Kharmas 2025: खरमास में शुभ कार्यों को करना क्यों माना है वर्जित, आइए जानें इसकी तिथि, समय और इस दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए

BE NEWS – सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ कल 16 दिसंबर 2025 दिन मंगलवार से खरमास का प्रारंभ हो जाएगा। जिसकी की अवधि एक माह की होती है। इसके प्रांरभ होने के साथ ही सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं।

आपको बता दें कि हिन्दू पंचांग के अनुसार, सूर्य जब अपने वार्षिक गोचर के दौरान देवगुरु बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करते हैं, तब उस अवधि को खरमास कहा जाता है। राशियों के आधार पर इसे धनु खरमास और मीन खरमास के नाम से जाना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं, खरमास 2025 की तिथि, समय और इस दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए।

Kharmas 2022 | खरमास कब से शुरू है | Kab Se Shuru Hai Kharmas | kharmas ...

खरमास 2025 कब शुरू होगा

धनु खरमास की शुरुआत धनु संक्रांति के दिन होती है, यानी जब सूर्य वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करते हैं। जिसका आरंभ मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 से सुबह 04:27 बजे होगी। वहीं इसका समापन 14 जनवरी 2026 मकर संक्रांति के दिन होगा। जिसके साथ सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों का प्रारंभ हो जाएगा।

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क्यों नहीं किए जाते खरमास में शुभ कार्य

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य धनु और मीन राशि में होते हैं, तब वे बृहस्पति की राशियों में प्रवेश करते हैं। बृहस्पति के प्रभाव के कारण सूर्य की ऊर्जा और तेज कम हो जाता है। उसके कमजोर होने पर इस समय किए गए कार्यों में सफलता नहीं मिलती है। कार्यों में देरी और रुकावट आती है। इसी कारण शास्त्रों में खरमास की अवधि को विवाह और अन्य मांगलिक संस्कारों के लिए अशुभ बताया गया है। Read More Kharmas 2025: खरमास में शुभ कार्यों को करना क्यों माना है वर्जित, आइए जानें इसकी तिथि, समय और इस दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए

Kharmas 2025: खरमास में आखिर क्यों लग जाता है मांगलिक कार्यों पर विराम, आइए जानें इसके लगने का कारण और अवधि..

BE NEWS – हिंदू धर्म में खरमास का बहुत ही महत्व है। इसकी अवधि एक माह तक होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसमें सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित हो जाते है। जिसकी शुरुआत दिसंबर के इस महीने होने वाली है।

खरमास या मलमास की तिथि

आपको बता दें कि सनातन धर्म के अनुसार जब सूर्य धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करता है तो उस समय को खरमाल या मलमास कहा जाता है। इस अवधि के दौरान किसी भी तरह के शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार 16 दिसंबर 2025 दिन मंगलवार से सूर्य के धनुराशि में प्रवेश करते ही खरमास या मलमास का प्रारंभ हो जाएगा। जिसकी समाप्ति 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार को मकर संक्रांति को होगी, जब सूर्य अपना स्थान बदल कर मकर राशि में प्रवेश करेगा।

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नव ग्रहों में राजा सूर्य की स्थिति

धार्मिक मान्यता के अनुसार, खरमास के दौरान नव ग्रहों में राजा कहे जाने वाले सूर्य की स्थिति कमजोर मानी जाती है। कहते है कि किसी भी शुभ और  मांगलिक कार्य के लिए बृहस्पति (गुरु) और सूर्य का मजबूत होना आवश्यक होता है।

खरमास में वर्जित शुभ कार्य

इस एक माह की अवधि के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, नए व्यापार की शुरुआत या किसी भी बड़े व्रत या धार्मिक अनुष्ठान को शुरु नहीं करनी चाहिए।

धार्मिक ग्रंथों का पाठ, भगवान सूर्य की पूजा

कहते इस एक महीने के दौरान धार्मिक ग्रंथों का पाठ, भगवान सूर्य की पूजा और विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए। इसके साथ ही दान पुण्य भी करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान प्रतिदिन तुलसी की पूजा भी करनी चाहिए।