Kalashtami Vrat 2025: इस बार की कालाष्टमी है और भी खास, जानें इसकी शुभ तिथि व भगवान काल भैरव का पूजा करने का महत्व

BE NEWS – सनातन धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। यहां हर दिन और त्योहार किसी न किसी देवी और देवता को समर्पित माना जाता है। लोग बहुत ही श्रद्धाभाव से उनकी पूजा- अर्चना करते है। इन्हीं देवी-देवताओं में से एक है काल भैरव, जिन्हे शक्ति और सुरक्षा का देवता माना जाता है। इन्हें भगवान शिव का अंश भी माना जाता है। कहते है जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और भाव के साथ इनकी आराधना करते है उनके जीवन से सभी प्रकार के भय और नाकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। इसके साथ ही घर- परिवार और जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है, सुख- समृद्धि आती है।

मनाने की शुभ तिथि

आपको बता दें कि साल की आखिरी कालाष्टमी का व्रत 11 दिसंबर यानि आज पड़ रही है। जो पौषमाह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाएगी। जिसकी शुरुआत 11 दिसंबर दिन गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट से होगी। इसकी समाप्ति अगले दिन 12 दिसंबर दिन शुक्रवार को 2 बजकर 56 मिनट पर होगी।

Kalashtami : आज अधिकमासातील कालाष्टमी, महत्त्व आणि पुजा विधी - Marathi ... कालाष्टमी पर पूजा करने की विधि

इस दिन व्रत रखने वाले या पूजा करने वाले जातक को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद पूजा की जगह को साफ करके आसन बिछाकर फूलों से सजाना चाहिए। इसके बाद भगवान काल भैरव की फोटो या प्रतिमा को स्थापित कर गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद फूल, चंदन, रोली और सिंदूर अर्पित कर भगवान को मिठाई का भोग अर्पित करें। पूजा करने के बाद उनकी आरती करें। इसके आलावा इस दिन पर काले कुत्ते को रोटी खिलाना भी बहुत ही फलदायी माना जाता है। साथ ही सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

भगवान काल भैरव की कृपा का दिन 

कहते है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से परेशान है, तो वह काल भैरव के मंदिर पर जाकर दीपक जलाएं और एक नारियल लेकर अपने ऊपर से सात बार उतार कर हवन कुंड में डाल दें। इससे हर बुरी नजर दूर हो जाती है और भगवान काल भैरव की कृपा मिलती है। कालाष्टमी का तिथि जीवन से हर परेशानियों को दूर करती है और जीवन में सुख- शांति व सुरक्षा प्रदान करती है।