Union Budget 2026: निर्मला सीतारमण का 9वां बजट, क्या बदलेगा आम आदमी की किस्मत?

Union Budget 2026: अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ के जवाब में केंद्र सरकार ने Union Budget 2026 के ज़रिये बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पर्सनल इस्तेमाल के लिए इम्पोर्ट किए जाने वाले सभी ड्यूटी वाले सामानों पर टैरिफ रेट को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इस फैसले से आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ इम्पोर्ट पर निर्भर सेक्टर्स को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

Nirmala Sitharaman's Union Budget 2026
Nirmala Sitharaman’s Union Budget 2026
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवां बजट

आपको बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज 1 फरवरी, दिन रविवार को अपना लगातार नौवां बजट (Union Budget 2026) पेश किया हैं। एनडीए सरकार के तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद यह दूसरा पूर्ण बजट होगा, जिससे उम्मीदें भी पहले से कहीं ज्यादा हैं। जिसमें सरकार का फोकस खास तौर पर उन उद्योगों को सपोर्ट करने पर है जो अमेरिकी टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसी कड़ी में सी-फूड इंडस्ट्री को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने एक्सपोर्ट के लिए सी-फूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले खास इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की सीमा को बढ़ाने का ऐलान किया। अब यह सीमा पिछले वर्ष के एक्सपोर्ट टर्नओवर की FOB वैल्यू के 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दी गई है।

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Union Budget 2026
फुटवियर और लेदर सेक्टर को भी फायदा

वित्त मंत्री ने Union Budget 2026 यह भी प्रस्ताव दिया कि जिन खास इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की सुविधा अभी लेदर और सिंथेटिक फुटवियर एक्सपोर्ट के लिए उपलब्ध है, वही सुविधा अब शू अपर एक्सपोर्ट करने वालों को भी दी जाएगी। इससे फुटवियर इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

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Finance Minister Nirmala Sitharaman presents the 'Union Budget 2
Finance Minister Nirmala Sitharaman presents the ‘Union Budget 2
रक्षा, बैटरी और एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा

Union Budget 2026 में रक्षा क्षेत्र को मजबूती देने के उद्देश्य से एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) के लिए जरूरी पार्ट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के इम्पोर्ट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा, लिथियम-आयन बैटरी सेक्टर को बढ़ावा देते हुए सरकार ने बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लिथियम-आयन सेल और जरूरी मिनरल्स के लिए कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट देने की घोषणा की है। यह छूट अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स तक भी बढ़ाई जाएगी।

न्यूक्लियर और सोलर सेक्टर को राहत

न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी सामानों के इम्पोर्ट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट को 2035 तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है, जो सभी न्यूक्लियर प्लांट्स पर लागू होगा, चाहे उनकी क्षमता कुछ भी हो। वहीं, सोलर ग्लास निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट और क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग से जुड़े कैपिटल गुड्स के इम्पोर्ट को भी ड्यूटी-फ्री करने का प्रस्ताव है।

US टैरिफ का सीधा असर

गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों के इम्पोर्ट पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जिससे टेक्सटाइल, सी-फूड और अन्य एक्सपोर्ट सेक्टर्स पर दबाव बढ़ गया था। Union Budget 2026 में किए गए ये ऐलान उसी चुनौती से निपटने की रणनीति के तौर पर देखे जा रहे हैं।

इसके साथ ही सरकार ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित करने में मदद देने का भी प्रस्ताव रखा है, जिससे भारत की क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन मजबूत हो सके। Read More Union Budget 2026: निर्मला सीतारमण का 9वां बजट, क्या बदलेगा आम आदमी की किस्मत?

America-European Union Tariff War: अमेरिका-यूरोपीय संघ टैरिफ जंग के बीच भारत को मिला नया साझेदार, FTA से निर्यात को मिलेगी रफ्तार

America-European Union Tariff War – अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव में अब एक उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। टैरिफ वॉर के बीच भारत को यूरोपीय संघ का समर्थन मिला है, जिससे भारत को बड़ा फायदा मिल सकता है।

भारत के लिए एक बड़ा अवसर

दरअसल बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच भारत के लिए एक बड़ा अवसर उभरता नजर आ रहा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव, खासतौर पर आयात शुल्क को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता, भारत के लिए रणनीतिक लाभ का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत – यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अंतिम रूप ले लेता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ से होने वाले संभावित नुकसान से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

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भारत के लिए हो सकता बड़ा झटका 

हालिया विश्लेषण के मुताबिक भारत अमेरिका को हर साल करीब 79.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है। यदि अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर सख्त टैरिफ लगाए जाते हैं, तो यह भारत के लिए बड़ा झटका हो सकता है। हालांकि, इसी चुनौती के बीच एक मजबूत विकल्प भी सामने है। अनुमान है कि भारत अपने अमेरिकी निर्यात का लगभग 84% हिस्सा, यानी करीब 67.2 अरब डॉलर मूल्य का सामान, यूरोपीय बाजारों की ओर मोड़ सकता है, बशर्ते यूरोपीय संघ के साथ FTA लागू हो जाए।

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भारत को यूरोपीय संघ का समर्थन
वैश्विक व्यापार माहौल में बढ़ा तनाव 

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यूरोपीय देशों पर आयात शुल्क लगाने की घोषणाओं ने वैश्विक व्यापार माहौल में तनाव बढ़ा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत और EU के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। यह समझौता न केवल टैरिफ से होने वाले नुकसान को कम करेगा, बल्कि भारतीय उत्पादों को यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि EU बाजार में भारत के लिए टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स और आईटी सेवाओं जैसी कई श्रेणियों में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। इसके अलावा, निर्यात का विविधीकरण भारत को किसी एक देश या बाजार पर अत्यधिक निर्भरता से भी बचाएगा।

व्यापारिक रणनीति को नए सिरे से गढ़ने का मौका

कुल मिलाकर, ‘टैरिफ वॉर’ के इस दौर में भारत के पास अपनी व्यापारिक रणनीति को नए सिरे से गढ़ने का मौका है। यदि भारत–EU FTA समय पर और अनुकूल शर्तों के साथ लागू होता है, तो यह न सिर्फ अमेरिकी टैरिफ के असर को संतुलित करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में भी स्थापित करेगा। Read More America-European Union Tariff War: अमेरिका-यूरोपीय संघ टैरिफ जंग के बीच भारत को मिला नया साझेदार, FTA से निर्यात को मिलेगी रफ्तार