Today’s Horoscope: 1 मार्च 2026 का राशिफल: जानें आज का दिन किस राशि के लिए रहेगा शुभ…

Today’s Horoscope: – आज ग्रहों की स्थिति कई राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। 1 मार्च 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की दृष्टि से कई राशियों के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है। चंद्रमा की स्थिति भावनात्मक मामलों और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती है। आज कुछ लोगों को करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, तो कुछ को आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होगी। पारिवारिक जीवन में संतुलन और संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल।

Today's Horoscope
Today’s Horoscope
मेष राशि

आज का दिन (Today’s Horoscope) आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी और नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें। परिवार के साथ समय बिताने से रिश्ते बेहतर होंगे। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, फिर भी अधिक थकान से बचें। शुभ रंग लाल और शुभ अंक 9 है।

वृषभ राशि

आज आपको कार्यों में स्थिरता और धैर्य बनाए रखना होगा। निवेश संबंधी फैसले सोच-समझकर लें। परिवार में सामंजस्य बना रहेगा और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। खानपान पर ध्यान दें, वरना हल्की स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। शुभ रंग हरा और शुभ अंक 6 है।

मिथुन राशि

नए संपर्क और नेटवर्किंग आपके लिए लाभदायक साबित होंगे। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक रूप से दिन अनुकूल है और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। मानसिक रूप से सुकून मिलेगा। शुभ रंग पीला और शुभ अंक 5 है।

 कर्क राशि

भावनात्मक रूप से संतुलित रहने की जरूरत है। कार्यक्षेत्र में मेहनत रंग लाएगी और वरिष्ठों से सराहना मिल सकती है। खर्चों में वृद्धि संभव है, इसलिए बजट पर ध्यान दें। परिवार में किसी शुभ कार्य की योजना बन सकती है। शुभ रंग सफेद और शुभ अंक 2 है।

सिंह राशि

आज का दिन(Today’s Horoscope) आपका आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। व्यापार में लाभ के संकेत हैं और नौकरी में पदोन्नति की संभावना बन सकती है। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, लेकिन आराम भी जरूरी है। शुभ रंग सुनहरा और शुभ अंक 1 है।

कन्या राशि

आज सोच-समझकर लिए गए निर्णय लाभकारी साबित होंगे। कार्य में एकाग्रता बनाए रखें। आर्थिक मामलों में बचत पर ध्यान दें। मित्रों से मुलाकात या बातचीत से मन प्रसन्न रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, पर पेट से जुड़ी समस्या से सावधान रहें। शुभ रंग नीला और शुभ अंक 7 है।

तुला राशि

रचनात्मक कार्यों में सफलता मिल सकती है। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए वित्तीय संतुलन बनाए रखें। परिवार में सहयोग का माहौल रहेगा। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। शुभ रंग गुलाबी और शुभ अंक 8 है।

वृश्चिक राशि

आज आपको अपने कार्यों में गोपनीयता बनाए रखनी होगी। अचानक धन लाभ के योग हैं। संतान पक्ष से सुखद समाचार मिल सकता है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए ध्यान लाभकारी रहेगा। शुभ रंग मरून और शुभ अंक 4 है।

धनु राशि

भाग्य का साथ मिलेगा और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। यात्रा के योग बन रहे हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। शुभ रंग नारंगी और शुभ अंक 3 है।

मकर राशि

धैर्य और संयम से काम लेना आज जरूरी है। कार्यक्षेत्र में मेहनत का फल मिलेगा। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। परिवार में बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। जोड़ों के दर्द या थकान से सावधान रहें। शुभ रंग ग्रे और शुभ अंक 10 है।

कुंभ राशि

नई योजनाओं की शुरुआत के लिए दिन अनुकूल है। मित्रों और सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ के संकेत हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। पर्याप्त नींद लें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शुभ रंग बैंगनी और शुभ अंक 11 है।

मीन राशि

आज आत्मचिंतन और भविष्य की योजना बनाने का दिन है। करियर में नई दिशा मिल सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। योग और ध्यान से मानसिक शांति मिलेगी। शुभ रंग आसमानी और शुभ अंक 12 है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि और राशि अनुसार जलाभिषेक शुभ समय…

Mahashivratri 2026 – महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाहित दंपत्तियों को इस दिन साथ मिलकर शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और स्थिरता प्राप्त होती है। साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी यानि आज, रविवार को मनाई जा रही है। इस बार यह पर्व कई शुभ योगों के संयोग में आया है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग

इस वर्ष महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत शुभ और कार्यसिद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। इस योग में व्रत और पूजा करने से रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं। करियर और व्यापार में सफलता के योग बनते हैं। परिवार में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का वास होता है और रविवार का दिन होने से इस योग का प्रभाव और अधिक फलदायी माना जा रहा है।

Mahashivratri 2026
Mahashivratri 2026
 भगवान शिव का 11 बेलपत्र अर्पित करना बेहद शुभ

महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) के दिन शाम 7:47 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र सूर्य की ऊर्जा और तेज का प्रतीक है। इस नक्षत्र में भगवान शिव का 11 बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। कार्यों में स्थिरता और सफलता प्राप्त होती है।

Mahashivratri 2026

 श्रवण नक्षत्र (शाम 7:48 बजे से प्रारंभ)

श्रवण नक्षत्र चंद्रमा से संबंधित है और मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है।

1.शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, सफेद पुष्प और धतूरा अर्पित करें।

2. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।

3. शिव-पार्वती विवाह कथा का श्रवण करें।

इस नक्षत्र में की गई पूजा मनोकामनाओं की पूर्ति और पारिवारिक सुख देती है।

Mahashivratri 2026
Mahashivratri 2026
 निशीथ काल में पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) पर निशीथ काल रात्रि 11:57 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। यह समय शिव साधना के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस समय की गई आराधना का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। विशेष मंत्र जाप और रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

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Mahashivratri 2026

 राशि अनुसार शिवलिंग का अभिषेक

महाशिवरात्रि पर अपनी राशि के अनुसार अभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

मेष: गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर अभिषेक करें

वृष: दही से अभिषेक करें। सफेद पुष्प, फल और वस्त्र अर्पित करें।

मिथुन: गन्ने के रस से अभिषेक करें। धतूरा, भांग और हरे फल चढ़ाएं।

कर्क: दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करें। सफेद वस्त्र व मिष्ठान अर्पित करें।

सिंह: शहद या गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक करें। लाल पुष्प और रोली चढ़ाएं।

कन्या: गन्ने के रस से अभिषेक करें। भांग, धतूरा और मंदार पत्र अर्पित करें।

तुला: शहद से अभिषेक करें। सफेद वस्त्र और मंदार पुष्प चढ़ाएं।

वृश्चिक: शहद युक्त तीर्थ जल से अभिषेक करें। लाल पुष्प व फल अर्पित करें।

धनु: गाय के दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करें। पीला वस्त्र और धतूरा चढ़ाएं।

मकर: गंगाजल या गन्ने के रस से अभिषेक करें। शमी पत्र अर्पित करें।

कुंभ: गन्ने के रस से अभिषेक करें। दूर्वा और मंदार पुष्प चढ़ाएं।

मीन: केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। केला और पीले पुष्प अर्पित करें।

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महाशिवरात्रि पूजा की सरल विधि

1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. व्रत का संकल्प लें।

3. शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।

4. बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प अर्पित करें।

5. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।

6. रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है।

 महाशिवरात्रि के पावन पर्व का विशेष महत्व

इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग, उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग महाशिवरात्रि को अत्यंत शुभ बना रहा है। यह पर्व आध्यात्मिक उन्नति, वैवाहिक सुख, कार्य सिद्धि और जीवन में स्थिरता प्रदान करने वाला माना जा रहा है। Read More Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि और राशि अनुसार जलाभिषेक शुभ समय…

February Ekadashi 2026: फरवरी में कब-कब रखा जाएगा एकादशी व्रत? जानिए शुभ मुहूर्त, सही तारीख व पारण समय…

February Ekadashi 2026 – हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने दो एकादशी व्रत आते हैं – एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

फरवरी 2026 (February Ekadashi 2026) में विजया एकादशी और आमलकी एकादशी मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इन दोनों एकादशियों की तिथि, पारण समय और धार्मिक महत्व।

February Ekadashi 2026

फरवरी एकादशी 2026 की तिथियां –

1.विजया एकादशी – 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)

2. आमलकी एकादशी- 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार)

विजया एकादशी की तिथि, पारण समय 

विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। जिसकी पारण तिथि 14 फरवरी  सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक है।

धार्मिक महत्व 

शास्त्रों के अनुसार विजया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और शत्रुओं पर विजय मिलती है। यह व्रत जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

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February Ekadashi 2026
February Ekadashi 2026
आमलकी एकादशी तिथि, पारण समय और महत्व

आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। साल 2026 में यह एकादशी 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी। वहीं पारण तिथि 28 फरवरी 2026 सुबह 06:47 बजे से 09:06 बजे तक रहेगी।

धार्मिक महत्व

मान्यता है कि आमलकी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के पापों का नाश होता है। इस दिन आंवले (आमलकी) के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि प्रदान करता है।

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February Ekadashi 2026
February Ekadashi 2026
कब करनी चाहिए एकादशी व्रत की शुरुआत

वैसे तो एकादशी व्रत वर्ष के किसी भी महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू किया जा सकता है, लेकिन शास्त्रों में मार्गशीर्ष मास की उत्पन्ना एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ था। Read More February Ekadashi 2026: फरवरी में कब-कब रखा जाएगा एकादशी व्रत? जानिए शुभ मुहूर्त, सही तारीख व पारण समय…

होलाष्टक 2026: कब लगेगा Holashtak ? जानें इसका धार्मिक महत्व व होलिका दहन और होली की सही तारीख…

Holashtak 2026 – हिन्दू धर्म में फाल्गुन मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पावन तिथि रंगों और उमंग का महापर्व होली (Holi) से जुड़ी हुई है। होली महापर्व की शुरुआत होलाष्टक (Holashtak) से होती है, जो फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक आठ दिनों तक रहता है। इस दौरान विशेष धार्मिक मान्यताओं के कारण कई शुभ कार्यों पर रोक लगाई जाती है।

Holashtak
Holashtak
होलाष्टक (Holashtak) का प्रारम्भ व समाप्ति

होलाष्टक (Holashtak) का समय फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक माना जाता है। पंचांग के अनुसार इस साल होलाष्टक (Holashtak) 24 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 03 मार्च 2026 तक रहेगा। वहीं होलिका दहन 03 मार्च 2026 को किया जाएगा। जिसका शुभ मुहूर्त सायंकाल 06:08 से 08:35 बजे तक रहेगा। धुलैण्डी (रंगों वाली होली) 04 मार्च 2026 को खेली जायेगी।

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Holi
होलाष्टक का धार्मिक महत्व

हमारे सनातन धर्म में होलाष्टक (Holashtak) का संबंध प्राचीन कथा से जुड़ा है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, यह अवधि प्रहलाद और राजा हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, होलिका ने प्रहलाद को अग्नि में जलाने का प्रयास किया, लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त होने के कारण सुरक्षित रहे, जबकि होलिका स्वयं जल गई। इसलिए होलाष्टक (Holashtak) के आठ दिन नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव को बढ़ाने वाले माने जाते हैं। इस अवधि में शास्त्रों के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करना अशुभ माना जाता है।

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Holika Dahan
Holika Dahan
होलाष्टक (Holashtak) के दौरान निम्न कार्य नहीं करने चाहिए-

1. विवाह, सगाई, मुंडन जैसी मांगलिक क्रियाएं

2. कोई भी धन या संपत्ति से संबंधित शुभ कार्य

3. नवविवाहित स्त्रियों के लिए मायके में रहने का विधान

4. अन्य व्यक्तिगत या पारिवारिक शुभ कार्य

फाल्गुन माह और होली का महत्व

फाल्गुन मास 2 फरवरी 2026 से शुरू होगा। इस मास में महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं। बसंत पंचमी से लेकर होली तक के दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस समय मंदिरों में गुलाल अर्पित किया जाता है और विभिन्न स्थानों पर होली के आयोजन होते हैं।

होली के महापर्व शुरूआत

होलाष्टक (Holashtak) के प्रारंभ समय शुभ कार्यों से बचना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव को कम करना और परिवार में शांति बनाए रखना है। होलाष्टक (Holashtak) समाप्त होने के साथ ही होली का महापर्व शुरू होता है। इस समय भक्त खुशी और उमंग के साथ एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर पर्व मनाते हैं। Read More होलाष्टक 2026: कब लगेगा Holashtak ? जानें इसका धार्मिक महत्व व होलिका दहन और होली की सही तारीख…

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखें ये 5 शुभ चीजें, बढ़ेगा धन, सुख-समृद्धि और आएगी आर्थिक स्थिरता

BE NEWS – जब भी हम घर बनवाते है या उसे डेकोर करवाते है तो अपने हिसाब सो चीजों का रख- रखाव करते है। जो शायद हमें कहीं न कहीं आगे चलकर नुकसान भी पहुंचा जाता है। जिनका हमें पता भी नहीं चलता है। ऐसे में हम आपको वास्तु शास्त्र से जुड़े कुछ ऐसी टिप्स और ट्रिक बताने जा रहे हैं जो घर-परिवार के साथ आपके जीवन को भी सुख- समृद्धी से भर देंगे।

वास्तु शास्त्र का महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखी गई कुछ विशेष वस्तुएं व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और धन-वृद्धि लाने में सहायक मानी जाती हैं। यदि इन चीजों को सही दिशा और विधि से रखा जाए, तो मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की कृपा बनी रहती है। मान्यता है कि इससे नौकरी और व्यवसाय में सफलता मिलती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। आइए जानते हैं उन 5 खास वस्तुओं के बारे में, जिन्हें घर में रखना बेहद शुभ माना जाता है।

1. भगवान गणेश की मूर्ति

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। घर में गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर का होना अत्यंत शुभ माना जाता है। उनकी स्थापना से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और नए कामों की शुरुआत में सफलता मिलती है। नौकरी और व्यापार से जुड़े कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ते हैं। गणेश जी की मूर्ति को साफ-सुथरे और शांत स्थान पर रखना चाहिए।

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2. नारियल (श्रीफल)

हिंदू धर्म में नारियल को श्रीफल कहा गया है और इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। जिस घर में नारियल रखा जाता है, वहां धन और समृद्धि का वास माना जाता है। रसोई या पूजा स्थान में नारियल रखने से आर्थिक समस्याएं कम होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घटता है।

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3. घर के मंदिर में शंख

शंख को सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। घर के मंदिर में शंख रखने से वास्तु दोष कम होते हैं और वातावरण में शांति बनी रहती है। नियमित रूप से शंख की सफाई करना शुभ माना जाता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है।

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4. धन की कमी से बचने के लिए मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की तस्वीर

यदि घर में धन की कमी बनी रहती है, तो मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की तस्वीर लगाना लाभकारी माना जाता है। इस तस्वीर को उत्तर दिशा या पूजा स्थान में लगाना शुभ होता है। इससे आय के स्रोत मजबूत होते हैं और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण आता है।

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5. पूजा स्थल पर बांसुरी

बांसुरी को सुख, प्रेम और मधुरता का प्रतीक माना जाता है। पूजा स्थल में बांसुरी रखने से घर के सदस्यों के बीच तालमेल बढ़ता है और तनाव कम होता है। यह मन को शांत रखने और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में मदद करती है।

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इन बातों का भी रखें ध्यान
  1. घर का उत्तर भाग साफ और हल्का रखें, क्योंकि इसे धन की दिशा माना जाता है।
  2.  उत्तर दिशा में भारी सामान रखने से बचें।
  3. घर में नियमित रूप से रोशनी और ताजी हवा का प्रवाह बना रहना चाहिए।
  4. टूटे हुए बर्तन और खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान तुरंत घर से बाहर निकाल दें।
  5. उत्तर या पूर्व दिशा में पानी से भरा साफ कलश या छोटा फव्वारा रखना शुभ माना जाता है, इससे धन की ऊर्जा सक्रिय होती है।

वास्तु शास्त्र के इन सरल उपायों को अपनाकर आप अपने घर में सकारात्मक वातावरण बना सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खोल सकते हैं। Read More Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखें ये 5 शुभ चीजें, बढ़ेगा धन, सुख-समृद्धि और आएगी आर्थिक स्थिरता

February Purnima 2026: फरवरी में कब है माघ पूर्णिमा? यहां जानें क्या है शुभ तिथि, मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व…

February Purnima 2026: सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह तिथि स्नान, दान, व्रत और जप के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्य शीघ्र फल प्रदान करते हैं और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

बता दें कि साल 2026 में फरवरी माह में माघ पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन कल्पवास का समापन भी होता है और भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है।

Magh Purnima 2025: कब है माघ पूर्णिमा? जानिए डेट, स्नान-दान का शुभ ...

फरवरी में माघ पूर्णिमा कब है?

1.माघ पूर्णिमा तिथि- 1 फरवरी 2026

2.पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 1 फरवरी सुबह 05:52 बजे

3. पूर्णिमा तिथि समाप्त- 2 फरवरी सुबह 03:38 बजे

4. चंद्रोदय समय – शाम 05:26 बजे

माघ पूर्णिमा 2024 में कब है?

धार्मिक नियमों का पालन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति

माघ पूर्णिमा के दिन धार्मिक नियमों का पालन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन श्रद्धालुओं को निम्नलिखित विधि अपनानी चाहिए। इसके लिए सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत रखें। इसके बाद जप, हवन और दान  करें। पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करें फिर निर्धन लोगों और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें।

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माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

माघ पूर्णिमा का नाम मघा नक्षत्र से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ महीने में देवता मनुष्य रूप धारण कर प्रयागराज में स्नान, दान और जप करते हैं। इसी कारण पूरे माघ मास में गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। जो श्रद्धालु पूरे माघ महीने स्नान नहीं कर पाते, उनके लिए माघ पूर्णिमा का दिन अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। Read More February Purnima 2026: फरवरी में कब है माघ पूर्णिमा? यहां जानें क्या है शुभ तिथि, मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व…

शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने का है विशेष महत्व, जानें इसको करने से होने वाले प्रमुख लाभ…

BE NEWS – हिंदू सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी देवता के समर्पित है। ऐसे ही शनिवार और मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ करने से जातक को शनिदेव से संबधित सभी कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानें इसका विशेष महत्व…

सुंदरकांड का बहुत ही फलदायी

हिंदू धर्म में शनिवार के दिन सुंदर कांड और हनुमान चालीसा को पाठ करने का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार गोस्वामी तुलसी दास जी द्वारा लिखित ‘श्री रामचरितमानस’ के पांचवें अध्याय, सुंदरकांड का बहुत ही लाभकारी और फलदायी माना जाता है। वैसे तो हर दिन इसका पाठ किया जा सकता है पर शनिवार के दिन इसका विशेष महत्व माना जाता है। कहते है कि शनिवार के दिन हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ करने से बजरंगबली के साथ- साथ शनिदेव का भी आशीर्वाद भी मिलता है। जीवन में बार-बार आ रही परेशानियां, ग्रह दोष दूर हो जाते है।

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सावन में हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए करें सुंदरकांड का पाठ, कई ...
सुंदरकांड का पाठ करने होने वाले लाभ

कहते है कि सुंदरकांड का पाठ करने से शनि की साढें साती, ढैय्या और महादशा के कष्टों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख- शांति आती हैं। ऐसी मान्यता है कि संकल्प लेकर लगातार सुंदरकांड का पाठ करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं, साथ ही बल और बुद्धि भी मिलती हैं। घर में मौजूद प्रेत बाधा, नकारात्मक शक्तियां और बुरी नजर दूर होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुंदरकांड का पाठ करते समय इसको अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।

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Basant Panchami 2026: मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए लगाएं ये 5 विशेष पीले भोग, करियर में मिलेगी अपार सफलता

Basant Panchami 2026 – बसंत पंचमी सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन ज्ञान और कला की देवी माता सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भक्त माता को विशेष भोग अर्पित करते हैं।

इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं कि माता सरस्वती को कौन-कौन सी चीजें भोग के रूप में लगाई जाती हैं और उनके महत्व के बारे में…

Basant Panchami 2025 : बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए ...

1.माता सरस्वती के प्रिय भोग मालपुआ

माता सरस्वती के प्रिय भोग मालपुआ बसंत पंचमी पर माता सरस्वती को मालपुए का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेषकर विद्यार्थी इसे अर्पित करें, तो शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

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2. बेसन की बर्फी

बेसन की बर्फी बेसन से बनी मीठी बर्फी भी माता को अर्पित की जा सकती है। भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार और मित्रों में बांटा जा सकता है।

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3. बूंदी या बूंदी के लड्डू

बूंदी या बूंदी के लड्डू मीठी बूंदी माता सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। इसके लड्डू बनाकर भोग चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। पीले मीठे चावल पीला रंग माता को बहुत भाता है।

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4. पीले मीठे चावल

बसंत पंचमी पर माता सरस्वती को पीले मीठे चावल बनाने के लिए केसर, सूखा मावा, देसी घी और चावल का उपयोग किया जा सकता है।

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5. केसर की खीर या हलवा

केसर की खीर या हलवा केसर से बनी मिठाइयाँ माता की प्रिय हैं। इसलिए भोग के रूप में आप केसर हलवा या केसर खीर भी अर्पित कर सकते हैं।

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6. भोग में अर्पित करें फल 

बसंत पंचमी पर माता सरस्वती को भोग में अगर ऊपर बताई गई सामग्री उपलब्ध नहीं है, फल जैसे तो केला, सेब, संतरा, बेर, नारियल जैसे फल भी भोग के रूप में अर्पित किए जा सकते हैं।

भोग अर्पित करने का महत्व

भोग अर्पित करने का महत्व बसंत पंचमी पर माता सरस्वती को भोग अर्पित करने से शिक्षा, करियर और पारिवारिक जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, जो व्यक्ति आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर है, उसके लिए माता की पूजा आलौकिक अनुभवों और आशीर्वाद का मार्ग खोलती है।

बसंत पंचमी का यह पर्व केवल देवी की पूजा का ही नहीं बल्कि ज्ञान और रचनात्मकता का उत्सव भी है। माता सरस्वती की कृपा से जीवन में न केवल विद्या की वृद्धि होती है बल्कि व्यक्ति का मन भी शांत बनता है। Read More Basant Panchami 2026: मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए लगाएं ये 5 विशेष पीले भोग, करियर में मिलेगी अपार सफलता

Ayodhya Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर उमड़ा भक्ति का सैलाब, ‘जय श्रीराम’ उद्घोष से गूंजा अयोध्या का परिसर

Ramlala Pratishtha Divas 2026- अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। यह वही ऐतिहासिक दिन है, जब 2024 में सदियों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए थे। यह अवसर केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हर राम भक्त के लिए आस्था, विश्वास और गौरव का प्रतीक बन चुका है।

रामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ

आपको बता दें कि गुरुवार, 22 जनवरी 2026 का दिन हर राम भक्त के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसी दिन अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। इस पावन दिन पर अयोध्या में श्रद्धालुओं  के साथ- साथ देश-विदेश से आए भक्त रामलला के दिव्य दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। कोई मंदिर में पहुंचकर प्रभु के चरणों में शीश नवाता है, तो कोई अपने घर में ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर इस शुभ दिन को मना रहा है।

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रामलला की दिव्य प्रतिमा

बाल रूप में विराजमान प्रभु श्रीराम का यह स्वरूप ऐसा प्रतीत कराता है मानो वे साक्षात अपने भक्तों को दर्शन दे रहे हों। इस कोमल और दिव्य रूप की पूजा अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाती है। रामलला की यह प्रतिमा काले पत्थर से निर्मित है, जिसे कृष्ण शिला के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यह पत्थर हजारों वर्षों तक अपनी मजबूती और सौंदर्य बनाए रखता है। इसी विशेष शिला से बनी यह मूर्ति आध्यात्मिक और शिल्प कला का अद्भुत संगम है। शिल्प और विशेषताएं रामलला की इस भव्य मूर्ति का निर्माण कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। यह प्रतिमा एक ही पत्थर से तराशी गई है, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है।

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भगवान विष्णु के अवतारों का प्रतीकात्मक रूप

जानकारी के अनुसार, मूर्ति का वजन लगभग 200 किलोग्राम है, ऊंचाई 4.24 फीट और चौड़ाई करीब तीन फीट है। इस प्रतिमा की एक और विशेषता यह है कि इसमें भगवान विष्णु के दसों अवतारों का भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शन होता है, जो इसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। सूर्य तिलक का दिव्य क्षण हर वर्ष रामनवमी के पावन अवसर पर सूर्यदेव स्वयं प्रभु रामलला का ‘सूर्य तिलक’ करते हैं। सूर्य की किरणों से भगवान के मस्तक का यह दिव्य अभिषेक भक्तों के हृदय को भक्ति और आनंद से भर देता है। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक अनुभूति कराता है, बल्कि विज्ञान और परंपरा के अद्भुत समन्वय को भी दर्शाता है।

राम मंदिर का ऐतिहासिक सफर

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि पर प्राचीन काल से रामलला का मंदिर विद्यमान था, जिसे 16वीं शताब्दी में आक्रमणकारी बाबर द्वारा नष्ट कर दिया गया। इसके बाद लगभग 500 वर्षों तक यह स्थल विवाद और संघर्ष का केंद्र बना रहा। दशकों की कानूनी लड़ाई और सामाजिक आंदोलन के बाद भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हो सका। वर्ष 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा आधुनिक भारत के इतिहास का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण बन गई। रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026 न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आस्था और एकता का एक प्रतीक बन चुका है। Read More Ayodhya Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर उमड़ा भक्ति का सैलाब, ‘जय श्रीराम’ उद्घोष से गूंजा अयोध्या का परिसर

Friday Worship Ritual: देवी लक्ष्मी और संतोषी मां की विशेष कृपा पाने के लिए शुक्रवार के दिन करें ये उपाय, भूलकर भी न करें ये काम…

Friday Worship Ritual: हिंदु धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी- देवता को समर्पित है। जिसमें से शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी और संतोषी मां को समर्पित है। कहते है कि इस दिन पूजा करने से घर में सुख- समृद्धि, धन- धान्य की कोई कमी नहीं रहती है।

मां लक्ष्मी और संतोषी को समर्पित शुक्रवार का दिन

आपको बता दें कि शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी और संतोषी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से घर में धन, सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। खासतौर पर अगर पूजा सही नियमों के साथ की जाए और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए, तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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Vaibhav Laxmi Vrat: शुक्रवार को करें वैभव लक्ष्मी व्रत, जानें कब से ...

शुक्रवार की पूजा विधि

शुक्रवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ या गुलाबी रंग के वस्त्र पहने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर या साफ स्थान पर मां लक्ष्मी और संतोषी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मन में श्रद्धा रखते हुए संकल्प लें और पूजा की शुरुआत करें। पूजा के दौरान मां को लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां, धूप और घी का दीपक अर्पित करें। भोग में गुड़-चना, खीर या सफेद मिठाई चढ़ाना शुभ माना जाता है। अंत में मां से परिवार की सुख-समृद्धि, धन- धान्य और सौभाग्य की कामना करें।

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Friday Worship: शुक्रवार के दिन किन देवी-देवताओं की होती है पूजा? जानिए ...

शुक्रवार के दिन भूलकर भी न करें ये काम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ गलतियां ऐसी हैं जो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को अप्रसन्न कर सकती हैं।

1. गंदगी न रखें- शुक्रवार के दिन घर के किसी भी कोने में गंदगी नहीं होनी चाहिए। माना जाता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ स्थान पर ही निवास करती हैं।

2. गंदे या फटे कपड़े न पहनें- इस दिन हमेशा साफ-सुथरे और सलीके वाले वस्त्र पहनें।

3. पैसों का लेन-देन न करें- शुक्रवार को न तो किसी को उधार देना शुभ माना जाता है और न ही उधार लेना।

4. प्रॉपर्टी से जुड़े कार्य टालें- वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन जमीन-जायदाद से संबंधित काम करने से बचना चाहिए।

5. रसोई का सामान न खरीदें- मान्यता है कि शुक्रवार को रसोई से जुड़ा सामान खरीदने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं।

अगर आप शुक्रवार के दिन पूरी श्रद्धाभाव के साथ व्रत करते हैं और उसके नियमों के पालन करते हैं तो मां की कृपा आपके जीवन में हमेशा बना रहेगी। घर में सुख- समृद्धि, धन- धान्य और सौभाग्य की कोई कमी नहीं रहती है। Read More Friday Worship Ritual: देवी लक्ष्मी और संतोषी मां की विशेष कृपा पाने के लिए शुक्रवार के दिन करें ये उपाय, भूलकर भी न करें ये काम…