UGC विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान आया सामने, बोले- “कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी…”

UGC Act – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए समानता नियमों को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और आलोचकों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि नए नियमों के तहत किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा और न ही कोई कानून का गलत इस्तेमाल कर सकेगा।

Education Minister Dharmendra Pradhan
Education Minister Dharmendra Pradhan
बढ़ते विरोध के बीच आया बयान

आपको बता दें कि आपको बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए यूजीसी एक्ट (UGC Act 2026) इक्विटी रेगुलेशन को लेकर देशभर में जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं, जिसके बाद छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश के विभिन्न शैक्षणिक परिसरों में यूजीसी (UGC) के नए रेगुलेशन के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी इन नियमों को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। छात्र, शिक्षक और कई संगठन सीधे तौर पर केंद्र सरकार से नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

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Dharmendra Pradhan
Dharmendra Pradhan
क्या बोले केंद्रीय शिक्षा मंत्री-

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा,“मैं अत्यंत विनम्रतापूर्वक यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूजीसी के नए नियमों से किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा। चाहे वह यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार – कानून का दुरुपयोग किसी के द्वारा नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि, “यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि नियमों का इस्तेमाल केवल न्याय और समानता के लिए हो, न कि किसी के खिलाफ हथियार के रूप में।”

धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजीसी (UGC) के ये नियम भारत के संविधान की सीमाओं के भीतर और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाए गए हैं। ऐसे में ये किसी भी वर्ग के खिलाफ भेदभाव की अनुमति नहीं देते।

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आखिर क्या है यूजीसी विवाद

यूजीसी  (UGC) द्वारा लाए गए “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम, 2026” को लेकर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया है। ये नियम 13 जनवरी को अधिसूचित हुए थे और 15 जनवरी से लागू कर दिए गए। सरकार का कहना है कि ये नियम 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन फ्रेमवर्क को और मजबूत करने के लिए लाए गए हैं, लेकिन विरोध करने वालों का आरोप है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन और दुरुपयोग की आशंका बढ़ेगी।

विवाद की क्या है जड़ ?

नए यूजीसी नियमों के तहत – हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में Equity Committee, Equity Squad और Equal Opportunity Cell (EOC) बनाना अनिवार्य है। SC, ST और OBC छात्रों व कर्मचारियों के खिलाफ जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर त्वरित जांच हो। 24×7 हेल्पलाइन, नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग की व्यवस्था हो। इसके साथ ही भेदभाव सिद्ध होने पर संस्थान की फंडिंग रोकी जा सकती है, कोर्स या डिग्री पर रोक लग सकती है और UGC मान्यता भी रद्द हो सकती है। भेदभाव की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है, जिसमें अब OBC वर्ग को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।

सरकार के आश्वासन के बावजूद यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर असंतोष बना हुआ है। प्रदर्शन, बयानबाजी और कानूनी चुनौतियों के बीच यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है। Read More UGC विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान आया सामने, बोले- “कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी…”