आस्था का महासंगम, करोड़ों ने लगाई पुण्य की डुबकी

Amit Shah Haridwar Visit: अखंड ज्योति की शताब्दी पर हरिद्वार से अमित शाह का उद्घोष, कहा- “अब गर्व से गूंज रहा है हिंदुत्व का नारा”

Amit Shah Haridwar Visit केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के दौरान आज तीर्थनगरी हरिद्वार पहुंचे। यहां उन्होंने तीन प्रमुख कार्यक्रमों में शिरकत करते हुए अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के प्रति सरकार के संकल्प को दोहराया।

तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में शिरकत

आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज हरिद्वार में दो दिवसीय दौरे के दौरान तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में शिरकत की। उन्होंने शान्तिकुंज के अखंड ज्योति शताब्दी समारोह का दीपप्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया और पंडित राम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके जीवनकाल में कई युगों का निर्माण हुआ। उनके आंदोलन के तहत 15 करोड़ से अधिक लोग आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल रहे हैं।

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Amit Shah Haridwar Visit
विश्व की सभी समस्याओं का समाधान

शाह ने कहा, “पहले लोग हिंदुत्व की बात करने से डरते थे, लेकिन आज पूरे देश में इसका नारा गूंज रहा है। भारतीय परंपरा में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान निहित है। पंडित राम शर्मा ने गायत्री मंत्र के माध्यम से हर जाति, हर समाज और लिंग भेद से ऊपर उठकर हर आत्मा को कल्याण का मार्ग दिखाया।” इसके अलावा, अमित शाह ने पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के उद्घाटन समारोह में भी भाग लिया। आधुनिक चिकित्सा और योग-आयुर्वेद के समन्वय की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही नए भारत की पहचान है

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1925-26 का वर्ष राष्ट्रीय पुनर्जागरण का वर्ष

केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी बताया कि 1925-26 का वर्ष राष्ट्रीय पुनर्जागरण का वर्ष था, और उसी वर्ष संघ परिवार की स्थापना हुई थी। इसी समय संघ परिवार (RSS) की स्थापना हुई थी और इसी दौर ने देश को आध्यात्मिक और वैचारिक रूप से मजबूती प्रदान की। उन्होंने पंडित राम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके प्रयास आज भी लाखों लोगों के जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रहे हैं। Read More Amit Shah Haridwar Visit: अखंड ज्योति की शताब्दी पर हरिद्वार से अमित शाह का उद्घोष, कहा- “अब गर्व से गूंज रहा है हिंदुत्व का नारा”

Ayodhya Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर उमड़ा भक्ति का सैलाब, ‘जय श्रीराम’ उद्घोष से गूंजा अयोध्या का परिसर

Ramlala Pratishtha Divas 2026- अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। यह वही ऐतिहासिक दिन है, जब 2024 में सदियों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए थे। यह अवसर केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हर राम भक्त के लिए आस्था, विश्वास और गौरव का प्रतीक बन चुका है।

रामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ

आपको बता दें कि गुरुवार, 22 जनवरी 2026 का दिन हर राम भक्त के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसी दिन अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। इस पावन दिन पर अयोध्या में श्रद्धालुओं  के साथ- साथ देश-विदेश से आए भक्त रामलला के दिव्य दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। कोई मंदिर में पहुंचकर प्रभु के चरणों में शीश नवाता है, तो कोई अपने घर में ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर इस शुभ दिन को मना रहा है।

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second pran pratishtha from june 3 in ayodhya after ramlala who is ...

रामलला की दिव्य प्रतिमा

बाल रूप में विराजमान प्रभु श्रीराम का यह स्वरूप ऐसा प्रतीत कराता है मानो वे साक्षात अपने भक्तों को दर्शन दे रहे हों। इस कोमल और दिव्य रूप की पूजा अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाती है। रामलला की यह प्रतिमा काले पत्थर से निर्मित है, जिसे कृष्ण शिला के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यह पत्थर हजारों वर्षों तक अपनी मजबूती और सौंदर्य बनाए रखता है। इसी विशेष शिला से बनी यह मूर्ति आध्यात्मिक और शिल्प कला का अद्भुत संगम है। शिल्प और विशेषताएं रामलला की इस भव्य मूर्ति का निर्माण कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। यह प्रतिमा एक ही पत्थर से तराशी गई है, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है।

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भगवान विष्णु के अवतारों का प्रतीकात्मक रूप

जानकारी के अनुसार, मूर्ति का वजन लगभग 200 किलोग्राम है, ऊंचाई 4.24 फीट और चौड़ाई करीब तीन फीट है। इस प्रतिमा की एक और विशेषता यह है कि इसमें भगवान विष्णु के दसों अवतारों का भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शन होता है, जो इसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। सूर्य तिलक का दिव्य क्षण हर वर्ष रामनवमी के पावन अवसर पर सूर्यदेव स्वयं प्रभु रामलला का ‘सूर्य तिलक’ करते हैं। सूर्य की किरणों से भगवान के मस्तक का यह दिव्य अभिषेक भक्तों के हृदय को भक्ति और आनंद से भर देता है। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक अनुभूति कराता है, बल्कि विज्ञान और परंपरा के अद्भुत समन्वय को भी दर्शाता है।

राम मंदिर का ऐतिहासिक सफर

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि पर प्राचीन काल से रामलला का मंदिर विद्यमान था, जिसे 16वीं शताब्दी में आक्रमणकारी बाबर द्वारा नष्ट कर दिया गया। इसके बाद लगभग 500 वर्षों तक यह स्थल विवाद और संघर्ष का केंद्र बना रहा। दशकों की कानूनी लड़ाई और सामाजिक आंदोलन के बाद भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हो सका। वर्ष 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा आधुनिक भारत के इतिहास का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण बन गई। रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026 न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आस्था और एकता का एक प्रतीक बन चुका है। Read More Ayodhya Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर उमड़ा भक्ति का सैलाब, ‘जय श्रीराम’ उद्घोष से गूंजा अयोध्या का परिसर

Sakat Chauth Vrat 2026: संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का पावन पर्व सकट चौथ आज, जानिए कैसे करें पूजा विधि, कथा और इसका धार्मिक महत्व

BE NEWS – सनातन परंपरा में संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए अनेक व्रत-उपवास बताए गए हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत शुभ व फलदायी व्रत है सकट चौथ, जिसे तिलकुट चौथ भी कहा जाता है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और मुख्य रूप से भगवान श्री गणेश एवं चौथ माता की पूजा को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं संतान की रक्षा और कल्याण के लिए या संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत करती हैं, उन्हें भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सकट चौथ व्रत का महत्व

दरअसल सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से माताओं के लिए माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान के जीवन से संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं।

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सकट चौथ की पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल स्नान-ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सफेद तिल और गुड़ से तिलकुट्टा तैयार करें। एक चौकी पर जल का लोटा, रोली, अक्षत (चावल), तिल और तिलकुट्टा रखें और जल के लोटे पर रोली से सतिया बनाएं, और उस पर 13 बिंदियां लगाएं। हाथ में थोड़ा तिलकुट्टा लेकर सकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें। कथा पूर्ण होने के बाद तिलकुट्टा और कुछ रुपये एक कटोरी में रखकर बयना निकालें। यह बयना सास या साके समान किसी स्त्री को पैर छूकर दें। इसके बाद शाम के समय भगवान गणेश और चौथ माता की विधि-विधान से पूजा करें। चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें दूध का अर्घ्य दें, इसके बाद ही व्रत का पारण करें।

सकट चौथ की परंपराएं

इस दिन कई स्थानों पर तिल से बने पहार (पहाड़) को ढंककर रखा जाता है। अगले दिन सुबह पुत्र इसे खोलता है और सिक्के से काटकर सभी भाई-बंधुओं में बांट देता है। कहीं-कहीं तिल से बकरे की आकृति बनाकर उसे दूब या सिक्के से काटने की परंपरा भी है। मान्यता है कि यह परंपरा पशु बलि के स्थान पर प्रतीकात्मक रूप से शुरू की गई थी। इसके बाद सकट चौथ व्रत कथा का पाठ करें। Read More Sakat Chauth Vrat 2026: संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का पावन पर्व सकट चौथ आज, जानिए कैसे करें पूजा विधि, कथा और इसका धार्मिक महत्व

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने त्रिपुरा में माँ कस्बेश्वरी काली के किए दर्शन-पूजन, प्रदेश एवं देश के कल्याण की कामना की

BE NEWS- उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को त्रिपुरा के सिपाहीजाला जनपद में बांग्लादेश सीमा के समीप स्थित प्राचीन श्री श्री कस्बेश्वरी काली माता मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर त्रिपुरा सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री टिंकू रॉय भी उनके साथ उपस्थित रहे।

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के सजीव प्रतीक

आपको बता दें कि कमलासागर झील के तट पर स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर में उप मुख्यमंत्री ने मां काली के चरणों में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्राचीन तीर्थस्थल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के सजीव प्रतीक हैं, जो राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं।

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ऐतिहासिक महत्व और जन-आस्था के लिए विख्यात

उल्लेखनीय है कि यह ऐतिहासिक मंदिर 15वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में तत्कालीन त्विप्र राज्य के प्रतापी नरेश धन्य माणिक्य के द्वारा निर्मित कराया गया था। मां कस्बेश्वरी काली का यह पावन धाम अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक महत्व और जन-आस्था के लिए विख्यात है। मान्यता है कि मां काली की आराधना से श्रद्धालुओं को शक्ति, साहस और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने श्रद्धालुओं के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए मां कस्बेश्वरी काली से समस्त देशवासियों के सर्वकल्याण की प्रार्थना की। Read More उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने त्रिपुरा में माँ कस्बेश्वरी काली के किए दर्शन-पूजन, प्रदेश एवं देश के कल्याण की कामना की

अयोध्या में प्रतिष्ठा द्वादशी का भव्य उत्सव शुरु, राजनाथ सिंह और सीएम योगी ने किया श्रीराम का पूजन

BE NEWS – अयोध्या आज एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उल्लास की साक्षी बनने जा रही है। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ आज श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाई जा रही है। हिंदी पंचांग के अनुसार आज पौष शुक्ल द्वादशी है, जो 22 जनवरी 2024 को हुई प्राण प्रतिष्ठा की तिथि है। इसी शुभ संयोग के कारण आज के दिन को प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाया जा रहा है।

राजनाथ सिंह और सीएम योगी ने किया श्रीराम का पूजन

आज के मुख्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम में उपस्थित हैं। दोनों नेता राम मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीराम की पूजन किया और इसके बाद विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही प्रतिष्ठा द्वादशी से जुड़े पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों का आज विधिवत समापन होगा।

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श्रीराम के जयघोष से भक्तिमय वातावरण 

आपको बता दें कि इस विशेष अवसर पर अयोध्या पूरी तरह से सजी-संवरी नजर आ रही है। मंदिरों, सड़कों और प्रमुख चौराहों को फूलों, दीपों और भगवा ध्वजों से सजाया गया है। बीते कई दिनों से ही देश-विदेश से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था, जबकि आज लाखों भक्तों के रामलला के दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। चारों ओर जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा है।

महाभिषेक के बाद महाआरती

आज भगवान श्रीराम का पंचामृत से विशेष महाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद श्रृंगार कर राजभोग अर्पित किया जाएगा। दोपहर 12 बजे महाआरती संपन्न होगी। राजभोग के समय लगभग आधे घंटे के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए पट बंद रहेंगे। महाआरती और महाभिषेक का प्रसारण मंदिर परिसर में लगी एलईडी स्क्रीन पर किया जाएगा।

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रामलला का भव्‍य प्राण प्रत‍िष्‍ठा समारोह आज, CM योगी पहुंचे अयोध्‍या

रामकथा पंडाल का आयोजन

दोपहर करीब 1:30 बजे प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह का औपचारिक उद्घाटन होगा। इसके साथ ही अंगद टीला परिसर स्थित रामकथा पंडाल में एक विशाल सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें संत, धर्माचार्य, जनप्रतिनिधि और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। सभा के कारण आज रामकथा का समय ढाई बजे की बजाय साढ़े तीन बजे निर्धारित किया गया है।

मां अन्नपूर्णा मंदिर पर ध्वजारोहण

उत्सव के अंतर्गत परकोटे में स्थित छह मंदिरों में से मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया जाएगा। यह ध्वजारोहण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा पारंपरिक विधि से किया जाएगा। सेना की एक टुकड़ी प्रोटोकॉल के तहत मौके पर मौजूद रहेगी।

अयोध्याधाम में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का पांचवां दिन ...

सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा

आज के कार्यक्रम को देखते हुए अयोध्या को पांच जोन और दस सेक्टर में बांटा गया है। एयरपोर्ट से लेकर राम मंदिर तक कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, सूचना केंद्र और विश्राम स्थलों की विशेष व्यवस्था की गई है। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए अलग मार्ग और सहायता दल तैनात किए गए हैं। Read More अयोध्या में प्रतिष्ठा द्वादशी का भव्य उत्सव शुरु, राजनाथ सिंह और सीएम योगी ने किया श्रीराम का पूजन

अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे, आज होगा रामलला का अभिषेक, सीएम योगी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रहेंगे उपस्थित

BE NEWS – अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पौष शुक्ल द्वादशी तिथि पर 22 जनवरी 2024 को हुई थी। इस बार यह तिथि 31  दिसंबर यानि आज के दिन पड़ रही है। इसके लिए भव्य तैयारियों का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहेंगे।

अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष

आपको बता दें कि आज 31 दिसंबर दिन बुधवार को पौष शुक्ल द्वादशी तिथि पर अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने वाले है। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर सीएम योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित होंगे। चार घंटे तक रहकर आयोजित विविध अनुष्ठानों में शामिल होंगे।

अयोध्या : आज फिर राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की पहली वर्षगांठ ...

अंगद टीला पर जनता को करेंगे संबोधित

प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ के इस अवसर पर आज रामलला का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। अभिषेक के बाद भव्य श्रृंगार कर भोग अर्पित कर आरती की जाएगी। इस अवसर पर रक्षामंत्री सुबह 11:00 बजे अयोध्या पहुंचेंगे और अन्नपूर्णा मंदिर में ध्वजारोहण करेंगे। इसके बाद रामजन्मभूमि परिसर से सटे अंगद टीला पर जनता को संबोधित करेंगे।

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Shri Ram Lalla Pran-Pratishtha, Shri Ram Janam Bhoomi Ayodhya Dham Ji ...

2 जनवरी तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

आज यह वर्षगांठ प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाई जा रही है, जिसके अंतर्गत 29 दिसंबर से 2 जनवरी तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन किया गया था, जो कि कल दिन मंगलवार को संपन्न हुए। जिसके लिए ट्रस्ट ने इस बार कार्यक्रमों का मुख्य केंद्र रामजन्मभूमि परिसर से सटे अंगद टीला को बनाया था। आज के इस शुभ अवसर पर संत- महात्माओं के साथ बड़ी संख्या में लोग भी इस ऐतिहासिक और गौरवमयी क्षण के साक्षी बनने वाले हैं।

सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा

आज के कार्यक्रम को देखते हुए अयोध्या को पांच जोन और दस सेक्टर में बांटा गया है। एयरपोर्ट से लेकर राम मंदिर तक कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, सूचना केंद्र और विश्राम स्थलों की विशेष व्यवस्था की गई है। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए अलग मार्ग और सहायता दल तैनात किए गए हैं।

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Sakat Chauth 2026: कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत, यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसका धार्मिक महत्व…

BE NEWS – हिंदू धर्म में संकट चतुर्थी का बहुत ही महत्व है। भगवान गणेश और संकटा माता को समर्पित यह पर्व संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट चौथ या माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताएं द्वारा अपनी संतान के लिए रखा जाता है। आइये जानें इस व्रत के शुभ मुहूर्त, तिथि और धार्मिक महत्व…

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को संकट चौथ, तिलकुट चौथ या माघी चौथ कहा जाता है। पूजा में इस दिन तिल का विशेष रुप से प्रयोग किया जाता है। इस दिन व्रत करने से भगवान गणेश और संकटा माता विशेष कृपा संतान पर बनी रहती है। विध्नहर्ता सभी कष्टों और संकटों को दूर करते हैं व हर कार्य में सफलता मिलती है।

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Sankashti Chaturthi 2023: कब रखा जाएगा एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत ...

सकट चौथ का शुभ मुहूर्त व तिथि

हिंदु पंचाग के अनुसार इस बार यह व्रत 6 जनवरी दिन मंगलवार 2026 को रखा जाएगा। जिसकी शुरुआत 06 जनवरी 2026 को सुबह 08: 01 मिनट पर होगी और समाप्ति 07 जनवरी सुबह 6:52 मिनट पर होगी। वहीं उदया तिथि के अनुसार ये पर्व 06 जनवरी 2026 को ही रखा जाएगा।

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय

संकट चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, संकट चौथ 2026 पर चंद्रोदय रात लगभग 9:00 बजे होगा।

Vakratunda Sankashti Chaturthi October 2025 Date shubh muhurat siddhi ...

संकट चौथ व्रत का महत्व

सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की परिक्रमा कर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया था, जिसके कारण वे प्रथम पूज्य कहलाए।

Akhurath Sankashti Chaturthi Paran Vidhi 2024: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी ...

सकट चौथ पर गणपति पूजन विधि

संकट चौथ के दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लें। इसके बाद चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर गणपति की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा या तस्वीर के आगे सिंदूर, दूर्वा, अक्षत, सुपारी और पुष्प अर्पित करें।  गणेश जी को तिलकुट (तिल से बनी मिठाई) का भोग लगाएं। इसके बाद संकट चौथ की पौराणिक कथा का पाठ करें।रात में चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।

Sakat Chauth 2024: When will it be celebrated? Date, rituals and all ...

संतान के जीवन से सभी विघ्न-बाधाएं होती हैं दूर 

इस दिन व्रत और पूजन करने से यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। संतान के जीवन से सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं व घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। Read More Sakat Chauth 2026: कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत, यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसका धार्मिक महत्व…