Magh Mela 2026: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने में जुटा प्रयागराज प्रशासन, माफी और प्रोटोकॉल पर बनी सहमति के संकेत

Magh Mela- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद को शांत करने के लिए प्रयागराज जिला प्रशासन अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम में हुई अपनी चूक को स्वीकार करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को भी तैयार हो गया है। मामले को सुलझाने के लिए लखनऊ से शासन के दो वरिष्ठ अधिकारी मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं।

शंकराचार्य ने रखी दो स्पष्ट शर्तें

बता दें कि इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन की कोशिशों के बावजूद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी वापसी को लेकर दो स्पष्ट शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि जिन अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया, वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। दूसरी शर्त के तहत संगम स्नान के दौरान चारों शंकराचार्यों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल को पूरी तरह लागू किया जाए।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने पुष्टि की है कि शासन स्तर से संपर्क किया गया है और अधिकारी वाराणसी पहुंचने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अब फैसला पूरी तरह प्रशासन के रवैये पर निर्भर करेगा।

ये भी देखें – योगी कैबिनेट के अहम फैसले | UP Cabinet Big Decisions Today | BE NEWS

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
मौनी अमावस्या की घटना के बाद शुरू हुआ विवाद

इस विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई थी। संगम नोज तक पालकी ले जाने को लेकर शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई थी। प्रशासन ने बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया, जबकि शंकराचार्य पक्ष का कहना था कि उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। घटना से आहत होकर शंकराचार्य पिछले 12 दिनों तक अपने शिविर में धरने पर बैठे रहे और बाद में नाराजगी जताते हुए माघ मेला छोड़कर वाराणसी चले गए थे।

See also  पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की पुण्यतिथि आज, राहुल गांधी, सीएम हिंमता बिस्वा शर्मा समेत कई दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
माघी पूर्णिमा से पहले समाधान की कोशिश

शंकराचार्य का अचानक मेला छोड़ना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। माघी पूर्णिमा का प्रमुख स्नान निकट होने के कारण सरकार किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहती। अधिकारियों का कहना है कि शंकराचार्य को पूरे सम्मान के साथ वापस लाया जाएगा और प्रोटोकॉल के अनुसार ही संगम स्नान कराया जाएगा।