Prayagraj: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले विवाद के बाद प्रयागराज से प्रस्थान किया, न्याय की प्रतीक्षा की कही बात

Prayagraj: माघ मेले के दौरान हुए विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज (बुधवार) प्रयागराज से प्रस्थान कर गए। उन्होंने मेला प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें न्याय की प्रतीक्षा रहेगी।

मेले से लौटते समय की प्रेस कॉन्फ्रेंस

आपको बता दें कि 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) अपने अनुयायियों के साथ पालकी और रथ पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान मेला प्रशासन के साथ उनका विवाद सामने आया, जिसके बाद स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। इतने दिनों से चल रहे विवाद के बीच आज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज, माघ मेले से वापस कर लिया है। मेले से लौटते समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि, मौनी अमावस्या के दिन जब वे अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान के लिए जा रहे थे, तब उन्हें प्रशासन ने रोक दिया था। इसके बाद से वह अनशन पर बैठे थे और विवाद लगातार जारी रहा।

आगे उन्होंने कहा, “हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। आज स्वर बोझिल हैं और शब्द साथ नहीं दे रहे। भारी मन लेकर प्रयाग से लौटना पड़ रहा है। जो कुछ घटित हुआ, उसने मन झकझोर दिया। बिना स्नान किए विदा ले रहे हैं। न्याय की प्रतीक्षा कभी खत्म नहीं होती।”

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 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
प्रशासन का प्रस्ताव अस्वीकार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने बताया कि प्रशासन की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था जिसमें कहा गया कि भविष्य में स्नान के समय उन्हें पालकी के साथ सम्मानपूर्वक ले जाया जाएगा और पुष्प वर्षा भी की जाएगी। लेकिन प्रस्ताव में क्षमा के कोई शब्द नहीं थे, इसलिए उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया।

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप अपनी गलती के लिए क्षमा-याचना कर सकते हैं, तो ठीक है। लेकिन अगर नहीं, तो और कोई प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं। मुख्य मुद्दा बटुकों, सन्यासी और साधुओं के साथ किए गए व्यवहार का है। 10 दिन शिविर में बैठने के बाद जब जाने का निर्णय लिया, तभी यह प्रस्ताव आया। हम भारी मन से जा रहे हैं।”

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 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

मेला प्रशासन ने भेजे थे नोटिस

जानकारी के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन स्वामी को स्नान से रोकने के बाद मेला प्रशासन ने उन्हें दो नोटिस भेजे थे। दूसरे नोटिस में पूछा गया था कि क्यों न उनकी संस्था को मेले में दी जा रही भूमि और सुविधाओं को निरस्त किया जाए और प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए।

प्रशासन द्वारा लगाया आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने कहा कि प्रशासन द्वारा लगाया गया आरोप कि वे बग्घी से मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने गए थे, पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और निराधार है। वर्तमान में न तो वे शिविर में हैं और न ही उनके किसी आश्रम में कोई बग्घी है। Read More Prayagraj: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले विवाद के बाद प्रयागराज से प्रस्थान किया, न्याय की प्रतीक्षा की कही बात