America-European Union Tariff War: अमेरिका-यूरोपीय संघ टैरिफ जंग के बीच भारत को मिला नया साझेदार, FTA से निर्यात को मिलेगी रफ्तार

America-European Union Tariff War – अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव में अब एक उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। टैरिफ वॉर के बीच भारत को यूरोपीय संघ का समर्थन मिला है, जिससे भारत को बड़ा फायदा मिल सकता है।

भारत के लिए एक बड़ा अवसर

दरअसल बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच भारत के लिए एक बड़ा अवसर उभरता नजर आ रहा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव, खासतौर पर आयात शुल्क को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता, भारत के लिए रणनीतिक लाभ का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत – यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अंतिम रूप ले लेता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ से होने वाले संभावित नुकसान से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

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भारत के लिए हो सकता बड़ा झटका 

हालिया विश्लेषण के मुताबिक भारत अमेरिका को हर साल करीब 79.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है। यदि अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर सख्त टैरिफ लगाए जाते हैं, तो यह भारत के लिए बड़ा झटका हो सकता है। हालांकि, इसी चुनौती के बीच एक मजबूत विकल्प भी सामने है। अनुमान है कि भारत अपने अमेरिकी निर्यात का लगभग 84% हिस्सा, यानी करीब 67.2 अरब डॉलर मूल्य का सामान, यूरोपीय बाजारों की ओर मोड़ सकता है, बशर्ते यूरोपीय संघ के साथ FTA लागू हो जाए।

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भारत को यूरोपीय संघ का समर्थन
वैश्विक व्यापार माहौल में बढ़ा तनाव 

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यूरोपीय देशों पर आयात शुल्क लगाने की घोषणाओं ने वैश्विक व्यापार माहौल में तनाव बढ़ा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत और EU के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। यह समझौता न केवल टैरिफ से होने वाले नुकसान को कम करेगा, बल्कि भारतीय उत्पादों को यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि EU बाजार में भारत के लिए टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स और आईटी सेवाओं जैसी कई श्रेणियों में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। इसके अलावा, निर्यात का विविधीकरण भारत को किसी एक देश या बाजार पर अत्यधिक निर्भरता से भी बचाएगा।

व्यापारिक रणनीति को नए सिरे से गढ़ने का मौका

कुल मिलाकर, ‘टैरिफ वॉर’ के इस दौर में भारत के पास अपनी व्यापारिक रणनीति को नए सिरे से गढ़ने का मौका है। यदि भारत–EU FTA समय पर और अनुकूल शर्तों के साथ लागू होता है, तो यह न सिर्फ अमेरिकी टैरिफ के असर को संतुलित करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में भी स्थापित करेगा। Read More America-European Union Tariff War: अमेरिका-यूरोपीय संघ टैरिफ जंग के बीच भारत को मिला नया साझेदार, FTA से निर्यात को मिलेगी रफ्तार

Tariff War with Iran: ट्रंप का बड़ा ऐलान, ईरान से कारोबार करने वालों पर अमेरिका लगाएगा 25% टैरिफ, भारत पर क्या होगा इसका असर…

BE NEWS – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक नया फरमान जारी किया है। सख्त रुख अपनाते हुए ट्रंप ने ये ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा उसे 25 प्रतिशत टैरिफ देना होगा।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर दी जानकारी

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने कल 12 जनवरी दिन सोमवार को एक बार फिर से बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापारिक संबध रखेगा उस पर 25 प्रतिशत टैरिफ देना होगा। ट्रंप ने इस फैसले की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आदेश अंतिम और निर्णायक है और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया

 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर असर

ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में चीन, भारत, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान और आर्मेनिया जैसे देश शामिल हैं। ऐसे में ट्रंप के इस कदम का सीधा असर इन सभी देशों पर पड़ने की आशंका है। भारत के लिए यह फैसला विशेष रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के वर्षों में भारत ईरान के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा है। अमेरिका पहले ही भारत पर ऊंचे टैरिफ लगा चुका है और अब ईरान के साथ व्यापार जारी रखने की स्थिति में भारतीय निर्यातकों को और अधिक दबाव झेलना पड़ सकता है।

भारत-ईरान व्यापार के आंकड़े

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत से ईरान को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम फाइबर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी शामिल हैं। वहीं ईरान से भारत में सूखे मेवे, रसायन और कांच से बने उत्पादों का आयात किया जाता है। वहीं वर्ष 2023 में भारत ने ईरान को करीब 1.19 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि ईरान से भारत का आयात लगभग 1.02 अरब डॉलर रहा। चावल, सोयाबीन मील और केले भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल रहे, जबकि ईरान से खासतौर पर रासायनिक उत्पादों का आयात हुआ।

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 केवल व्यापार तक सीमित नहीं भारत और ईरान

भारत और ईरान के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध हजारों वर्षों पुराने माने जाते हैं। भारतीय दूतावास के अनुसार, आज के दौर में ये संबंध राजनीतिक संवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के आपसी संपर्क के जरिए और मजबूत हुए हैं।

चाबहार के विकास को लेकर समझौता

भारत-ईरान संबंधों का सबसे अहम स्तंभ चाबहार बंदरगाह परियोजना है। 2015 में दोनों देशों के बीच चाबहार के विकास को लेकर समझौता हुआ था, जिसके बाद भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता भी किया गया। भारत की कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) वर्तमान में शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन और विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही है। मई 2024 में हुए 10 वर्षीय समझौते को दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद अहम माना गया। Read More Tariff War with Iran: ट्रंप का बड़ा ऐलान, ईरान से कारोबार करने वालों पर अमेरिका लगाएगा 25% टैरिफ, भारत पर क्या होगा इसका असर…