तीन बार बांग्लादेश की पीएम रहीं खालिदा जिया का कैसा रहा राजनैतिक सफर, पति की हत्या के बाद रखा था राजनीति में कदम..

BE NEWS – बांग्लादेश की राजनीति की दिग्गज नेता और तीन बार देश की प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया का 30 दिसंबर दिन मंगलवार को 80 वर्ष की आयु में ढाका के एवर केयर अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह लंबे समय से किडनी, लिवर सिरोसिस, हृदय रोग व कई अन्य बीमारियों से जुझ रही थीं। वे न केवल बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि दक्षिण एशिया की चुनिंदा महिलाओं में शामिल रहीं।

2018 में भ्रष्टाचार के मामलों में मिली थी सजा

आपको बता दें कि खालिदा जिया 2018 में भ्रष्टाचार के मामलों में सजा के चलते लंबे समय तक जेल में रहीं। अगस्त 2024 में, जब शेख हसीना की सरकार का पतन हुआ, तब उन्हें जेल से रिहा किया गया। उस समय उनकी सेहत लगातार खराब चल रही थी। इलाज के लिए वे जनवरी 2025 में लंदन गईं। जहां कुछ महीनों तक उपचार के बाद उनकी तबियत में सुधार हुआ और मई 2025 में वे वापस बांग्लादेश लौट आईं। हालांकि नवंबर 2025 में उनकी हालत अचानक बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डॉक्टरों ने विदेश ले जाने की सलाह दी, लेकिन अधिक जोखिम के कारण परिजनों ने उन्हें देश में ही रखने का फैसला किया।

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आम चुनाव के लिए नामांकन

अपने स्वास्थ्य के बावजूद खालिदा जिया राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं हुई थीं। उन्होंने हाल ही में आम चुनाव के लिए नामांकन भी भरा था। लेकिन नामांकन के अगले ही दिन, फज्र की नमाज के बाद उनका निधन हो गया, जिससे देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई।

परिवार और राजनीतिक विरासत

खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत अब अगली पीढ़ी को सौंपे जाने की कगार पर है। उनके बेटे तारिक रहमान ने 17 साल बाद विदेश से लौटकर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कमान संभाली है। वहीं उनकी पोती जायमा रहमान भी राजनीति में आने की तैयारी कर रही हैं।

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 तीन बार बनीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री

खालिदा जिया BNP की अध्यक्ष रहीं और तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। पहली बार मार्च 1991 से फरवरी 1996 तक दूसरी बार 1996 में कुछ हफ्तों के लिए, इसके बाद तीसरी बार अक्टूबर 2001 से अक्टूबर 2006 पीएम बनीं। वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और मुस्लिम देशों में पाकिस्तान की बेनजीर भुट्टो के बाद दूसरी महिला प्रधानमंत्री का दर्जा मिला।

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निजी जीवन से राजनीति तक सफर

खालिदा जिया बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को हुआ था। उनके पति जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे, जिनकी 1981 में हत्या कर दी गई थी। पति की मौत के बाद ही खालिदा जिया ने राजनीति में कदम रखा और उनकी पार्टी की बागडोर संभाली। इसके बाद उन्होंने दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाई। खालिदा जिया का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। Read More तीन बार बांग्लादेश की पीएम रहीं खालिदा जिया का कैसा रहा राजनैतिक सफर, पति की हत्या के बाद रखा था राजनीति में कदम..

बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन, पीएम मोदी ने शोक व्यक्त कर 2015 में हुई मुलाकात को किया याद

BE NEWS – बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालीदा जिया की 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रही थी। 30 दिसंबर को सुबह 6 बजे ढाका के एवर केयर अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उसके निधन पर पीएम मोदी ने शोक व्यक्त किया है।

बीएनपी के लिए एक बड़ा झटका

आपको बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का 30 दिसंबर दिन मंगलवार को 80 वर्ष की आयु में ढाका के एवर केयर अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह लंबे समय से किडनी, लिवर सिरोसिस, हृदय रोग व कई अन्य बीमारियों से जुझ रही थीं। उनको 23 नवंबर को सांस लेने की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आज सुबह इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। चुनाव के ठीक पहले उनका जाना बीएनपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके निधन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है। इस दौरान उन्होंने उनके साथ 2015 में हुई मुलाकात को याद किया।

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Khaleda Zia | Biography & Facts | Britannica

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर किया पोस्ट

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि, “पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के ढाका में निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। हम उनकी परिवार और बांग्लादेश के सभी लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं प्रकट करते हैं। ईश्वर उनके परिवार को इस दुखद नुकसान को सहने की शक्ति प्रदान करें।”

उनके महत्वपूर्ण योगदान को किया याद 
आगे उन्होंने कहा कि, “बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में, बांग्लादेश के विकास और भारत-बांग्लादेश संबंधों में उनके महत्वपूर्ण योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। मुझे 2015 में ढाका में उनसे हुई मेरी भेंट याद है। हमें उम्मीद है कि उनका दृष्टिकोण और विरासत हमारे सहयोग का मार्गदर्शन करती रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।”
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BE NEWS – भारत और बांग्लादेश के संबंध इस समय बहुत ही खराब दौर से गुजर रहे हैं। अल्पसंख्यकों के खिलाफ बांग्लादेश में हो रहे अत्याचार और हिंसा के लेकर अब भारत में भी लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया दी रहा है।

चटगांव में भारतीय मिशन सेवा बंद

आपको बता दें कि शेख हसीना को सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही भारत और बांग्लादेश के संबंध बहुत ही बुरे हालात से गुजर रहे हैं। वहीं बीते दिनों भारत विरोधी और शेख हसीना विरोधी कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद से ये हालात और भी ज्यादा खराब हो चुके हैं। जिसको देखते हुए भारत ने चटगांव में भारतीय मिशन सेवाओं को बंद करने का फैसला लिया था। वहीं अब बदले की भावना से बांग्लादेश ने भी भारत में वीजा सेवाओं को बंद करने का ऐलान कर दिया है।

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कट्टरपंथियों को भारत के खिलाफ विरोध

कट्टरपंथियों ने आरोप लगाया है कि उस्मान हादी के हत्यारे भाग कर भारत चले गए और वहां छिपे हुए हैं। हालाकिं इसका कोई भी सबूत नहीं है। भारत ने भी इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। लेकिन कट्टरपंथियों को भारत के खिलाफ विरोध का एक मौका मिल गया है। जिसके बाद भारतीय अधिकारियों की सुरक्षा को देखते हुए चटगांव में भारतीय मिशन सेवाओं को बंद कर दिया गया।

अल्पसंख्यक हिंदुओं को बनाया जा रहा निशाना 

उस्मान हादी की हत्या किए जाने के बाद बांग्लादेश में अब अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। बीते दिनों मयनलसिंह इलाके में एक हिंदू युवक की पीट- पीट कर हत्या कर दी गयी और उसके शव को पेड़ से लटका कर जिंदा जला दिया गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद दुनियाभर में इसकी निंदा हो रही है। जिसके बाद भारत सरकार ने भी अल्पसंख्यक भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

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देशव्यापी अभियान छेड़ने की चेतावनी

बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। हादी के संगठन इंकलाब मोर्चा ने अंतरिम सरकार को खुली चेतावनी दी है कि यदि हत्यारों को जल्द न्याय के कटघरे में नहीं लाया गया, तो वे सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए देशव्यापी अभियान छेड़ेंगे। संगठन ने मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई और इसमें शेख हसीना की पार्टी की कथित संलिप्तता की जांच की मांग की है।

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अल्पसंख्यकों पर हिंसा से भड़का आक्रोश

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा और एक हिंदू युवक की कथित मॉब लिंचिंग ने सीमा पार भी गुस्सा भड़का दिया है। भारत के कई शहरों जैसे- दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, सूरत और पटना में प्रदर्शन हुए, जहां बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खिलाफ नारेबाजी और पुतला दहन किया गया। विश्व हिंदू परिषद ने बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया, जिसके मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। Read More Bangladesh: भारत–बांग्लादेश रिश्तों में दरार, अल्पसंख्यकों पर हिंसा से भड़का भारत, सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी