शिवलिंग पर जल अर्पण के समय किन तीन पवित्र स्थानों के स्पर्श करना है अत्यंत शुभ, जानिए उसका आध्यात्मिक महत्व…

BE NEWS – हिंदू सनातन धर्म में देवों को देव महादेव को विशेष स्थान दिया गया है। उनको प्रसन्न करना बहुत ही आसान है। जिन पर उनकी कृपा हो जाए उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। कहते है शिवलिंग पर अगर एक लोटा जल भी अर्पित करने मात्र से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उनकी शिवलिंग के स्पर्श मात्र से भी हर तरह के कष्टों से निजात मिलती हैं। ऐसे में जल चढ़ाने से लेकर शिवलिंग को स्पर्श करने तक कई नियम बताए गये हैं, जिनके बारे में आपको पता होना जरुरी है।

पवित्र स्थानों को स्पर्श और उनके आध्यात्मिक महत्व

आज हम आपको बताते है कि शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर सीधे जल चढ़ाने से पहले कुछ विशेष स्थानों का स्पर्श और पूजन करना अत्यंत शुभ माना गया है। जिनके स्पर्श करने मात्र से भय, रोग और कुंडली दोषों से निजात मिलती है और जीवन व विवाह संबधी समस्याएं भी दूर हो जाती है। आइए जानते हैं उन तीन पवित्र स्थानों और उनके आध्यात्मिक महत्व के बारे में।

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शिवलिंग का आध्यात्मिक स्वरूप

शिवलिंग केवल भगवान शिव का प्रतीक नहीं है। जिसमें भगवान भोलेनाथ का पूरा परिवार वास करता है।  बल्कि इसमें माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और पुत्री अशोक सुंदरी का भी वास माना गया है। इसलिए जल अर्पण करते समय श्रद्धा और विधि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का स्थान

शिवलिंग के अग्र भाग में दाईं और बाईं ओर जो स्थान होता है, वहां भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय विराजमान माने जाते हैं। सबसे पहले इन दोनों स्थानों को अपने हाथों से स्पर्श करें। यहां जल अर्पित करें और 5 से 7 बार हल्के हाथों से दबाएं। इस दौरान शिव मंत्रों का जाप करें। ऐसा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और बच्चों से जुड़ी परेशानियां व रोग दूर होने की मान्यता है।

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दूसरा अशोक सुंदरी का स्थान

शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग के मध्य भाग, जहां से जल प्रवाहित होता है, वहां भगवान शिव की पुत्री अशोक सुंदरी का वास माना गया है। इस स्थान पर पहले बेलपत्र अर्पित करें। फिर इस स्थान को स्पर्श करते हुए जल चढ़ाएं। मन ही मन अपनी इच्छा भगवान शिव के सामने रखें। इस विधि से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मांगलिक दोष से राहत मिलती है।

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तीसरा माता पार्वती का स्थान

शिवलिंग के चारों ओर बने गोल आधार (जलहरी) में माता पार्वती का वास माना जाता है। सबसे पहले इस स्थान को श्रद्धा से स्पर्श करें। फिर यहां जल अर्पित करें। मान्यता है कि इससे शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है और गंभीर बीमारियों में भी लाभ प्राप्त होता है।

अंत में जल अर्पित करें

इन तीनों पवित्र स्थानों का स्पर्श और पूजन करने के बाद अंत में पूरे शिवलिंग पर जल अर्पित करें। ऐसा करने से पूजा संपूर्ण मानी जाती है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। Read More शिवलिंग पर जल अर्पण के समय किन तीन पवित्र स्थानों के स्पर्श करना है अत्यंत शुभ, जानिए उसका आध्यात्मिक महत्व…

IND vs NZ 3rd ODI: टीम इंडिया ने टॉस जीतकर चुनी पहले गेंदबाजी…37 साल पुराना रिकॉर्ड टूटेगा या बरकरार रहेगी भारतीय बादशाहत?

BE NEWS – भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा और आखिरी वन-डे मैच आज खेला जाना है। वहीं भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने के फैसला किया है। दोनों टीमें 1-1 की  बराबरी पर है, आज दोनों ही टीमों के लिए करो या मरो को स्थिति बनी हुई है।

तीसरा और निर्णायक मुकाबला

आपको बता दें कि इंदौर के होलकर स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला खेला जा रहा है। भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है। भारत इस मुकाबले में प्लेइंग-11 में एक बदलाव के साथ उतरा है।

अर्शदीप सिंह को मिला टीम में मौका

टीम इंडिया ने तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को अंतिम एकादश में शामिल किया है, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा को इस मैच में बेंच पर बैठना पड़ा है। कप्तान गिल ने टॉस के बाद कहा कि टीम का लक्ष्य न्यूजीलैंड को कम स्कोर पर रोकना है।

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न्यूजीलैंड की टीम में कोई बदलाव नहीं

वहीं, न्यूजीलैंड की टीम ने इस निर्णायक मुकाबले में अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया है। कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने टॉस हारने के बाद कहा कि टीम इस पिच पर लक्ष्य का पीछा करना चाहती थी, लेकिन अब बोर्ड पर बड़ा स्कोर खड़ा करने की कोशिश करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह सीरीज का आखिरी मैच है और टीम भारत में अपना हार का सिलसिला तोड़ना चाहती है।

37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने

न्यूजीलैंड की नजरें इस मुकाबले में इतिहास रचने पर टिकी हैं। कीवी टीम आज तक भारत में कोई भी वनडे सीरीज नहीं जीत पाई है। राजकोट में दूसरा वनडे जीतकर सीरीज को 1-1 से बराबर करने के बाद अब उनके पास 37 साल पुरानी भारतीय बादशाहत को तोड़ने का सुनहरा मौका है।

रोहित शर्मा की नजरें वर्ल्ड रिकॉर्ड पर

इस मुकाबले में रोहित शर्मा के पास भी इतिहास रचने का मौका है। हिटमैन को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाला बल्लेबाज बनने के लिए सिर्फ दो छक्कों की जरूरत है। फिलहाल यह रिकॉर्ड शाहिद अफरीदी के नाम है। Read More IND vs NZ 3rd ODI: टीम इंडिया ने टॉस जीतकर चुनी पहले गेंदबाजी…37 साल पुराना रिकॉर्ड टूटेगा या बरकरार रहेगी भारतीय बादशाहत?

बांग्लादेश में 24 घंटे के अंदर दो हत्याएं… अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल, इलाके में दहशत

BE NEWS – बांग्लादेश के गाजीपूर जिले में फिर एक बार मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक और हिंदू युवक की फावड़े से पीट-पीट कर हत्या कर ही गई, जो कि अपने कर्मचारी को बचाने की कोशिश कर रहा था।

हिंसक झड़प में बदली मामूली बहस

आपको बता दें कि बांग्लादेश के गाजीपुर जिले में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जहां 55 वर्षीय हिंदू मिठाई व्यवसायी लिटन चंद्र घोष की फावड़े से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना शनिवार सुबह लगभग 11 बजे बारानगर रोड स्थित लिटन की मिठाई की दुकान में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद की शुरुआत 28 वर्षीय मासूम मियां और लिटन के 17 वर्षीय कर्मचारी अनंत दास के बीच हुई मामूली बहस से हुई। बहस इतनी ज्यादा हो गई कि जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई।

इसी दौरान मासूम मियां के माता-पिता- मोहम्मद स्वपन मियां (55 वर्ष) और माजेदा खातून (45वर्ष) भी वहां पहुंचे और कर्मचारी पर हमला कर दिया। लिटन चंद्र घोष ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उन पर फावड़े से हमला कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत तीनों आरोपियों मासूम मियां, स्वपन मियां और माजेदा खातून को पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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स्थानीय समुदाय में गहरी नाराजगी

इस हत्या की खबर फैलते ही स्थानीय समुदाय में आक्रोश फैल गया। पिछले शुक्रवार को भी बांग्लादेश में एक अन्य हिंदू व्यक्ति, रिपन साहा (30), पेट्रोल पंप पर काम करते थे, की एक वाहन ने कुचलकर हत्या कर दी थी।

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 बढ़ती जा रही सांप्रदायिक हिंसा

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आता जा रहा है, अल्पसंख्यक मतदाताओं को डराने और वोटिंग से रोकने के लिए सांप्रदायिक हिंसा बढ़ रही है।

अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों पर चिंता

भारत ने भी पड़ोसी देश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों पर चिंता व्यक्त की है और आशा जताई है कि ऐसे सांप्रदायिक हिंसात्मक कृत्यों का जल्द समाधान निकाला जाएगा। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रही हाल की घटनाएं सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाती हैं। Read More बांग्लादेश में 24 घंटे के अंदर दो हत्याएं… अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल, इलाके में दहशत

Under-19 World Cup: 14 साल का वैभव सूर्यवंशी बने भारत की नई उम्मीद, बल्लेबाजी से लूट रहें महफिल

BE NEWS – अंडर-19 वर्ल्ड कप भारत के लिए हमेशा से नए क्रिकेट सितारों को गढ़ने का सबसे भरोसेमंद मंच रहा है। इसी मंच से विराट कोहली, रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा और शुभमन गिल जैसे दिग्गज निकले, जिन्होंने आगे चलकर विश्व क्रिकेट में भारत का नाम रोशन किया। अब इस टूर्नामेंट में एक नया नाम तेजी से सुर्खियों में है – वैभव सूर्यवंशी।

आपको बता दें कि अंडर-19 वर्ल्ड कप में महज 14 साल की उम्र में वैभव अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से न सिर्फ रन बना रहा है, बल्कि दर्शकों का भरपूर मनोरंजन भी कर रहा है। आलम यह है कि फैंस सिर्फ वैभव की बैटिंग देखने के लिए अंडर-19 वर्ल्ड कप को फॉलो कर रहे हैं।

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14 जनवरी से शुरू हुआ टूर्नामेंट

अंडर-19 वर्ल्ड कप का आगाज 14 जनवरी से हो चुका है और भारतीय टीम एक बार फिर मजबूत नजर आ रही है। इस टूर्नामेंट को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाता है, जहां युवा खिलाड़ी खुद को साबित कर सीनियर टीम के दरवाजे तक पहुंचते हैं।

सुर्खियों में क्यों हैं वैभव सूर्यवंशी?

इस बार टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा चर्चा जिस खिलाड़ी की हो रही है, वह हैं वैभव सूर्यवंशी। उनकी कहानी बाकी खिलाड़ियों से बिल्कुल अलग है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है उनकी उम्र। वैभव महज 14 साल और 294 दिन की उम्र में अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने उतरे हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। आमतौर पर भारत में खिलाड़ी 17से18 साल की उम्र में इस स्तर तक पहुंचते हैं। इतनी कम उम्र में इतने बड़े मंच पर निडर होकर बल्लेबाजी करना वैभव को खास बनाता है। उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है।

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क्या दोबारा इस टूर्नामेंट में हिस्सा

यह सवाल हर क्रिकेट फैन के मन में है कि इतनी कम उम्र में खेलने वाले वैभव क्या आगे चलकर दोबारा अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल पाएंगे? लेकिन यहां एक अहम नियम सामने आता है। बीसीसीआई ने 2016 में यह स्पष्ट किया था कि कोई भी खिलाड़ी अंडर-19 वर्ल्ड कप एक बार खेलने के बाद दोबारा इस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकता, चाहे उसकी उम्र तय सीमा से कम ही क्यों न हो।

पहले भी दो बार खेल चुके हैं ये खिलाड़ी

हालांकि बीसीसीआई के इस नियम से पहले कई भारतीय खिलाड़ी दो-दो बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल चुके हैं, जिनमें शामिल हैं- रवींद्र जडेजा – 2006 और 2008, विजय जोल – 2012 और 2014, आवेश खान, सरफराज खान और रिकी भुई – 2014 और 2016। Read More Under-19 World Cup: 14 साल का वैभव सूर्यवंशी बने भारत की नई उम्मीद, बल्लेबाजी से लूट रहें महफिल

BMC Election Result 2026: मुंबई BMC चुनाव में BJP की बंपर जीत, शिवसेना UBT पीछे, जानें क्या हैं अब तक के रुझान…

BE NEWS – मुंबई में बीएमसी क्षेत्र के 227 वार्डों में चुनाव कल संपन्न हो चुके है, जिसकी मतगणना आज सुबह 10 बजे से जारी है। प्रत्येक सेंटर के लिए इलेक्शन डिसीजन ऑफिसर नियुक्त थे, जिनके अधीन एक-एक स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग सेंटर बनाए गए थे।

चुनाव की मतगणना आज सुबह से जारी

आपको बता दें कि मुंबई में बृहन्मुंबई में महा- नगरपालिका क्षेत्र के 227 वार्डो में हुए चुनाव की मतगणना आज सुबह 10 बजे से जारी है। इन चुनाव में भाजपा ने 137 सीटों व शिव सेना 90 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे है। उधर शिवसेना UBT (महायुति) ने राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ गठबंधन किया है। UBT ने 163 सीटों पर जबकि MNS ने 52 सीटों पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन किया है। कांग्रेस 143 सीटों पर और VBA 46 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। एनसीपी (अजित पवार गुट) ने किसी भी दल से गठबंधन नहीं किया और 94 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

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अब तक के प्रमुख रुझान
  • BJP गठबंधन: 118 सीटें

  • शिवसेना UBT: 70 सीटें

  • कांग्रेस: 12 सीटें

  • अन्य दल: 5 सीटें

  • AIMIM: 4 सीटें

इस प्रकार पहली बार BMC में BJP को पूर्ण बहुमत मिला है, जबकि ठाकरे बंधु केवल 70 सीटों पर सिमट गए।

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शुरुआती रुझान भाजपा गठबंधन आगे

रुझानों के अनुसार, भाजपा गठबंधन (महायुति) ने स्पष्ट बढ़त बनाई है। जैसे-जैसे काउंटिंग पूरी हो रही है, बीजेपी गठबंधन 118 सीटों पर आगे है, जबकि शिवसेना UBT केवल 70 सीटों पर सीमित रह गई है। कांग्रेस गठबंधन 12 सीटों पर और अन्य दलों ने 5 सीटों पर बढ़त बनाई है। कुल मिलाकर 208 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं।

पिछला चुनाव और तुलना

2017 के BMC चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, जबकि बीजेपी को 82 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने 31, एनसीपी ने 9 और अन्य पार्टियों को कम सीटें मिली थीं। 2026 में भाजपा गठबंधन की जीत से शहर की सत्ता का समीकरण बदल गया है।

UBT और MVA के लिए अहम चुनाव

BMC चुनाव सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता का प्रतीक भी माना जाता है। 74,000 करोड़ रुपये के बजट वाली मुंबई नगर निगम पर कब्जा राजनीतिक प्रतिष्ठा का मुद्दा है। भाजपा और शिवसेना, कांग्रेस और VBA, एनसीपी और अन्य दलों के बीच यह चुनाव सियासी ताकत की परीक्षा रहा। Read More BMC Election Result 2026: मुंबई BMC चुनाव में BJP की बंपर जीत, शिवसेना UBT पीछे, जानें क्या हैं अब तक के रुझान…

VasantPanchami2026: बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनने की परंपरा क्यों है खास? जानिए इसके पाछे के धार्मिक, वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण…

BE NEWS – बसंत पंचमी का त्योहार मां सरस्वती की पूजा को समर्पित होता है। इस दिन सभी लोग देवी मां की आराधना  करते है। परम्परा के अनुसार इस दिन पर पीले वस्त्र पहने जाते है, पीले रंग के प्रसाद का मां को भोग लगाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि इस त्योहार पर पीले रंग का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

बता दें बसंत पंचमी को श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है और इसी दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी कहा जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे केवल एक रिवाज नहीं बल्कि प्रकृति, अध्यात्म और विज्ञान से जुड़ा हुआ माना जाता है। आइए जानते हैं कि बसंत पंचमी पर पीला रंग पहनने के पीछे क्या कारण हैं।

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1. पीला रंग और बसंत ऋतु का गहरा संबंध

बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ कहा गया है क्योंकि यह मौसम खुशहाली, नई शुरुआत और सौंदर्य का प्रतीक होता है। इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल लहराने लगते हैं, जो प्रकृति में चारों ओर फैली हरियाली और बसंत ऋतु की पहचान बन जाती है। इसी वजह से बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनना प्रकृति के रंगों के साथ जुड़ने और ऋतु के स्वागत का प्रतीक माना जाता है।

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2. मां सरस्वती को प्रिय है पीला रंग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती को सफेद और पीला रंग अत्यंत प्रिय है। शास्त्रों और चित्रों में देवी को अक्सर हल्के या पीले वस्त्रों में दर्शाया गया है, जो ज्ञान, शांति, सादगी और बुद्धि का प्रतीक हैं।

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3. पीला रंग देता है सकारात्मक ऊर्जा

रंगों का मन और शरीर पर सीधा प्रभाव पड़ता है। पीला रंग ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। यह मस्तिष्क को सक्रिय करता है और मन को प्रसन्न रखता है। इसलिए पीला रंग एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। इसके साथ पीला रंग पित्त दोष को संतुलित करता है। ये शरीर में गर्माहट और ऊर्जा बनाए रखता है। इसके साथ- साथ सर्दियों के बाद बदलते मौसम में यह रंग शरीर के लिए लाभकारी होता है।

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4. पीले भोजन का विशेष महत्व

इस दिन केवल पीले कपड़े ही नहीं, बल्कि पीले रंग के भोजन बनाने की भी परंपरा है, जैसे- मीठे चावल, केसरिया हलवा, खिचड़ी और सरसों का साग। पीले रंग भोजन शरीर को ऊर्जा और गर्माहट देते हैं, जो मौसम बदलने के समय उपयोगी होते हैं। साथ ही इन्हें समृद्धि और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है।

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बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति, अध्यात्म, ऊर्जा और स्वास्थ्य का सुंदर मेल है। इसी कारण इस शुभ दिन पीले वस्त्र धारण करना पवित्र, मंगलकारी और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। Read More VasantPanchami2026: बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनने की परंपरा क्यों है खास? जानिए इसके पाछे के धार्मिक, वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण…

Amla Murabba: बिना चीनी-गुड़ के घर पर बनाएं आंवले का मुरब्बा, सर्दियों में इसको खाने हैं कई फायदे, जानिए इसे बनाने की रेसिपी…

BE NEWS – आंवला को आयुर्वेद में अमृत के समान माना गया है। विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और इम्युनिटी बढ़ाने वाले गुणों से भरपूर आंवला खासतौर पर सर्दियों में शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। आमतौर पर लोग आंवले का सेवन जूस, चटनी या मुरब्बे के रूप में करते हैं।

दरअसल पारंपरिक मुरब्बे में चीनी या गुड़ की अधिक मात्रा होने के कारण डायबिटीज के मरीज इससे दूरी बना लेते हैं। अच्छी बात यह है कि अब आंवले का मुरब्बा बिना चीनी और बिना गुड़ भी आसानी से बनाया जा सकता है, वो भी घर पर। स्वाद में खट्टा-मीठा और सेहत में भरपूर यह मुरब्बा लंबे समय तक स्टोर भी किया जा सकता है। आईये जानें इसे बनाने की आसान सी रेसिपी…

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आंवले का मुरब्बा खाने के फायदे,- Amla muraba khane ke fayde ...

बिना चीनी-गुड़ का आंवला मुरब्बा बनाने की सामग्री
  1. ताजे आंवले
  2. मिश्री
  3. छोटी इलायची
  4. सोंठ पाउडर
  5. दालचीनी
  6. काला नमक
  7. पानी
मुरब्बा बनाने की आसान विधि-

फॉलो स्टेप – सबसे पहले आंवले को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब एक कांटे की मदद से आंवले में चारों ओर गहरे छेद कर दें, ताकि चाशनी अंदर तक जा सके। अब एक बर्तन में पानी गर्म करें और उसके ऊपर छलनी रखकर आंवले डालें। इन्हें 5–7 मिनट तक भाप में पकाएं। ध्यान रखें कि आंवले बहुत ज्यादा नरम न हों, बस हल्का सा रंग बदलना चाहिए। अब एक भारी तले की कड़ाही लें। उसमें उबले हुए आंवले और पिसी हुई मिश्री डालें। इसमें अतिरिक्त पानी न डालें। धीमी आंच पर लगातार चलाते रहें। मुरब्बे को तब तक पकाएं जब तक चाशनी शहद जैसी गाढ़ी न हो जाए और आंवले का रंग हल्का सुनहरा दिखाई देने लगे। अंत में इलायची पाउडर, सोंठ, दालचीनी और स्वादानुसार काला नमक डालें। गैस बंद कर दें और मुरब्बा ठंडा होने दें। इसके बाद इसे एयर-टाइट कंटेनर में भरकर स्टोर करें।

आंवले का मुरब्बा । Amla ka murabba recipe in Hindi

क्यों खास है यह मुरब्बा

इस आंवले के मुरब्बे डायबिटीज के मरीज भी सीमित मात्रा में ले सकते हैं, ये इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है। पाचन और बालों की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। ये खराब नहीं होता, इसको लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है। Read More Amla Murabba: बिना चीनी-गुड़ के घर पर बनाएं आंवले का मुरब्बा, सर्दियों में इसको खाने हैं कई फायदे, जानिए इसे बनाने की रेसिपी…

Bangladesh: बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने शिक्षक के घर में लगाई आग, हिंदू परिवारों पर बढ़ रही घटनाओं पर आखिर क्यों चुप है युनूस सरकार…

BE NEWS – बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा और अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक बार फिर से हिंदु परिवार पर निशाना बनाया गया है, जिसके चलते कट्टरपंथियों ने उनके घर को आग के हवाले कर दिया।

फिर एक हिंदू परिवार पर हमला

आपको बता दें कि बांग्लादेश में हिंदू परिवारों पर हो रहे अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर हिंदू समुदाय के लोगों निशाना बनाया गया है। यह मामला सिलहट जिले के गोवाईघाट इलाके का है, जहां नंदिरगांव संघ के बहोर गांव में रह रहे फिर एक हिंदू परिवार पर हमला हुआ है। बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों की इस करतूत का वीडियो भी सामने आया है।

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बांग्लादेश में मोदी दौरे के बाद कट्टरपंथियों ने हिंदू मंदिरों को बनाया ...

अपनी जान बचाने के लिए घर से भागे लोग

आरोप है कि इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंदू शिक्षक बीरेंद्र कुमार डे के घर में आग लगा दी। वीडियो में देखा सकते है कि आग पूरे घर में तेजी से फैलने लगी, जिसके कारण परिवार के लोग अपनी जान बचाने के लिए घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। वही देखते ही देखते पुरा घर जलकर राख हो गया। इस हमले में बीरेंद्र कुमार डे की संपत्ति को भारी नुकसान हुआ पर परिवार में किसी को कोई  है।

100 से ज्यादा लोगों की मौत का रिकार्ड दर्ज

ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज यानी (HRCBM)ने बांग्लादेश में हिंदू समुदायों पर हो रही हिंसा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि वह लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।(HRCBM)के मुताबिक
पिछले सात महीनों में हिंदू समुदाय के 100 से ज्यादा लोगों की मौत का रिकार्ड दर्ज किया गया है।

हिंदूओं को निशाना बनाने की साजिश

रिपोर्ट में बताया गया है कि 6 जून 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच बांग्लादेश के सभी 8 डिवीजनों और कम से कम 45 जिलों में 116 अल्पसंख्यकों की मौत हो चुकी है। इन हुई मौतों में लिंचिंग, हत्या और संदिग्ध हालात में हुई मौतें शामिल हैं। HRCBM का साफ कहना है कि पूरे देश में हिंदूओं को निशाना बनाकर की जा रही एक सोची समझी चाल है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा खतरे में है…और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर कोई ठोस कदम उठाता नहीं दिख रहा। इस पूरे प्रकरण में आखिर युनूस सरकार क्यों चुप है। Read More Bangladesh: बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने शिक्षक के घर में लगाई आग, हिंदू परिवारों पर बढ़ रही घटनाओं पर आखिर क्यों चुप है युनूस सरकार…

Skincare: व्हाइटहेड्स या ब्लैकहेड्स की प्रॉब्लम से कैसे पाएं छुटकारा? अपनाएं ये आसान घरेलू नुस्खे जो तुरंत करेंगे असर

BE NEWS – आज के टाइम पर स्किन की समस्या होना बहुत ही आम बात हो गई है। जिसमें से सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है व्हाइटहेड्स या ब्लैकहेड्स की प्रॉब्लम चेहरे की खूबसूरती को बहुत ही ज्यादा इफेक्ट करती हैं और आपकी त्वचा की चमक को फीका कर देते हैं। ये तब बनते हैं जब त्वचा के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं, पर कुछ आसान घरेलू नुस्खों की मदद से आप व्हाइटहेड्स या ब्लैकहेड्स से छुटकारा पा सकते हैं।

1. टी ट्री ऑयल में एंटी-बैक्टीरियल गुण

दरअसल टी ट्री ऑयल में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुंहासों और व्हाइटहेड्स को कम करने में मदद करते हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए रुई की मदद से थोड़ा सा तेल सीधे प्रभावित जगह पर लगाएं। यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो इसे नारियल तेल के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें।

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2. त्वचा को साफ और मुलायम बनाये शहद

दूसरा उपाय है शहद, जो  न केवल एंटी-बैक्टीरियल होता है बल्कि त्वचा को नमी भी देता है। हल्का गुनगुना शहद प्रभावित जगह पर 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें। यह त्वचा को साफ और मुलायम बनाता है।

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3. बेकिंग सोडा एक नेचुरल एक्सफोलिएटर

व्हाइटहेड्स या ब्लैकहेड्स की प्रॉब्लम के लिए तीसरा असरदार उपाय है बेकिंग सोडा। जो एक नेचुरल एक्सफोलिएटर है जो त्वचा की गंदगी और डेड सेल्स को हटाने में मदद करता है। 1 चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे प्रभावित जगह पर 2-3 मिनट लगाएं। फिर ठंडे पानी से धो लें। ध्यान दें, इसे हफ्ते में एक बार से ज्यादा इस्तेमाल न करें क्योंकि यह त्वचा को रूखा कर सकता है।

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4. डेड स्किन सेल्स को हटाने में मददगार ओटमील स्क्रब

ओटमील स्क्रब डेड स्किन सेल्स को हटाने में मदद करता है और त्वचा को सॉफ्ट बनाता है। इसके लिए पिसे हुए ओट्स को दही के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं। हल्के हाथों से 4-5 मिनट तक मसाज करें और फिर धो लें।

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इन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप व्हाइटहेड्स या ब्लैकहेड्स से छुटकारा पा सकते हैं और अपने चेहरे को बेदाग, खूबसूरत और दमकता हुआ बना सकते हैं। Read More Skincare: व्हाइटहेड्स या ब्लैकहेड्स की प्रॉब्लम से कैसे पाएं छुटकारा? अपनाएं ये आसान घरेलू नुस्खे जो तुरंत करेंगे असर

ईरान में हिंसा को लेकर भारत की बढ़ती ही जा रही चिंता, भारतीयों नागरिकों की वापसी के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार

BE NEWS – ईरान में चल रही उथल- पुथल के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदर्शनकारियों के बढ़ते प्रदर्शन के कारण वहां पर फंसे हुए भारतीयों को सरकार जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है।

पहला जत्था कल हो सकता रवाना

आपको बता दें कि ईरान में फैली हिंसा के कारण भारत सरकार की चिंता अब बढ़ती ही जा रही है। जिसको लेकर अब भारत सरकार ने वहां रह रहे भारतीयों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मिला जानकारी के अनुसार वहां फंसे लोगों के निकालने के लिए पहला जत्था कल ही रवाना हो सकता है। जिसके लिए भारतीय दूतावास ने अलग- अलग इलाकों में रह रहे भारतीय छात्रों से संपर्क करना भी शुरु कर दिया है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कौन- कौन ईरान को छोड़ना चाहता है। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं के बंद होने व फोन के काम न करने के कारण लोगों से मिलकर भी संपर्क किया जा रहा है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की पूरी तैयारी है, ताकि भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लौटाया जा सके।

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ईरान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम ...

कब और कैसे शुरू हुए विरोध प्रदर्शन

ईरान में यह अशांति पिछले महीने के अंत में ईरानी रियाल की भारी गिरावट के बाद शुरू हुई थी। धीरे-धीरे यह विरोध प्रदर्शन देश के सभी 31 प्रांतों में फैल गए और अब बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 3,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हाल के दिनों में हालात और बिगड़े हैं।

10 हजार से ज्यादा भारतीय ईरान में मौजूद

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, छात्रों सहित करीब 10,000 से अधिक भारतीय नागरिक फिलहाल ईरान में रह रहे हैं। भारत सरकार ने बुधवार को वहां मौजूद सभी भारतीयों को सलाह दी कि वे उपलब्ध साधनों के जरिए देश छोड़ें और ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचें।

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भारतीय दूतावास द्वारा जारी की एडवाइजरी

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी एडवाइजरी में छात्रों, तीर्थयात्रियों, कारोबारियों और पर्यटकों से कमर्शियल फ्लाइट्स या अन्य उपलब्ध परिवहन विकल्पों का उपयोग कर ईरान छोड़ने की अपील की गई है। एडवाइजरी में कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक अपने पासपोर्ट, पहचान पत्र और अन्य यात्रा दस्तावेज तैयार रखें। इसके साथ ही किसी भी तरह की सहायता के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क में रहने को कहा गया है। दूतावास ने यह भी दोहराया है कि भारतीय नागरिक पूरी सावधानी बरतें, प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहें, स्थानीय मीडिया पर नजर बनाए रखें और किसी भी नए घटनाक्रम की जानकारी दूतावास के साथ साझा करें। Read More ईरान में हिंसा को लेकर भारत की बढ़ती ही जा रही चिंता, भारतीयों नागरिकों की वापसी के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार