Ajit Pawar: बारामती के ‘दादा’ से महाराष्ट्र के ‘अजेय’ राजनेता तक का सफर, जानें अजित पवार के जीवन से जुड़े 6 बड़े मोड़

Ajit Pawar – अजित पवार एक ऐसा नेता जिसकी प्रशासनिक पकड़ का लोहा उनके विरोधी भी मानते थे, बारामती से लेकर मुंबई तक, उनके एक इशारे पर फैसले लिए जाते थे। समर्थकों के लिए वे ‘दादा’ थे। तेज जुबान, उससे भी तेज राजनीतिक सूझबूझ और हर वक्त आगे निकलने की बेचैनी- अजित पवार (Ajit Pawar) महाराष्ट्र की राजनीति के उन नेताओं में थे, जिनकी मौजूदगी मात्र से सत्ता के समीकरण बदल जाया करते थे। शीर्ष पद की चाह उन्होंने कभी नहीं छोड़ी, लेकिन विडंबना यह रही कि मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे हमेशा बस एक कदम दूर ही रही।

Ajit Pawar Plane Crash
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महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक काला दिन

आज महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक काला दिन है। बारामती के लाडले और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) अब हमारे बीच नहीं रहे। एक दर्दनाक विमान हादसे ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है। अभी कुछ ही देर पहले उन्हें काटेवाडी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई है।

बुधवार सुबह बारामती के पास हुए एक विमान हादसे में अजित पवार का असमय निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे। अपने गृह नगर बारामती जा रहे अजित पवार (Ajit Pawar) स्थानीय चुनावों के प्रचार में जुटने वाले थे, लेकिन लैंडिंग के दौरान हुए हादसे ने उनकी जीवन यात्रा को अचानक विराम दे दिया। विमान में सवार उनके दो कर्मचारी और चालक दल के दो सदस्यों समेत सभी पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे के कारणों की जांच जारी है। अजित पवार (Ajit Pawar) का राजनीतिक जीवन एक ऐसी कहानी है, जो सत्ता, संघर्ष, महत्वाकांक्षा और अधूरे सपनों से बुनी गई है।

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Ajit Pawar Funeral
Ajit Pawar Funeral
1. 1982, राजनीति के आंगन में पहला कदम

अजित पवार (Ajit Pawar) की राजनीति किसी टीवी डिबेट या सोशल मीडिया मंच से नहीं निकली, बल्कि महाराष्ट्र के सबसे मजबूत सत्ता केंद्र – चीनी मिलों और सहकारी संस्थाओं के नेटवर्क से आकार ली। 22 जुलाई 1959 को आशा और अनंतराव पवार के घर जन्मे अजित पवार ने 1982 में राजनीति में कदम रखा। अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में वे एक चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए।

बारामती उनके लिए सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं था, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक किला था। यहां से उन्हें वह जनाधार और संगठनात्मक ताकत मिली, जिसने आगे चलकर उन्हें राज्य की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बना दिया। उनका उभार संयोग नहीं, बल्कि रणनीति और जमीनी पकड़ का नतीजा था।

The beginning of politics, the first step taken in 1982
The beginning of politics, the first step taken in 1982
2. छह बार उपमुख्यमंत्री, ‘कर्मठ प्रशासक’ की पहचान

अजित पवार (Ajit Pawar) ने रिकॉर्ड छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। बदलते गठबंधनों और अस्थिर राजनीतिक दौर के बीच वे सत्ता में बने रहे। समय के पाबंद, काम के प्रति कठोर और फैसलों में निर्णायक-ऐसी छवि उन्होंने बनाई, जो महाराष्ट्र की सुस्त नौकरशाही में अलग नजर आती थी।

वित्त और योजना जैसे अहम विभागों पर उनकी मजबूत पकड़ थी। यहां तक कि उनके राजनीतिक विरोधी भी मानते थे कि प्रशासन को कैसे चलाया जाता है, इसकी उन्हें गहरी समझ थी। कहा जा रहा था कि वे जल्द ही महाराष्ट्र का 2026–27 का बजट पेश करने वाले थे-लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

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Ajit Pawar's political journey
Ajit Pawar’s political journey
3. विवादों से घिरे, लेकिन कभी टूटे नहीं

अजित पवार (Ajit Pawar) जितने प्रभावशाली थे, उतने ही विवादास्पद भी। सिंचाई घोटाले के आरोप हों या बेटे पार्थ पवार से जुड़े भूमि सौदे-विवाद उनके राजनीतिक जीवन का स्थायी हिस्सा रहे। आलोचक उन्हें सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने वाला नेता कहते थे, जबकि समर्थक उन्हें मजबूत और निर्णायक मानते थे।

2013 में इंदापुर की एक सभा में सूखे पर की गई उनकी टिप्पणी ने बड़ा बवाल खड़ा किया और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। यह घटना उनके व्यक्तित्व के दोनों पहलुओं को दिखाती है – बेबाक और राजनीतिक रूप से चतुर, लेकिन कभी-कभी अपनी ही तीक्ष्णता के शिकार।

Ajit Pawar
4. सत्ता की खुली महत्वाकांक्षा

नवंबर 2019 की वह सुबह महाराष्ट्र की राजनीति के इतिहास में दर्ज हो गई, जब अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ अचानक शपथ ली। वे उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन सरकार सिर्फ दो दिन चली। हालांकि यह प्रयोग अल्पकालिक था, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहा।

यह कदम केवल अवसरवाद नहीं था, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था – अजित पवार अब सिर्फ शरद पवार के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि खुद सत्ता संभालने की महत्वाकांक्षा रखने वाले नेता हैं। मुख्यमंत्री बनने का सपना उन्होंने कभी नहीं छिपाया। यह सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने उन्हें महाराष्ट्र का सबसे अप्रत्याशित और ताकतवर खिलाड़ी बना दिया।

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5. शरद पवार (Ajit Pawar) से अलगाव और फिर रणनीतिक नजदीकी

जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा दांव खेला। उन्होंने शरद पवार से अलग होकर पार्टी में बगावत की, अधिकांश विधायकों को अपने साथ लिया और भाजपा -शिवसेना गठबंधन सरकार में शामिल हो गए। इससे न सिर्फ पार्टी, बल्कि पवार परिवार की राजनीतिक विरासत भी दो हिस्सों में बंट गई।

लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने विधानसभा चुनावों में 41 सीटें जीतकर जोरदार वापसी की। इसके बाद नगर निगम चुनावों से पहले अजित और शरद पवार की रणनीतिक नजदीकी दिखी, जिसे उन्होंने ‘व्यावहारिक राजनीति’ बताया। उस पुनर्मिलन ने भविष्य में दोनों गुटों के एक होने की अटकलों को जन्म दिया, जो अब उनकी मृत्यु के साथ अधूरी रह गईं।

Ajit Pawar funeral
6. मुख्यमंत्री बनने से बस एक कदम दूर

छह बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार (Ajit Pawar) महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली और निरंकुश सत्ताधारी नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने सरकारें बनाईं, दल तोड़े, और रातोंरात राजनीतिक समीकरण बदल दिए। वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में जैसा दबदबा उन्होंने बनाया, वैसा बहुत कम नेताओं को नसीब हुआ। Read More Ajit Pawar: बारामती के ‘दादा’ से महाराष्ट्र के ‘अजेय’ राजनेता तक का सफर, जानें अजित पवार के जीवन से जुड़े 6 बड़े मोड़

Ajit Pawar Funeral: नम आंखों और ‘अमर रहें’ के नारों के बीच पंचतत्व में विलीन अजित पवार, बेटों ने दी मुखाग्नि

Ajit Pawar Funeral:  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख अजित पवार (Ajit Pawar)  का बुधवार सुबह एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। इस हादसे से पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। राज्य सरकार ने अजित पवार के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। आज बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार (Ajit Pawar Funeral) किया गया।

समर्थकों का उमड़ा जनसैलाब 

बता दें कि सुबह से ही विद्या प्रतिष्ठान मैदान और आसपास के इलाकों में अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तिरंगे में लिपटा अजित पवार का पार्थिव शरीर जैसे ही अंतिम संस्कार स्थल पर पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। लोग नम आंखों से ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारे लगाते हुए अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देते नजर आए।

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Ajit Pawar Funeral
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परिवार ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

अंतिम संस्कार के दौरान अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार भावुक हो गईं। उन्होंने अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। बेटे पार्थ पवार और जय पवार ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अपने पिता की अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। राजकीय सम्मान के तहत पार्थिव शरीर पर लिपटा तिरंगा अंतिम संस्कार से पहले बेटे जय पवार को सौंपा गया। बेटों ने अंतिम संस्कार की सभी रस्में पुरी करते हुए अपने पिता को मुखाग्नि दी।

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Ajit Pawar Funeral

राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी

अजित पवार की अंतिम विदाई (Ajit Pawar Funeral) में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत सहित कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेता मौजूद रहे और अजित पवार के निधन (Ajit Pawar Funeral) पर गहरा शोक व्यक्त किया। एनसीपी (एससीपी) नेता सुप्रिया सुले ने सुनेत्रा पवार को गले लगाकर सांत्वना दी।

Ajit Pawar Funeral

ब्लैक बॉक्स बरामद, जांच जारी

इस बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जानकारी दी है कि बारामती में क्रैश हुए चार्टर प्लेन का कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) बरामद कर लिया गया है। डीजीसीए और फोरेंसिक टीम हादसे के कारणों की जांच में जुटी हुई हैं।

समर्थकों की उमड़ी भारी भीड़

अंतिम यात्रा के दौरान अजित पवार के पार्थिव शरीर (Ajit Pawar Funeral) को ले जा रहे वाहन के पीछे-पीछे हजारों समर्थक चलते नजर आए। सड़कों के दोनों ओर लोग अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े रहे। ड्रोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में विद्या प्रतिष्ठान मैदान में उमड़ा विशाल जनसैलाब साफ देखा जा सकता है।

अजित पवार के अचानक निधन से महाराष्ट्र की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है। समर्थक, कार्यकर्ता और राजनीतिक जगत उन्हें एक मजबूत, निर्णायक और जनप्रिय नेता के रूप में याद कर रहा है। Read More Ajit Pawar Funeral: नम आंखों और ‘अमर रहें’ के नारों के बीच पंचतत्व में विलीन अजित पवार, बेटों ने दी मुखाग्नि

Ajit Pawar Funeral: शोक में डूबा महाराष्ट्र, जननेता ‘अजित दादा’ को नम आंखों से अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब

Ajit Pawar Funeral: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। इस दुखद घटना से पूरे राज्य में शोक की लहर है।

निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक 

आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार उनके निधन (Ajit Pawar Funeral) पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। अजित पवार का अंतिम संस्कार आज सुबह 11 बजे बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। सुबह से ही अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नम आंखों और ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारों के बीच पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार स्थल की ओर ले जाया गया। जहां उनके बेटे पार्थ और जय ने बारामती में अपने पिता के अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। वहीं शवयात्रा के दौरान सड़कों के दोनों ओर भारी जनसैलाब उमड़ा रहा।

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Ajit Pawar Funeral
Ajit Pawar Funeral
ब्लैक बॉक्स बरामद, जांच के आदेश

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि हादसे का शिकार हुए चार्टर विमान का कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) बरामद कर लिया गया है। डीजीसीए अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हादसे में कोई भी जीवित नहीं बचा। मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

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 Ajit Pawar Plane Crash
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राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी

अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री पंकजा मुंडे और राधाकृष्ण विखे पाटिल विद्या प्रतिष्ठान मैदान पहुंच चुके हैं। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी अंतिम संस्कार में शामिल होने बारामती पहुंचे। इससे पहले मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने शरद पवार से मुलाकात कर शोक व्यक्त किया।

Ajit Pawar Funeral

परिवार और समर्थकों का अंतिम विदा

अजित पवार के बेटे जय पवार, भतीजे रोहित पवार सहित पवार परिवार के सदस्य अंतिम यात्रा में मौजूद रहे। समर्थक लगातार अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। बारामती और आसपास के इलाकों में शोकाकुल माहौल है। राज्य भर में शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं। वहीं सरकार की ओर से राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। Read More Ajit Pawar Funeral: शोक में डूबा महाराष्ट्र, जननेता ‘अजित दादा’ को नम आंखों से अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब