शिवलिंग पर जल अर्पण के समय किन तीन पवित्र स्थानों के स्पर्श करना है अत्यंत शुभ, जानिए उसका आध्यात्मिक महत्व…
BE NEWS – हिंदू सनातन धर्म में देवों को देव महादेव को विशेष स्थान दिया गया है। उनको प्रसन्न करना बहुत ही आसान है। जिन पर उनकी कृपा हो जाए उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। कहते है शिवलिंग पर अगर एक लोटा जल भी अर्पित करने मात्र से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उनकी शिवलिंग के स्पर्श मात्र से भी हर तरह के कष्टों से निजात मिलती हैं। ऐसे में जल चढ़ाने से लेकर शिवलिंग को स्पर्श करने तक कई नियम बताए गये हैं, जिनके बारे में आपको पता होना जरुरी है।
पवित्र स्थानों को स्पर्श और उनके आध्यात्मिक महत्व
आज हम आपको बताते है कि शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर सीधे जल चढ़ाने से पहले कुछ विशेष स्थानों का स्पर्श और पूजन करना अत्यंत शुभ माना गया है। जिनके स्पर्श करने मात्र से भय, रोग और कुंडली दोषों से निजात मिलती है और जीवन व विवाह संबधी समस्याएं भी दूर हो जाती है। आइए जानते हैं उन तीन पवित्र स्थानों और उनके आध्यात्मिक महत्व के बारे में।

शिवलिंग का आध्यात्मिक स्वरूप
शिवलिंग केवल भगवान शिव का प्रतीक नहीं है। जिसमें भगवान भोलेनाथ का पूरा परिवार वास करता है। बल्कि इसमें माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और पुत्री अशोक सुंदरी का भी वास माना गया है। इसलिए जल अर्पण करते समय श्रद्धा और विधि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का स्थान
शिवलिंग के अग्र भाग में दाईं और बाईं ओर जो स्थान होता है, वहां भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय विराजमान माने जाते हैं। सबसे पहले इन दोनों स्थानों को अपने हाथों से स्पर्श करें। यहां जल अर्पित करें और 5 से 7 बार हल्के हाथों से दबाएं। इस दौरान शिव मंत्रों का जाप करें। ऐसा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और बच्चों से जुड़ी परेशानियां व रोग दूर होने की मान्यता है।
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दूसरा अशोक सुंदरी का स्थान
शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग के मध्य भाग, जहां से जल प्रवाहित होता है, वहां भगवान शिव की पुत्री अशोक सुंदरी का वास माना गया है। इस स्थान पर पहले बेलपत्र अर्पित करें। फिर इस स्थान को स्पर्श करते हुए जल चढ़ाएं। मन ही मन अपनी इच्छा भगवान शिव के सामने रखें। इस विधि से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मांगलिक दोष से राहत मिलती है।

तीसरा माता पार्वती का स्थान
शिवलिंग के चारों ओर बने गोल आधार (जलहरी) में माता पार्वती का वास माना जाता है। सबसे पहले इस स्थान को श्रद्धा से स्पर्श करें। फिर यहां जल अर्पित करें। मान्यता है कि इससे शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है और गंभीर बीमारियों में भी लाभ प्राप्त होता है।
अंत में जल अर्पित करें
इन तीनों पवित्र स्थानों का स्पर्श और पूजन करने के बाद अंत में पूरे शिवलिंग पर जल अर्पित करें। ऐसा करने से पूजा संपूर्ण मानी जाती है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।