नववर्ष 2026 का पहले दिन बन रहे ये खास दुर्लभ संयोग, जानें कैसे करें पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत

BE NEWS – साल 2025 के खत्म होने के साथ ही कुछ ही दिनों में नववर्ष 2026 का शुरुआत हो जाएगी। हर साल की तरह इस बार भी लोग नए साल का स्वागत अपने तरीकों से करेंगे। कई लोग बाहर घूमने-फिरने के लिए जाते है, तो कोई धार्मिक स्थलों में जाकर पूजा-पाठ के साथ नए साल की शुरुआत करना चाहता है। खास बात यह है कि वर्ष 2026 का पहला दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत ही शुभ माना जा रहा है।

भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का अद्भुत संयोग

आपको बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन वर्ष का पहला प्रदोष व्रत पड़ेगा, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। साथ ही यह दिन गुरुवार का होने के कारण भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा का अद्भुत संयोग बन रहा है।

गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ होता है और इसका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि -विधान से भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, रोगों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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पूजा का शुभ समय और विधि

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन संध्या काल में भगवान शिव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्तों को प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और सुबह भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। इसके बाद दिनभर उपवास रखते हुए संध्या समय, यानी प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करनी चाहिए। शिव पूजा शोडशोपचार विधि से करें। इसमें जल से अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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मान्यता है कि इन पूजन सामग्रियों से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। धार्मिक विश्वासों के अनुसार नववर्ष के पहले दिन इस शुभ संयोग में की गई पूजा से पूरा वर्ष खुशहाली और समृद्धि से भरा रहता है।