25 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है तुलसी पूजन दिवस, जानें कब और कैसै हुई इसकी शुरुआत व धार्मिक महत्व

BE NEWS – हर साल 25 दिसंबर को ईसाईयों का पवित्र क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है। जिसे भारत में भी लोग मनाते हैं। बच्चों के अंदर इस दिन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है। जगह- जगह लोग इस दिन को लेकर तैयारियां करते हैं। चर्च से लेकर शॉपिंग मॉल तक में सजावट की जाती है। लेकिन अब हिंदु धर्म में इस दिन को तुलसी पूजन दिवस के रुप में मनाया जाने लगा है। आइये जानें इसके बारे में कब और कैसे इसकी शुरुआत हुई।

आपको बता दें कि हर वर्ष 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में ईसाई धर्म का प्रमुख पर्व क्रिसमस मनाया जाता है, जिसे प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिवस के रूप में जाना जाता है। भारत में भी यह दिन उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी के साथ, पिछले कुछ वर्षों से हिंदू समाज में 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस के रूप में भी मनाया जाने लगा है।

आखिर क्रिसमस के दिन ही क्यों मनाया जाता है तुलसी पूजन दिवस? जानें हिंदू ...

तुलसी पूजन दिवस की शुरुआत

तुलसी पूजन दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। देश के साधु-संतों और धर्माचार्यों ने तुलसी के धार्मिक, सांस्कृतिक और आयुर्वेदिक महत्व को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से इस दिन को तुलसी पूजन के लिए समर्पित किया। उनका मानना था कि आधुनिक जीवनशैली में लोग तुलसी जैसे पवित्र और लाभकारी पौधे के महत्व को भूलते जा रहे हैं।

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हिंदू धर्म में तुलसी का महत्व

हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए तुलसी का पूजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह भी माना जाता है कि तुलसी की नियमित पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पारिवारिक जीवन भी सुखमय बना रहता है।

Tulsi Pujan Diwas 2024: तुलसी पूजन दिवस पर तुलसी में जरूर चढ़ाएं ये 3 ...

तुलसी पूजन से होने वाले लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है, मानसिक तनाव और नकारात्मकता कम होती है।

तुलसी पूजा की विधि

तुलसी पूजन दिवस के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा की सरल विधि इस प्रकार है- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तुलसी के पौधे के आसपास साफ-सफाई करें।  गंगाजल छिड़क कर शुद्धिकरण करने के बाद तुलसी जी को जल अर्पित करें। इसके बाद रोली या कुमकुम से तिलक लगाएं फिर लाल चुनरी या वस्त्र अर्पित करें। फूल और माला चढ़ा कर तुलसी के नीचे दीपक जलाएं और फल व मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें। Read More 25 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है तुलसी पूजन दिवस, जानें कब और कैसै हुई इसकी शुरुआत व धार्मिक महत्व

Vinayak Chaturthi 2025: साल की अंतिम चतुर्थी पर बन रहा विशेष संयोग, जानिए पूजा का शुभ समय और जरूरी नियम

BE NEWS – हमारे सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पुज्य कहा जाता है। किसी भी पूजा- पाठ या धार्मिक कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है। सभी संकटों के निवारण और विध्नों को दूर करने के लिए श्रद्धा और विधि-विधान से उनकी की पूजा की जाती है।

ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। ये एक बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि, विवेक और सौभाग्य में वृद्धि होती है, लेकिन पूजा में हुई छोटी-सी गलती भी शुभ फल को कम कर सकती है। इस साल की आखिरी विनायक चतुर्थी 24 दिसंबर 2026 दिन बुधवार को यानि कल मनाई जाएगी।

May Vinayak Chaturthi Puja Vidhi 2025 | विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की ...

विनायक चतुर्थी की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 23 दिसंबर को दोपहर में होगा। हालांकि उदय तिथि के कारण व्रत और मुख्य पूजा 24 दिसंबर 2025 को ही की जाएगी। चतुर्थी तिथि प्रारंभ 23 दिसंबर 2025 और समाप्ति 24 दिसंबर 2025 को होगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक रहेगा।

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विनायक चतुर्थी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां

1. तुलसी का प्रयोग न करें- भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती। इसके स्थान पर उन्हें दुर्वा (दूब घास) अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।

2. चंद्रमा के दर्शन से बचें- इस दिन पर चंद्र दर्शन करना अशुभ माना जाता है।

3. तामसिक भोजन से परहेज- विनायक चतुर्थी के दिन पर लहसुन, प्याज, मांस और शराब जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

4. दिशा का ध्यान – भगवान गणेश की पूजा करने से पहले ये जरुर ध्यान रखे कि प्रतिमा का मुख उत्तर या फिर पूर्व दिशा की ओर हो।

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सही विधि से कैसे करें पूजा

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शुभ मुहूर्त में चौकी पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। उन्हें 21 दुर्वा की गांठें अर्पित करें। गणेश जी के प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। अंत में गणेश चालीसा का पाठ करें और पूरे परिवार के साथ आरती करें। Read More Vinayak Chaturthi 2025: साल की अंतिम चतुर्थी पर बन रहा विशेष संयोग, जानिए पूजा का शुभ समय और जरूरी नियम

Paush Putrada Ekadashi 2025: कब रखा जाएगा पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें पारण का सही समय एंम इसका महत्व…

BE NEWS – सनातन धर्म में एकादशी का एक खास महत्व है। एकादशी का व्रत करने वाले करने वाले जातक को सभी प्रकार के कष्टों व पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख- समृद्धि का वास होता है।

एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की तिथि को आने वाली एकादशी को पौत्रदा एकादशी के रुप में मनाया जाता है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है तथा जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।ऐसे में आइए जानते हैं पौष पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और दिन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां।

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Paush Putrada Ekadashi 2025 Kab Hai: पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा ...

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि प्रारंभ 30 दिसंबर 2025 को सुबह 07:50 बजे और तिथि की समाप्ति 31 दिसंबर 2025 को सुबह 05:00 बजे होगी। उदयातिथि के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को रखा जाएगा। एकादशी व्रत का पारण 31 दिसंबर 2025 को द्वादशी तिथि को किया जाता है। जिसका शुभ समय दोपहर 01:29 बजे से 03:33 बजे तक रहेगा। इस समय के भीतर व्रत का पारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। Read More Paush Putrada Ekadashi 2025: कब रखा जाएगा पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें पारण का सही समय एंम इसका महत्व…

नववर्ष 2026 का पहले दिन बन रहे ये खास दुर्लभ संयोग, जानें कैसे करें पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत

BE NEWS – साल 2025 के खत्म होने के साथ ही कुछ ही दिनों में नववर्ष 2026 का शुरुआत हो जाएगी। हर साल की तरह इस बार भी लोग नए साल का स्वागत अपने तरीकों से करेंगे। कई लोग बाहर घूमने-फिरने के लिए जाते है, तो कोई धार्मिक स्थलों में जाकर पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत करना चाहता है। खास बात यह है कि वर्ष 2026 का पहला दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत ही शुभ माना जा रहा है।

भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का अद्भुत संयोग

आपको बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन वर्ष का पहला प्रदोष व्रत पड़ेगा, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। साथ ही यह दिन गुरुवार का होने के कारण भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा का अद्भुत संयोग बन रहा है।

गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ होता है और इसका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि -विधान से भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, रोगों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Read More नववर्ष 2026 का पहले दिन बन रहे ये खास दुर्लभ संयोग, जानें कैसे करें पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत

Budh Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित बुध प्रदोष व्रत आज, पूजा में भूल से भी न करें ये गलतियां…

BE NEWS – हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं। इसी शुभ समय में उनकी पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन से कर्ज, रोग, दरिद्रता व मानसिक कष्ट दूर होते हैं। लेकिन बुधवार को पड़े इस व्रत में भगवान शिव के साथ विघ्नहर्ता श्री गणेश की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि पूजा के दौरान कुछ नियमों की अनदेखी हो जाए, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत के दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जो की आज 17 दिंसबर 2025 दिन बुधवार को पड़ रहा है।  इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। ये तिथि 16 दिसंबर की रात 11 बजकर 58 मिनट पर शुरु होकर 18 दिसंबर को दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस दिन भगवान शिव के साथ गणेश भगवान की पूजा करने से बुद्धि, व्यापार और करियर के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। लेकिन इस व्रत में की गई छोटी-सी भूल भी पूजा के प्रभाव को कम कर सकती है। इसलिए इन नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है।

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शिवलिंग पर इन वस्तुओं को न चढ़ाएं

बता दें कि तुलसी विष्णु प्रिय है, शिवलिंग पर अर्पित नहीं की जाती। पौराणिक मान्यता के अनुसार केतकी का फूल यह शिव जी को अप्रिय है। हल्दी  यह देवी को अर्पित की जाती है, शिव पूजा में इसका प्रयोग वर्जित है। पूजा में हमेशा साबुत और शुद्ध अक्षत ही अर्पित करें। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर तिल चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन शिव जी को चंदन या भस्म चढ़ाना ही अधिक शुभ मानी जाती है।

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पूजा के समय बरतें ये सावधानियां-

पूजा करते समय काले वस्त्र नहीं पहनें चाहिए। सफेद, पीले या हल्के रंग के वस्त्र ही शुभ माने जाते हैं। व्रत के दिन मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचना चाहिए।किसी से झगड़ा या अपशब्द न बोलें। इसके साथ ही प्रदोष काल (संध्या समय) में ही पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है। Read More Budh Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित बुध प्रदोष व्रत आज, पूजा में भूल से भी न करें ये गलतियां…

New Year 2026: साल के पहले दिन करें ये शुभ कार्य, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि से भरपूर रहेगा पूरा साल…

BE NEWS – नए साल 2026 की शुरुआत अब बस कुछ ही समय दूर है। हर नया साल अपने साथ नई उम्मीदें, नए लक्ष्य और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है। हर कोई चाहता है कि नया साल उसके लिए खुशहाली से भरा हो। माना जाता है कि साल के पहले दिन की किए गये कार्य पूरे वर्ष भर प्रभाव डालते हैं। तो आइए जानते हैं कि साल 2026 के पहले दिन कौन-कौन से कार्य करना शुभ माना गया है…

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दरअसल भारतीय मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नववर्ष के पहले दिन कुछ विशेष कार्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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1. ब्रह्म मुहूर्त में करें प्रार्थना
नए साल के पहले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शांत मन से ईश्वर का ध्यान और प्रार्थना करें। माना जाता है कि इससे मन सकारात्मक रहता है और पूरे वर्ष अच्छे विचारों व ऊर्जा का संचार बना रहता है।

2. तुलसी को जल अर्पित करें
नववर्ष के दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना बहुत ही शुभ माना जाता है। तुलसी में मां लक्ष्मी का वास माना गया है और यह भगवान विष्णु को भी प्रिय है। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

3. दान-पुण्य अवश्य करें
साल के पहले दिन जरूरतमंदों को गर्म कपड़े, कंबल, अनाज या अपनी क्षमता के अनुसार धन का दान करें। मान्यता है कि इससे ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है और घर में खुशहाली बनी रहती है।

4. घर की साफ-सफाई करें
स्वच्छ घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए नए साल के पहले दिन घर की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। ऐसा करने से पूरे साल आर्थिक परेशानियां दूर रहती हैं।

5. लड्डू गोपाल की सेवा करें
नववर्ष के दिन लड्डू गोपाल की विशेष पूजा करें और उन्हें मीठे पकवानों का भोग लगाएं। माना जाता है कि इससे भगवान श्रीकृष्ण खुश होते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। Read More New Year 2026: साल के पहले दिन करें ये शुभ कार्य, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि से भरपूर रहेगा पूरा साल…

Kharmas 2025: खरमास में शुभ कार्यों को करना क्यों माना है वर्जित, आइए जानें इसकी तिथि, समय और इस दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए

BE NEWS – सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ कल 16 दिसंबर 2025 दिन मंगलवार से खरमास का प्रारंभ हो जाएगा। जिसकी की अवधि एक माह की होती है। इसके प्रांरभ होने के साथ ही सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं।

आपको बता दें कि हिन्दू पंचांग के अनुसार, सूर्य जब अपने वार्षिक गोचर के दौरान देवगुरु बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करते हैं, तब उस अवधि को खरमास कहा जाता है। राशियों के आधार पर इसे धनु खरमास और मीन खरमास के नाम से जाना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं, खरमास 2025 की तिथि, समय और इस दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए।

Kharmas 2022 | खरमास कब से शुरू है | Kab Se Shuru Hai Kharmas | kharmas ...

खरमास 2025 कब शुरू होगा

धनु खरमास की शुरुआत धनु संक्रांति के दिन होती है, यानी जब सूर्य वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करते हैं। जिसका आरंभ मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 से सुबह 04:27 बजे होगी। वहीं इसका समापन 14 जनवरी 2026 मकर संक्रांति के दिन होगा। जिसके साथ सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों का प्रारंभ हो जाएगा।

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क्यों नहीं किए जाते खरमास में शुभ कार्य

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य धनु और मीन राशि में होते हैं, तब वे बृहस्पति की राशियों में प्रवेश करते हैं। बृहस्पति के प्रभाव के कारण सूर्य की ऊर्जा और तेज कम हो जाता है। उसके कमजोर होने पर इस समय किए गए कार्यों में सफलता नहीं मिलती है। कार्यों में देरी और रुकावट आती है। इसी कारण शास्त्रों में खरमास की अवधि को विवाह और अन्य मांगलिक संस्कारों के लिए अशुभ बताया गया है। Read More Kharmas 2025: खरमास में शुभ कार्यों को करना क्यों माना है वर्जित, आइए जानें इसकी तिथि, समय और इस दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए

Saphala Ekadashi 2025: सफला एकादशी पर तुलसी पूजा से मिलेगा भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद, जानें क्या हैं पूजा के नियम एंव विधि…

BE NEWS – इस साल की अंतिम एकादशी 15 दिसंबर को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत बिना तुलसी के अधूरा है। क्योंकि श्रीहरि विष्णु को तुलसी बहुत ही प्रिय है, लेकिन संशय यह है कि क्या इस दिन तुलसी पूजा की जाना चाहिए? आज हम आपको बताएंगे इस दिन से जुड़े नियम और पूजा किए जाने की विधि…

सफला एकादशी व्रत की तिथि

आपको बता दें कि सफला एकादशी इस वर्ष 15 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 16 दिसंबर को किया जाएगा। हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है और इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ तुलसी माता की आराधना करने से विशेष पुण्य मिलता है। शास्त्रों में एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है।

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पूजा करने की विधि

शास्त्रों को अनुसार सफला एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद पूजा के स्थान को साफ करके आसन पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या मुर्ति को स्थापित करें। फल -फूल, मिठाई और नैवेघ अर्पित करें। शाम के समय मां तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। इसके बाद 5, 7 या 11 परिक्रमा करें और माता तुलसी और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।

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इन बातों का रखें विशेष ध्यान

एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, ऐसे में जल अर्पित करने और उनके पत्ते तोड़ने से भी बचना चाहिए। इससे उनके व्रत में बाधा उत्पन्न होती है और एकादशी व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। सफला एकादशी पर विधि-विधान से तुलसी पूजा और नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मकता, धन-धान्य और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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BE NEWS – हमारे सनातन धर्म में तुलसी पूजा का बहुत ही महत्व है। इस पौधे में देवी तुलसी का वास माना जाता है। घर के आंगन में इसे लगाना और पूजा – अर्चना करना बहुत ही शुभ माना है। रोजाना तुलसी पूजन करने वाले के घर- परिवार में हमेशा सुख- समृद्धि और शांति बना रहती है  लेकिन एकादशी की तिथि का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन कुछ खास उपायों के साथ – साथ कुछ सावधानियां बरतना भी बहुत आवश्यक है।

तुलसी पूजा के विशेष महत्व

आपको बता दें कि पौष माह का महीना तुलसी पूजा के लिए महत्वपूर्ण और विशेष महत्व रखता है। इस साल पौष माह की कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी 15 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पर तुलसी से जुड़े उपाय करने से विशेष फल का प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता प्राप्त होती है व धन संम्बधी समस्या भी दूर होती है।

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नाकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के उपाय

शास्त्रों के अनुसार कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन तुलसी जी को जल नहीं देना चाहिए। किसी भी तरह की नाकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए तुलसी जी की जड़ो से थोड़ी सी मिट्टी को लेकर अपने माथे पर तिलक करना चाहिए। कहते है एकादशी के दिन ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते है। इससे जीवन में खुशहाली और शांति आती है। Read More कृष्ण पक्ष की एकादशी को जरुर करें तुलसी से जुड़े ये उपाय, जानें पूजा के महत्व और इसके ज्योतिषीय लाभों के बारे में..

Kalashtami Vrat 2025: इस बार की कालाष्टमी है और भी खास, जानें इसकी शुभ तिथि व भगवान काल भैरव का पूजा करने का महत्व

BE NEWS – सनातन धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। यहां हर दिन और त्योहार किसी न किसी देवी और देवता को समर्पित माना जाता है। लोग बहुत ही श्रद्धाभाव से उनकी पूजा- अर्चना करते है। इन्हीं देवी-देवताओं में से एक है काल भैरव, जिन्हे शक्ति और सुरक्षा का देवता माना जाता है। इन्हें भगवान शिव का अंश भी माना जाता है। कहते है जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और भाव के साथ इनकी आराधना करते है उनके जीवन से सभी प्रकार के भय और नाकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। इसके साथ ही घर- परिवार और जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है, सुख- समृद्धि आती है।

मनाने की शुभ तिथि

आपको बता दें कि साल की आखिरी कालाष्टमी का व्रत 11 दिसंबर यानि आज पड़ रही है। जो पौषमाह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाएगी। जिसकी शुरुआत 11 दिसंबर दिन गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट से होगी। इसकी समाप्ति अगले दिन 12 दिसंबर दिन शुक्रवार को 2 बजकर 56 मिनट पर होगी।

Kalashtami : आज अधिकमासातील कालाष्टमी, महत्त्व आणि पुजा विधी - Marathi ... कालाष्टमी पर पूजा करने की विधि

इस दिन व्रत रखने वाले या पूजा करने वाले जातक को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद पूजा की जगह को साफ करके आसन बिछाकर फूलों से सजाना चाहिए। इसके बाद भगवान काल भैरव की फोटो या प्रतिमा को स्थापित कर गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद फूल, चंदन, रोली और सिंदूर अर्पित कर भगवान को मिठाई का भोग अर्पित करें। पूजा करने के बाद उनकी आरती करें। इसके आलावा इस दिन पर काले कुत्ते को रोटी खिलाना भी बहुत ही फलदायी माना जाता है। साथ ही सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

भगवान काल भैरव की कृपा का दिन 

कहते है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से परेशान है, तो वह काल भैरव के मंदिर पर जाकर दीपक जलाएं और एक नारियल लेकर अपने ऊपर से सात बार उतार कर हवन कुंड में डाल दें। इससे हर बुरी नजर दूर हो जाती है और भगवान काल भैरव की कृपा मिलती है। कालाष्टमी का तिथि जीवन से हर परेशानियों को दूर करती है और जीवन में सुख- शांति व सुरक्षा प्रदान करती है।