Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति आज या कल? जानिए सही तिथि, धार्मिक महत्व और दान-पुण्य का शुभ समय

BE NEWS – नए साल का पहला बड़ा पर्व मकर संक्रांति इस बार लोगों के बीच असमंजस का कारण बन गया है। कैलेंडर में जहां 14 जनवरी 2026 की तारीख दर्ज है, वहीं देश के कई हिस्सों में यह पर्व 15 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मकर संक्रांति कब मनानी चाहिए, खिचड़ी कब खानी है और दान-पुण्य का सही समय क्या है।

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इसे केवल एक त्योहार ही नहीं, बल्कि सूर्य की उपासना और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का इंतज़ार लोग पूरे वर्ष करते हैं। इसे भारत के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, केरल में  मकरविलक्कु, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, जबकि उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है।

Makar Sankranti 2025: कल या परसों, कब है मकर संक्रांति? जानें पूजन का ...

मकर संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी 2026 की रात 9 बजकर 19 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को उत्तरायण कहा जाता है, जिसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। चूँकि यह परिवर्तन रात्रि काल में हो रहा है, इसलिए शास्त्रों में वर्णित उदयातिथि के सिद्धांत के अनुसार संक्रांति से जुड़े स्नान, दान और पर्व-उत्सव अगले दिन, यानी 15 जनवरी को ही करना शास्त्रसम्मत एवं फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तिथि का उदय सूर्योदय के साथ होता है, उसी दिन उस पर्व का विधिवत पालन करना उचित होता है। इस कारण मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाना शुभ रहेगा।

ये भी देखें – Deoria News: मजार हटाई जा रही थी, लेकिन मां की आस्था ने सबको चौंका दिया | BE News

Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति के दिन इन कामों को करने से बचें ...

क्यों हो रहा है मकर संक्रांति की तारीख को लेकर भ्रम?

मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर आधारित होता है। यह त्योहार चंद्रमा नहीं बल्कि सौर गणना पर निर्भर करता है। वर्ष 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति काल) 14 जनवरी को देर रात हो रहा है। यही कारण है कि अलग-अलग पंचांग और परंपराओं के अनुसार इसकी तिथि अलग मानी जा रही है। जिन जगहों पर उदयातिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को महत्व दिया जाता है, वहां मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जा रही है। वहीं कुछ पंचांग संक्रांति के समय को आधार मानते हैं, इसलिए वहां यह पर्व 14 जनवरी को ही मनाया गया।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन आरंभ होता है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। गंगा स्नान को विशेष रूप से मोक्षदायी माना गया है। इस दिन सूर्य उत्तरायण से खरमास समाप्त हो जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

Makar Sankranti 2022 : Images, Wishes, Status, Wallpaper, Quotes, PNG ...

मकर संक्रांति के दिन क्या करें

इस दिन पर किसी भी पवित्र नदी या जलाशय में जाकर स्नान करें। अगर ये यह संभव न हो तो स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्याष्टक का पाठ करें। तिल, गुड़, खिचड़ी और तिल से बने व्यंजनों का दान करें। जरूरतमंदों, ब्राह्मणों या मंदिर के पुजारी को अन्न और वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है। Read More Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति आज या कल? जानिए सही तिथि, धार्मिक महत्व और दान-पुण्य का शुभ समय

Lohri 2026: देशभर में आज मनाया जा रहा है लोहड़ी का पर्व, आइए जानें क्यों खास है ये त्योहार, इसकी शुभ तिथि व ऐतिहािसक महत्व

BE NEWS – उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में लोहड़ी का पर्व सर्दियों की विदाई और नई ऋतु के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। अलाव की गर्माहट, लोकगीतों की गूंज और सामूहिक उल्लास के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और समाज के आपसी संबंधों का उत्सव है। हर वर्ष मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले लोहड़ी मनाई जाती है।

2026 में कब मनाई जाएगी लोहड़ी

आज 13 जनवरी, दिन मंगलवार को देशभर में लोहड़ी को त्योहार मनाया जा रहा है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने से पहले की आखिरी रात को दर्शाता है और शीत ऋतु के धीरे-धीरे समाप्त होने का संकेत देता है।

ये भी देखें-Meerut में Sonu Kashyap उर्फ रोनू की जिंदा जलाकर हत्या | BE News

लोहड़ी पर्व क्यों मनाया जाता है? | लोहड़ी माता की कथा एवं पौराणिक घटना पढ़े

 क्यों मनाई जाती है लोहड़ी

लोहड़ी के इस पर्व का संबंध सूर्य, अग्नि और फसल से जुड़ा हुआ है। किसान समुदाय के लिए यह पर्व खास महत्व रखता है क्योंकि इसी समय रबी की फसल, विशेषकर गेहूं, खेतों में पकने लगती है। अलाव के चारों ओर तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और पॉपकॉर्न अर्पित कर प्रकृति और अग्नि देवता के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। यह परंपरा अच्छी फसल और समृद्धि की कामना का प्रतीक है।

लोहड़ी का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

लोहड़ी का इतिहास पंजाब के लोकनायक दुल्ला भट्टी, जिन्हें ‘पंजाब का रॉबिनहुड’ कहा जाता है, से जुड़ा है। उन्होंने अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया और जरूरतमंद परिवारों, खासकर बेटियों के विवाह में सहायता की। लोहड़ी के पारंपरिक गीतों में आज भी दुल्ला भट्टी का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

Happy Lohri 2024 Punjabi Boliyan Lyrics: Sundar Mundariye, Aaya Lohri ...

लोहड़ी का सांस्कृतिक महत्व

लोहड़ी नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशु वाले परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है। भांगड़ा, गिद्धा, ढोल की थाप और सामूहिक नृत्य इस उत्सव को जीवंत बना देते हैं। यह पर्व सामूहिकता, भाईचारे और साझा खुशी का संदेश देता है।

लोहड़ी का संदेश

लोहड़ी हमें यह सिखाती है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी अपनी जड़ों और परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए। अलाव की आग केवल ठंड नहीं मिटाती, बल्कि लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है और पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करती है। Read More Lohri 2026: देशभर में आज मनाया जा रहा है लोहड़ी का पर्व, आइए जानें क्यों खास है ये त्योहार, इसकी शुभ तिथि व ऐतिहािसक महत्व

Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी कब मनाया जाएगा संक्रांति पर्व, जानिए शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और क्या करें–क्या न करें

BE NEWS – हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। नए साल का पहला त्योहार है, कि बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह पुण्य पर्व मनाया जाता है। इसे केवल एक त्योहार ही नहीं, बल्कि सूर्य की उपासना और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का इंतज़ार लोग पूरे वर्ष करते हैं।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, केरल में मकरविलक्कु, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, जबकि उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है।

Makar Sankranti 2026:14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्रांति? जानें शुभ योग ...

मकर संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी 2026 की रात 9 बजकर 19 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को उत्तरायण कहा जाता है, जिसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। चूँकि यह परिवर्तन रात्रि काल में हो रहा है, इसलिए शास्त्रों में वर्णित उदयातिथि के सिद्धांत के अनुसार संक्रांति से जुड़े स्नान, दान और पर्व-उत्सव अगले दिन, यानी 15 जनवरी को ही करना शास्त्रसम्मत एवं फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तिथि का उदय सूर्योदय के साथ होता है, उसी दिन उस पर्व का विधिवत पालन करना उचित होता है। इस कारण मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाना शुभ रहेगा।

ये भी देखें- Meerut Dalit Woman Murder: दलित महिला की हत्या लव एंगल या दबाव? | meerut case update | BE News

Makar Sankranti 2023: जानें, कब है मकर संक्रांति का त्यौहार 14 या 15 ...

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन आरंभ होता है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। गंगा स्नान को विशेष रूप से मोक्षदायी माना गया है। इस दिन सूर्य उत्तरायण से खरमास समाप्त हो जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

मकर संक्रांति के दिन क्या करें

इस दिन पर किसी भी पवित्र नदी या जलाशय में जाकर स्नान करें। अगर ये यह संभव न हो तो स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्याष्टक का पाठ करें। तिल, गुड़, खिचड़ी और तिल से बने व्यंजनों का दान करें। जरूरतमंदों, ब्राह्मणों या मंदिर के पुजारी को अन्न और वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति के दिन क्या न करें

1. स्नान और पूजा किए बिना भोजन ग्रहण न करें।

2. इस दिन पेड़-पौधों की कटाई से बचें।

3. तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखें।

4. सूर्योदय के बाद देर तक सोना और दिन में सोना अशुभ माना जाता है।

5. यदि कोई याचक सहायता मांगने आए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं।

Read More Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी कब मनाया जाएगा संक्रांति पर्व, जानिए शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और क्या करें–क्या न करें

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर पड़ रहा सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग, जानिए इसकी शुभ तिथि, पूजा विधि एंव धार्मिक महत्व…

BE NEWS – हमारे सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बहुत ही महत्व है। भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित यह तिथि बहुत ही शुभ मानी होती है। हिंदू धर्म के अनुसार सालभर में कुल 24 एकादशी होती हैं। प्रत्येक माह में दो एकादशी व्रत आते हैं- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में।

इसी क्रम में पंचाग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस बार जनवरी में ये तिथि 13 या 14 कब पड़ रही इसको लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। आइये आपको बताते है, इसकी शुभ तिथि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में…

Shattila ekadashi 2025 til ke upaay ekadashi date and time Shattila ...

षटतिला एकादशी 2026 की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह की कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी 2026, मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से होगी। वहीं इस तिथि का समापन 14 जनवरी 2026, बुधवार को शाम 5 बजकर 53 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

ये भी देखें – PM Modi Somnath Temple: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए PM Modi | BE News

Shattila Ekadashi Puja Vidhi 2024 : षटतिला एकादशी के दिन इस विधि से ...

षटतिला एकादशी की पूजा विधि

षटतिला एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ कर चौकी स्थापित करें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान के समक्ष दीपक और धूप जलाएं। व्रत का संकल्प लें और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। इस दिन तिल से बने व्यंजन तैयार कर भगवान को भोग अर्पित करें। अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।

षटतिला एकादशी शुभ मुहूर्त 2023 | षटतिला एकादशी का महत्व | षटतिला एकादशी ...

षटतिला एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व

षटतिला एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। षटतिला शब्द में षट का अर्थ छह और तिला का अर्थ तिल होता है। इस एकादशी पर तिल का छह प्रकार से उपयोग किया जाता है, जिसमें तिल का दान, तिल से स्नान, तिल का हवन, तिल से तर्पण, तिल का भोजन और तिल का उबटन शामिल है। मान्यता है कि इन उपायों को करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में धन, वैभव और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। Read More Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर पड़ रहा सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग, जानिए इसकी शुभ तिथि, पूजा विधि एंव धार्मिक महत्व…

Ekadashi January 2026: जनवरी 2026 में कब-कब रखा जाएगा एकादशी व्रत? जानें तिथि इस व्रत का महत्व और शुभ मुहूर्त

BE NEWS – हमारे सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बहुत ही महत्व है। भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित यह तिथि बहुत ही शुभ मानी होती है। हिंदू धर्म के अनुसार सालभर में कुल 24 एकादशी होती हैं। प्रत्येक माह में दो एकादशी व्रत आते हैं- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में।

एकादशी तिथि का महत्व

मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने वाले करने वाले जातक को सभी प्रकार के कष्टों व पापों से मुक्ति मिलती है। साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में यह जानने की उत्सुकता है कि जनवरी 2026 में कौन-कौन सी एकादशी आएगी और उनका व्रत कब रखा जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं।

Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी व्रत में शाम को क्या खाना चाहिए ...

जनवरी 2026 में पड़ने वाली एकादशी व्रत की सूची

1. षटतिला एकादशी 2026

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी तिथि आरंभ 13 जनवरी 2026 को दोपहर 03:17 बजे और इसकी समाप्ति 14 जनवरी 2026 को शाम 05:52 बजे होगी। वहीं उदयातिथि के अनुसार 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा, जिससे इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है। षटतिला एकादशी पर तिल का विशेष महत्व होता है और दान-पुण्य करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

तिथि: 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
पक्ष: माघ माह, कृष्ण पक्ष

ये भी देखें –ED Raid के बीच Pratik Jain के घर पहुंचीं CM Mamata Banerjee | BE News

Ekadashi Vrat 2026: षटतिला एकादशी व्रत कब है 13 या 14 जनवरी ...

2. जया एकादशी 2026

माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी तिथि आरंभ 28 जनवरी 2026 को दोपहर 04:35 बजे होगी। जिसकी समाप्ति 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01:55 बजे होगी। वहीं उदयातिथि के अनुसार 29 जनवरी 2026 को जया एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के भय और दोषों से मुक्ति मिलती है तथा आत्मिक शुद्धि होती है।

तिथि: 29 जनवरी 2026 (गुरुवार)
पक्ष: माघ माह, शुक्ल पक्ष

ये भी देखें – Today Breaking News ! आज 05 जनवरी 2026 के मुख्य समाचार बड़ी खबरें | TOP 25 | BE News

Aditi Vrat - Fasting Festival - Temple Yatri

एकादशी व्रत के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

1. एकादशी के दिन घर और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

2. इस दिन चावल, अनाज और तामसिक भोजन का सेवन न करें।

3. भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।

4. अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्न, धन, वस्त्र या तिल का दान करें।

5. एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि को ही करें।

एकादशी व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मसंयम, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाता है। Read More Ekadashi January 2026: जनवरी 2026 में कब-कब रखा जाएगा एकादशी व्रत? जानें तिथि इस व्रत का महत्व और शुभ मुहूर्त

Sakat Chauth Vrat 2026: संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का पावन पर्व सकट चौथ आज, जानिए कैसे करें पूजा विधि, कथा और इसका धार्मिक महत्व

BE NEWS – सनातन परंपरा में संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए अनेक व्रत-उपवास बताए गए हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत शुभ व फलदायी व्रत है सकट चौथ, जिसे तिलकुट चौथ भी कहा जाता है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और मुख्य रूप से भगवान श्री गणेश एवं चौथ माता की पूजा को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं संतान की रक्षा और कल्याण के लिए या संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत करती हैं, उन्हें भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सकट चौथ व्रत का महत्व

दरअसल सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से माताओं के लिए माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान के जीवन से संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं।

ये भी देखें- JNU में PM Modi और Amit Shah के खिलाफ विवादित नारे लगे। | BE News

Sakat Chauth पर गणपति बप्पा को लगाएं अपने हाथों से बने तिलकुट का भोग ...

सकट चौथ की पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल स्नान-ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सफेद तिल और गुड़ से तिलकुट्टा तैयार करें। एक चौकी पर जल का लोटा, रोली, अक्षत (चावल), तिल और तिलकुट्टा रखें और जल के लोटे पर रोली से सतिया बनाएं, और उस पर 13 बिंदियां लगाएं। हाथ में थोड़ा तिलकुट्टा लेकर सकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें। कथा पूर्ण होने के बाद तिलकुट्टा और कुछ रुपये एक कटोरी में रखकर बयना निकालें। यह बयना सास या साके समान किसी स्त्री को पैर छूकर दें। इसके बाद शाम के समय भगवान गणेश और चौथ माता की विधि-विधान से पूजा करें। चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें दूध का अर्घ्य दें, इसके बाद ही व्रत का पारण करें।

सकट चौथ की परंपराएं

इस दिन कई स्थानों पर तिल से बने पहार (पहाड़) को ढंककर रखा जाता है। अगले दिन सुबह पुत्र इसे खोलता है और सिक्के से काटकर सभी भाई-बंधुओं में बांट देता है। कहीं-कहीं तिल से बकरे की आकृति बनाकर उसे दूब या सिक्के से काटने की परंपरा भी है। मान्यता है कि यह परंपरा पशु बलि के स्थान पर प्रतीकात्मक रूप से शुरू की गई थी। इसके बाद सकट चौथ व्रत कथा का पाठ करें। Read More Sakat Chauth Vrat 2026: संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का पावन पर्व सकट चौथ आज, जानिए कैसे करें पूजा विधि, कथा और इसका धार्मिक महत्व

Year 2026: आपके लिए लाए हैं हम साल 2026 का कैलेंडर, यहां देखें आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी सूची

BE NEWS: दिसंबर के खत्म होने के साथ ही नए साल 2026 की शुरुआत हो जायेगी। ऐसे में आने वाले साल को लेकर हम सभी ये जानने के लिए उत्सुक हो जाते है कि कब और किस दिन कौन-सा व्रत व त्योहार मनाया जाएगा। भारत में व्रत और त्योहार न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़े होते हैं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व होता है।

ऐसे में अगर आप साल 2026 के लिए पहले से ही यात्रा, पूजा-पाठ या अन्य शुभ कार्यों की योजना बनाना चाहते हैं, तो यहां हम आपके लिए हिंदू कैलेंडर 2026 के अनुसार प्रमुख व्रत और त्योहारों को बताने जा रहे हैं। देखें मकर संक्राति से लेकर दीपावली तक पड़ने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी सूची….

January 2023 Vrat And Tyohar Know Sakat Chauth, Vasant Panchami, Lohri ...

ये भी देखे: Today Breaking News ! आज 13 दिसंबर 2025 के मुख्य समाचार बड़ी खबरें | आज की 25 बड़ी खबरें | BE NEWS Read More Year 2026: आपके लिए लाए हैं हम साल 2026 का कैलेंडर, यहां देखें आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी सूची

नववर्ष 2026 की शुरुआत पर बन रहा गुरु प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग, शिव कृपा पाने के लिए करें ये विशेष उपाय

BE NEWS – इस बार नए साल 2026 का आगाज गुरुवार के दिन हो रहा है। इसके साथ गुरु प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है। जोकि एक दुर्लभ संयोग के साथ बेहद शुभ योग भी है। भगवान शिव को समर्पित यह व्रत विशेष फल देने वाला है।

भगवान शिव की विशेष कृपा

आपको बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार, 1 जनवरी 2026, गुरुवार को नए साल की शुरुआत के साथ ही गुरु प्रदोष व्रत का महायोग बन रहा है। यह दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से महादेव की पूजा करने से जीवन के कष्ट, मानसिक तनाव और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। चूंकि यह प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जो विशेष रूप से सुख, सौभाग्य, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

Guru Pradosh Vrat 2023: गुरु प्रदोष व्रत की पूजा का महाउपाय, जिसे करते ...

तिथि और शुभ मुहूर्त

गुरु प्रदोष व्रत 2026, 1 जनवरी 2026, दिन गुरुवार को त्रयोदशी को हो रहा है। पूजा का समय प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) है। प्रदोष काल में की गई शिव पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न माने जाते हैं।

ये भी देखें- New Year पर स्टंटबाजों की खैर नहीं, पुलिस हुई अलर्ट | BE NEWS

January Pradosh Vrat 2025: नए साल के पहले प्रदोष व्रत पर भगवान शिव के ...

व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां

शास्त्रों में प्रदोष व्रत के दिन कुछ कार्यों को वर्जित बताया गया है। इनसे बचने पर ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है-

1. तामसिक भोजन से परहेज करें: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन न करें, भले ही नववर्ष का उत्सव क्यों न हो।

2. क्रोध और कलह से बचें: घर में शांति बनाए रखें। किसी से झगड़ा, अपशब्द या बड़ों का अपमान गुरु दोष का कारण बन सकता है।

3.स्नान और ध्यान: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और शिव जी का ध्यान करें।

4.पूजा में वर्जित वस्तुएं न चढ़ाएं: शिव पूजा में केतकी पुष्प, तुलसी दल और सिंदूर का प्रयोग न करें। इसके साथ ही काले रंग से बचें। पीले या सफेद वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत पर करने वाले विशेष उपाय

प्रदोष काल के समय शिव पूजा अवश्य करें। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। गुरुवार होने के कारण पीली वस्तुओं जैसे- चने की दाल, हल्दी या पीले फल का दान करना शुभ फल देता है और आर्थिक तंगी दूर करता है। भगवान शिव की आराधना करने से कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है। विशेष रूप से शनिदेव, राहु और केतु की कृपा प्राप्त होती है। Read More नववर्ष 2026 की शुरुआत पर बन रहा गुरु प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग, शिव कृपा पाने के लिए करें ये विशेष उपाय

Sakat Chauth 2026: कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत, यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसका धार्मिक महत्व…

BE NEWS – हिंदू धर्म में संकट चतुर्थी का बहुत ही महत्व है। भगवान गणेश और संकटा माता को समर्पित यह पर्व संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट चौथ या माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताएं द्वारा अपनी संतान के लिए रखा जाता है। आइये जानें इस व्रत के शुभ मुहूर्त, तिथि और धार्मिक महत्व…

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को संकट चौथ, तिलकुट चौथ या माघी चौथ कहा जाता है। पूजा में इस दिन तिल का विशेष रुप से प्रयोग किया जाता है। इस दिन व्रत करने से भगवान गणेश और संकटा माता विशेष कृपा संतान पर बनी रहती है। विध्नहर्ता सभी कष्टों और संकटों को दूर करते हैं व हर कार्य में सफलता मिलती है।

ये भी देखें- Lucknow में भारत रत्न पूर्व पीएम Atal Bihari Vajpayee की Jayanti पर कवि सम्मेलन | BE News

Sankashti Chaturthi 2023: कब रखा जाएगा एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत ...

सकट चौथ का शुभ मुहूर्त व तिथि

हिंदु पंचाग के अनुसार इस बार यह व्रत 6 जनवरी दिन मंगलवार 2026 को रखा जाएगा। जिसकी शुरुआत 06 जनवरी 2026 को सुबह 08: 01 मिनट पर होगी और समाप्ति 07 जनवरी सुबह 6:52 मिनट पर होगी। वहीं उदया तिथि के अनुसार ये पर्व 06 जनवरी 2026 को ही रखा जाएगा।

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय

संकट चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, संकट चौथ 2026 पर चंद्रोदय रात लगभग 9:00 बजे होगा।

Vakratunda Sankashti Chaturthi October 2025 Date shubh muhurat siddhi ...

संकट चौथ व्रत का महत्व

सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की परिक्रमा कर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया था, जिसके कारण वे प्रथम पूज्य कहलाए।

Akhurath Sankashti Chaturthi Paran Vidhi 2024: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी ...

सकट चौथ पर गणपति पूजन विधि

संकट चौथ के दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लें। इसके बाद चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर गणपति की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा या तस्वीर के आगे सिंदूर, दूर्वा, अक्षत, सुपारी और पुष्प अर्पित करें।  गणेश जी को तिलकुट (तिल से बनी मिठाई) का भोग लगाएं। इसके बाद संकट चौथ की पौराणिक कथा का पाठ करें।रात में चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।

Sakat Chauth 2024: When will it be celebrated? Date, rituals and all ...

संतान के जीवन से सभी विघ्न-बाधाएं होती हैं दूर 

इस दिन व्रत और पूजन करने से यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। संतान के जीवन से सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं व घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। Read More Sakat Chauth 2026: कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत, यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसका धार्मिक महत्व…

Masik Durgashtami 2025: साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी पर करें शक्ति उपासना, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…

BE NEWS – हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। यह दिन मां दुर्गा की पूजा और आराधना को समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने व पूजा-पाठ करने से  जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं व जीवन से सभी प्रकार की नाकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने व मां की उपासना करने से देवी मां प्रसन्न होती है, और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। जिससे घर- परिवार में सुख व शांति बनी रहती है। आइये आपको बताते है इस साल की अंतिम मासिक दुर्गा अष्टमी कब मनाई जाएगी। जानें इस दिन की पूजा विधि व शुभ मुहूर्त…

Jay Mata di🙏🏻welcome to live #live #livestream #viral #virallivestream ...

मासिक दुर्गा अष्टमी की शुभ मुहूर्त व तिथि

मासिक दुर्गा अष्टमी तिथि की शुरुआत 27 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजकर 09 मिनट पर होगी। वहीं इसका समापन 28 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजकर 59 मिनट पर होगा। हिंदु मान्यता के अनुसार हमारे सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यती दी जाती है। जिलके अनुसार इस वर्ष की अंतिम मासिक दुर्गा अष्टमी 28 दिसंबर 2025 दिन रविवार को मनाई जाएगी।

Masik Durga Ashtami 2025: मासिक दुर्गाष्टमी के दिन इस विधि से करें मां ...

मासिक दुर्गाष्टमी की सरल पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहने। घर के मंदिर की सफाई कर शांत मन से व्रत और पूजा का संकल्प लें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद गंगाजल से शुद्धिकरण करें। देवी को लाल चुनरी, फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें। अब मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं और भोग में हलवा, पूरी, फल या नारियल अर्पित करें।दुर्गा चालीसा का पाठ करें या “ॐ दुम दुर्गाय नमः” मंत्र का जाप करें। अंत में कपूर से आरती करें और मां से प्रार्थना करें।

ये भी देखें- Lucknow Gamla Chori News: PM Modi के कार्यक्रम के बाद प्रेरणा स्थल से गमले चोरी, Video Viral |

 मासिक दुर्गाष्टमी के लाभ

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्ष की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी आत्मचिंतन और संकल्प का विशेष अवसर होती है। इस दिन भक्त बीते वर्ष की गलतियों के लिए क्षमा याचना करते हैं और आने वाले वर्ष के लिए शक्ति, सद्बुद्धि और सफलता की कामना करते है। वहीं इस दिन पर कन्या पूजन, अन्न दान और जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य में वृद्धि होती है।

मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व

यह तिथि शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से भय, बाधा और मानसिक तनाव दूर होते हैं। साधक में आत्मबल, धैर्य और निर्णय क्षमता में भी वृद्धि होती है। Read More Masik Durgashtami 2025: साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी पर करें शक्ति उपासना, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…