Year 2026: आपके लिए लाए हैं हम साल 2026 का कैलेंडर, यहां देखें आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी सूची

BE NEWS: दिसंबर के खत्म होने के साथ ही नए साल 2026 की शुरुआत हो जायेगी। ऐसे में आने वाले साल को लेकर हम सभी ये जानने के लिए उत्सुक हो जाते है कि कब और किस दिन कौन-सा व्रत व त्योहार मनाया जाएगा। भारत में व्रत और त्योहार न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़े होते हैं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व होता है।

ऐसे में अगर आप साल 2026 के लिए पहले से ही यात्रा, पूजा-पाठ या अन्य शुभ कार्यों की योजना बनाना चाहते हैं, तो यहां हम आपके लिए हिंदू कैलेंडर 2026 के अनुसार प्रमुख व्रत और त्योहारों को बताने जा रहे हैं। देखें मकर संक्राति से लेकर दीपावली तक पड़ने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी सूची….

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नववर्ष 2026 की शुरुआत पर बन रहा गुरु प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग, शिव कृपा पाने के लिए करें ये विशेष उपाय

BE NEWS – इस बार नए साल 2026 का आगाज गुरुवार के दिन हो रहा है। इसके साथ गुरु प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है। जोकि एक दुर्लभ संयोग के साथ बेहद शुभ योग भी है। भगवान शिव को समर्पित यह व्रत विशेष फल देने वाला है।

भगवान शिव की विशेष कृपा

आपको बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार, 1 जनवरी 2026, गुरुवार को नए साल की शुरुआत के साथ ही गुरु प्रदोष व्रत का महायोग बन रहा है। यह दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से महादेव की पूजा करने से जीवन के कष्ट, मानसिक तनाव और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। चूंकि यह प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जो विशेष रूप से सुख, सौभाग्य, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

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तिथि और शुभ मुहूर्त

गुरु प्रदोष व्रत 2026, 1 जनवरी 2026, दिन गुरुवार को त्रयोदशी को हो रहा है। पूजा का समय प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) है। प्रदोष काल में की गई शिव पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न माने जाते हैं।

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व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां

शास्त्रों में प्रदोष व्रत के दिन कुछ कार्यों को वर्जित बताया गया है। इनसे बचने पर ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है-

1. तामसिक भोजन से परहेज करें: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन न करें, भले ही नववर्ष का उत्सव क्यों न हो।

2. क्रोध और कलह से बचें: घर में शांति बनाए रखें। किसी से झगड़ा, अपशब्द या बड़ों का अपमान गुरु दोष का कारण बन सकता है।

3.स्नान और ध्यान: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और शिव जी का ध्यान करें।

4.पूजा में वर्जित वस्तुएं न चढ़ाएं: शिव पूजा में केतकी पुष्प, तुलसी दल और सिंदूर का प्रयोग न करें। इसके साथ ही काले रंग से बचें। पीले या सफेद वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत पर करने वाले विशेष उपाय

प्रदोष काल के समय शिव पूजा अवश्य करें। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। गुरुवार होने के कारण पीली वस्तुओं जैसे- चने की दाल, हल्दी या पीले फल का दान करना शुभ फल देता है और आर्थिक तंगी दूर करता है। भगवान शिव की आराधना करने से कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है। विशेष रूप से शनिदेव, राहु और केतु की कृपा प्राप्त होती है। Read More नववर्ष 2026 की शुरुआत पर बन रहा गुरु प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग, शिव कृपा पाने के लिए करें ये विशेष उपाय

Sakat Chauth 2026: कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत, यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसका धार्मिक महत्व…

BE NEWS – हिंदू धर्म में संकट चतुर्थी का बहुत ही महत्व है। भगवान गणेश और संकटा माता को समर्पित यह पर्व संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट चौथ या माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताएं द्वारा अपनी संतान के लिए रखा जाता है। आइये जानें इस व्रत के शुभ मुहूर्त, तिथि और धार्मिक महत्व…

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को संकट चौथ, तिलकुट चौथ या माघी चौथ कहा जाता है। पूजा में इस दिन तिल का विशेष रुप से प्रयोग किया जाता है। इस दिन व्रत करने से भगवान गणेश और संकटा माता विशेष कृपा संतान पर बनी रहती है। विध्नहर्ता सभी कष्टों और संकटों को दूर करते हैं व हर कार्य में सफलता मिलती है।

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Sankashti Chaturthi 2023: कब रखा जाएगा एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत ...

सकट चौथ का शुभ मुहूर्त व तिथि

हिंदु पंचाग के अनुसार इस बार यह व्रत 6 जनवरी दिन मंगलवार 2026 को रखा जाएगा। जिसकी शुरुआत 06 जनवरी 2026 को सुबह 08: 01 मिनट पर होगी और समाप्ति 07 जनवरी सुबह 6:52 मिनट पर होगी। वहीं उदया तिथि के अनुसार ये पर्व 06 जनवरी 2026 को ही रखा जाएगा।

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय

संकट चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, संकट चौथ 2026 पर चंद्रोदय रात लगभग 9:00 बजे होगा।

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संकट चौथ व्रत का महत्व

सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की परिक्रमा कर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया था, जिसके कारण वे प्रथम पूज्य कहलाए।

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सकट चौथ पर गणपति पूजन विधि

संकट चौथ के दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लें। इसके बाद चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर गणपति की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा या तस्वीर के आगे सिंदूर, दूर्वा, अक्षत, सुपारी और पुष्प अर्पित करें।  गणेश जी को तिलकुट (तिल से बनी मिठाई) का भोग लगाएं। इसके बाद संकट चौथ की पौराणिक कथा का पाठ करें।रात में चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।

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संतान के जीवन से सभी विघ्न-बाधाएं होती हैं दूर 

इस दिन व्रत और पूजन करने से यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। संतान के जीवन से सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं व घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। Read More Sakat Chauth 2026: कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत, यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसका धार्मिक महत्व…

Masik Durgashtami 2025: साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी पर करें शक्ति उपासना, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…

BE NEWS – हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। यह दिन मां दुर्गा की पूजा और आराधना को समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने व पूजा-पाठ करने से  जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं व जीवन से सभी प्रकार की नाकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने व मां की उपासना करने से देवी मां प्रसन्न होती है, और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। जिससे घर- परिवार में सुख व शांति बनी रहती है। आइये आपको बताते है इस साल की अंतिम मासिक दुर्गा अष्टमी कब मनाई जाएगी। जानें इस दिन की पूजा विधि व शुभ मुहूर्त…

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मासिक दुर्गा अष्टमी की शुभ मुहूर्त व तिथि

मासिक दुर्गा अष्टमी तिथि की शुरुआत 27 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजकर 09 मिनट पर होगी। वहीं इसका समापन 28 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजकर 59 मिनट पर होगा। हिंदु मान्यता के अनुसार हमारे सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यती दी जाती है। जिलके अनुसार इस वर्ष की अंतिम मासिक दुर्गा अष्टमी 28 दिसंबर 2025 दिन रविवार को मनाई जाएगी।

Masik Durga Ashtami 2025: मासिक दुर्गाष्टमी के दिन इस विधि से करें मां ...

मासिक दुर्गाष्टमी की सरल पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहने। घर के मंदिर की सफाई कर शांत मन से व्रत और पूजा का संकल्प लें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद गंगाजल से शुद्धिकरण करें। देवी को लाल चुनरी, फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें। अब मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं और भोग में हलवा, पूरी, फल या नारियल अर्पित करें।दुर्गा चालीसा का पाठ करें या “ॐ दुम दुर्गाय नमः” मंत्र का जाप करें। अंत में कपूर से आरती करें और मां से प्रार्थना करें।

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 मासिक दुर्गाष्टमी के लाभ

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्ष की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी आत्मचिंतन और संकल्प का विशेष अवसर होती है। इस दिन भक्त बीते वर्ष की गलतियों के लिए क्षमा याचना करते हैं और आने वाले वर्ष के लिए शक्ति, सद्बुद्धि और सफलता की कामना करते है। वहीं इस दिन पर कन्या पूजन, अन्न दान और जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य में वृद्धि होती है।

मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व

यह तिथि शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से भय, बाधा और मानसिक तनाव दूर होते हैं। साधक में आत्मबल, धैर्य और निर्णय क्षमता में भी वृद्धि होती है। Read More Masik Durgashtami 2025: साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी पर करें शक्ति उपासना, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…

25 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है तुलसी पूजन दिवस, जानें कब और कैसै हुई इसकी शुरुआत व धार्मिक महत्व

BE NEWS – हर साल 25 दिसंबर को ईसाईयों का पवित्र क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है। जिसे भारत में भी लोग मनाते हैं। बच्चों के अंदर इस दिन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है। जगह- जगह लोग इस दिन को लेकर तैयारियां करते हैं। चर्च से लेकर शॉपिंग मॉल तक में सजावट की जाती है। लेकिन अब हिंदु धर्म में इस दिन को तुलसी पूजन दिवस के रुप में मनाया जाने लगा है। आइये जानें इसके बारे में कब और कैसे इसकी शुरुआत हुई।

आपको बता दें कि हर वर्ष 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में ईसाई धर्म का प्रमुख पर्व क्रिसमस मनाया जाता है, जिसे प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिवस के रूप में जाना जाता है। भारत में भी यह दिन उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी के साथ, पिछले कुछ वर्षों से हिंदू समाज में 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस के रूप में भी मनाया जाने लगा है।

आखिर क्रिसमस के दिन ही क्यों मनाया जाता है तुलसी पूजन दिवस? जानें हिंदू ...

तुलसी पूजन दिवस की शुरुआत

तुलसी पूजन दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। देश के साधु-संतों और धर्माचार्यों ने तुलसी के धार्मिक, सांस्कृतिक और आयुर्वेदिक महत्व को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से इस दिन को तुलसी पूजन के लिए समर्पित किया। उनका मानना था कि आधुनिक जीवनशैली में लोग तुलसी जैसे पवित्र और लाभकारी पौधे के महत्व को भूलते जा रहे हैं।

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हिंदू धर्म में तुलसी का महत्व

हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए तुलसी का पूजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह भी माना जाता है कि तुलसी की नियमित पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पारिवारिक जीवन भी सुखमय बना रहता है।

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तुलसी पूजन से होने वाले लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है, मानसिक तनाव और नकारात्मकता कम होती है।

तुलसी पूजा की विधि

तुलसी पूजन दिवस के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा की सरल विधि इस प्रकार है- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तुलसी के पौधे के आसपास साफ-सफाई करें।  गंगाजल छिड़क कर शुद्धिकरण करने के बाद तुलसी जी को जल अर्पित करें। इसके बाद रोली या कुमकुम से तिलक लगाएं फिर लाल चुनरी या वस्त्र अर्पित करें। फूल और माला चढ़ा कर तुलसी के नीचे दीपक जलाएं और फल व मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें। Read More 25 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है तुलसी पूजन दिवस, जानें कब और कैसै हुई इसकी शुरुआत व धार्मिक महत्व

Vinayak Chaturthi 2025: साल की अंतिम चतुर्थी पर बन रहा विशेष संयोग, जानिए पूजा का शुभ समय और जरूरी नियम

BE NEWS – हमारे सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पुज्य कहा जाता है। किसी भी पूजा- पाठ या धार्मिक कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है। सभी संकटों के निवारण और विध्नों को दूर करने के लिए श्रद्धा और विधि-विधान से उनकी की पूजा की जाती है।

ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। ये एक बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि, विवेक और सौभाग्य में वृद्धि होती है, लेकिन पूजा में हुई छोटी-सी गलती भी शुभ फल को कम कर सकती है। इस साल की आखिरी विनायक चतुर्थी 24 दिसंबर 2026 दिन बुधवार को यानि कल मनाई जाएगी।

May Vinayak Chaturthi Puja Vidhi 2025 | विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की ...

विनायक चतुर्थी की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 23 दिसंबर को दोपहर में होगा। हालांकि उदय तिथि के कारण व्रत और मुख्य पूजा 24 दिसंबर 2025 को ही की जाएगी। चतुर्थी तिथि प्रारंभ 23 दिसंबर 2025 और समाप्ति 24 दिसंबर 2025 को होगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक रहेगा।

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विनायक चतुर्थी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां

1. तुलसी का प्रयोग न करें- भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती। इसके स्थान पर उन्हें दुर्वा (दूब घास) अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।

2. चंद्रमा के दर्शन से बचें- इस दिन पर चंद्र दर्शन करना अशुभ माना जाता है।

3. तामसिक भोजन से परहेज- विनायक चतुर्थी के दिन पर लहसुन, प्याज, मांस और शराब जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

4. दिशा का ध्यान – भगवान गणेश की पूजा करने से पहले ये जरुर ध्यान रखे कि प्रतिमा का मुख उत्तर या फिर पूर्व दिशा की ओर हो।

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सही विधि से कैसे करें पूजा

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शुभ मुहूर्त में चौकी पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। उन्हें 21 दुर्वा की गांठें अर्पित करें। गणेश जी के प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। अंत में गणेश चालीसा का पाठ करें और पूरे परिवार के साथ आरती करें। Read More Vinayak Chaturthi 2025: साल की अंतिम चतुर्थी पर बन रहा विशेष संयोग, जानिए पूजा का शुभ समय और जरूरी नियम

Paush Putrada Ekadashi 2025: कब रखा जाएगा पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें पारण का सही समय एंम इसका महत्व…

BE NEWS – सनातन धर्म में एकादशी का एक खास महत्व है। एकादशी का व्रत करने वाले करने वाले जातक को सभी प्रकार के कष्टों व पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख- समृद्धि का वास होता है।

एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की तिथि को आने वाली एकादशी को पौत्रदा एकादशी के रुप में मनाया जाता है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है तथा जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।ऐसे में आइए जानते हैं पौष पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और दिन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां।

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Paush Putrada Ekadashi 2025 Kab Hai: पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा ...

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि प्रारंभ 30 दिसंबर 2025 को सुबह 07:50 बजे और तिथि की समाप्ति 31 दिसंबर 2025 को सुबह 05:00 बजे होगी। उदयातिथि के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को रखा जाएगा। एकादशी व्रत का पारण 31 दिसंबर 2025 को द्वादशी तिथि को किया जाता है। जिसका शुभ समय दोपहर 01:29 बजे से 03:33 बजे तक रहेगा। इस समय के भीतर व्रत का पारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। Read More Paush Putrada Ekadashi 2025: कब रखा जाएगा पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें पारण का सही समय एंम इसका महत्व…

नववर्ष 2026 का पहले दिन बन रहे ये खास दुर्लभ संयोग, जानें कैसे करें पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत

BE NEWS – साल 2025 के खत्म होने के साथ ही कुछ ही दिनों में नववर्ष 2026 का शुरुआत हो जाएगी। हर साल की तरह इस बार भी लोग नए साल का स्वागत अपने तरीकों से करेंगे। कई लोग बाहर घूमने-फिरने के लिए जाते है, तो कोई धार्मिक स्थलों में जाकर पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत करना चाहता है। खास बात यह है कि वर्ष 2026 का पहला दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत ही शुभ माना जा रहा है।

भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का अद्भुत संयोग

आपको बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन वर्ष का पहला प्रदोष व्रत पड़ेगा, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। साथ ही यह दिन गुरुवार का होने के कारण भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा का अद्भुत संयोग बन रहा है।

गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ होता है और इसका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि -विधान से भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, रोगों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Read More नववर्ष 2026 का पहले दिन बन रहे ये खास दुर्लभ संयोग, जानें कैसे करें पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत

Budh Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित बुध प्रदोष व्रत आज, पूजा में भूल से भी न करें ये गलतियां…

BE NEWS – हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं। इसी शुभ समय में उनकी पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन से कर्ज, रोग, दरिद्रता व मानसिक कष्ट दूर होते हैं। लेकिन बुधवार को पड़े इस व्रत में भगवान शिव के साथ विघ्नहर्ता श्री गणेश की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि पूजा के दौरान कुछ नियमों की अनदेखी हो जाए, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत के दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जो की आज 17 दिंसबर 2025 दिन बुधवार को पड़ रहा है।  इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। ये तिथि 16 दिसंबर की रात 11 बजकर 58 मिनट पर शुरु होकर 18 दिसंबर को दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस दिन भगवान शिव के साथ गणेश भगवान की पूजा करने से बुद्धि, व्यापार और करियर के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। लेकिन इस व्रत में की गई छोटी-सी भूल भी पूजा के प्रभाव को कम कर सकती है। इसलिए इन नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है।

Pradosh Vrat 2025: गुरु प्रदोष व्रत आज, नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा ...

शिवलिंग पर इन वस्तुओं को न चढ़ाएं

बता दें कि तुलसी विष्णु प्रिय है, शिवलिंग पर अर्पित नहीं की जाती। पौराणिक मान्यता के अनुसार केतकी का फूल यह शिव जी को अप्रिय है। हल्दी  यह देवी को अर्पित की जाती है, शिव पूजा में इसका प्रयोग वर्जित है। पूजा में हमेशा साबुत और शुद्ध अक्षत ही अर्पित करें। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर तिल चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन शिव जी को चंदन या भस्म चढ़ाना ही अधिक शुभ मानी जाती है।

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पूजा के समय बरतें ये सावधानियां-

पूजा करते समय काले वस्त्र नहीं पहनें चाहिए। सफेद, पीले या हल्के रंग के वस्त्र ही शुभ माने जाते हैं। व्रत के दिन मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचना चाहिए।किसी से झगड़ा या अपशब्द न बोलें। इसके साथ ही प्रदोष काल (संध्या समय) में ही पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है। Read More Budh Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित बुध प्रदोष व्रत आज, पूजा में भूल से भी न करें ये गलतियां…

New Year 2026: साल के पहले दिन करें ये शुभ कार्य, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि से भरपूर रहेगा पूरा साल…

BE NEWS – नए साल 2026 की शुरुआत अब बस कुछ ही समय दूर है। हर नया साल अपने साथ नई उम्मीदें, नए लक्ष्य और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है। हर कोई चाहता है कि नया साल उसके लिए खुशहाली से भरा हो। माना जाता है कि साल के पहले दिन की किए गये कार्य पूरे वर्ष भर प्रभाव डालते हैं। तो आइए जानते हैं कि साल 2026 के पहले दिन कौन-कौन से कार्य करना शुभ माना गया है…

Vastu Tips: इन चीज़ों को घर में रखने से आप पर बनी रहगी मां लक्ष्मी की ...

दरअसल भारतीय मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नववर्ष के पहले दिन कुछ विशेष कार्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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1. ब्रह्म मुहूर्त में करें प्रार्थना
नए साल के पहले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शांत मन से ईश्वर का ध्यान और प्रार्थना करें। माना जाता है कि इससे मन सकारात्मक रहता है और पूरे वर्ष अच्छे विचारों व ऊर्जा का संचार बना रहता है।

2. तुलसी को जल अर्पित करें
नववर्ष के दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना बहुत ही शुभ माना जाता है। तुलसी में मां लक्ष्मी का वास माना गया है और यह भगवान विष्णु को भी प्रिय है। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

3. दान-पुण्य अवश्य करें
साल के पहले दिन जरूरतमंदों को गर्म कपड़े, कंबल, अनाज या अपनी क्षमता के अनुसार धन का दान करें। मान्यता है कि इससे ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है और घर में खुशहाली बनी रहती है।

4. घर की साफ-सफाई करें
स्वच्छ घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए नए साल के पहले दिन घर की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। ऐसा करने से पूरे साल आर्थिक परेशानियां दूर रहती हैं।

5. लड्डू गोपाल की सेवा करें
नववर्ष के दिन लड्डू गोपाल की विशेष पूजा करें और उन्हें मीठे पकवानों का भोग लगाएं। माना जाता है कि इससे भगवान श्रीकृष्ण खुश होते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। Read More New Year 2026: साल के पहले दिन करें ये शुभ कार्य, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि से भरपूर रहेगा पूरा साल…